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टीचर की हत्या के बाद बलूचिस्तान में प्रदर्शन, हाईवे जाम करने की धमकी; सुरक्षा बलों पर 'डेथ स्क्वॉड' को संरक्षण देने का आरोप

Published: Sun, 18 Oct 2026 03:55 PM (IST)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में शिक्षक परवेज़ मजहर की कथित हत्या के बाद उनके परिवार और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।

शिक्षक परवेज़ मजहर की बलूचिस्तान में कथित हत्या

शिक्षक परवेज़ मजहर की बलूचिस्तान में कथित हत्या

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डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक शिक्षक की हत्या के बाद, उनके परिवारवालों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की वे एक हाइवे पर चक्का जाम कर देंगे।

'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर आरोप लगाया कि वे परवेज मजहर की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को बचा रहे हैं। परवेज मजहर बलूचिस्तान के ग्वादर जिले के तटीय शहर पासनी स्थित 'गवर्नमेंट हाई स्कूल बब्बर शोर' में अरबी के शिक्षक थे।

शिक्षक की बलूचिस्तान में कथित हत्या

मजहर के रिश्तेदारों के मुताबिक, मंगलवार को उनके परिवार के सामने ही उन्हें उठा लिया गया और अगले दिन उनका शव मिला। उन्होंने दावा किया कि सरकार समर्थित एक सशस्त्र समूह (जिसे डेथ स्क्वॉड कहा जाता है) के सदस्यों ने उन्हें एक टॉर्चर सेंटर में ले जाकर कैद किया और फिर उनकी हत्या कर दी।

मजहर के बच्चों समेत कई प्रदर्शनकारी पासनी प्रेस क्लब के बाहर इकट्ठा हुए और उनकी मौत के जिम्मेदार लोगों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने मृतक शिक्षक के परिवार के लिए जवाबदेही और न्याय की मांग की।

परिवार ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे पासनी जीरो प्वाइंट पर धरना देंगे और मकरान कोस्टल हाईवे को जाम कर देंगे। यह हाइवे ग्वादर को कराची से जोड़ने वाला एक अहम रास्ता है।

उन्होंने मांग की कि सरकारी संस्थान उन सशस्त्र समूहों के खिलाफ कार्रवाई करें, जिन पर नागरिकों के अपहरण, उन्हें प्रताड़ित करने और उनकी हत्या करने का आरोप है। ये समूह कथित तौर पर सरकारी एजेंसियों के संरक्षण में काम करते हैं।

बलूचिस्तान के 'डेथ स्क्वॉड' क्या हैं?

बलूच अधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने 'डेथ स्क्वॉड' शब्द का इस्तेमाल उन सशस्त्र समूहों के लिए किया है, जिनपर आरोप है कि उन्हें पाकिस्तानी सरकारी संस्थानों से समर्थन या संरक्षण मिलता है।

इन समूहों पर बलूचिस्तान में नागरिकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों को निशाना बनाने का आरोप है। बलूचिस्तान एक ऐसा प्रांत है जो लंबे समय से विद्रोह और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई से प्रभावित रहा है।

(न्यूज एजेंसी ANI के इनौत के साथ)

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