को-पायलटों ने जब जानबूझकर प्लेन को किया क्रैश? 4 बड़ी विमान दुर्घटनाओं की रोंगटे खड़े करने वाली कहानी
फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में को-पायलट ने पायलट पर हमला कर विमान गिराने का प्रयास किया, जिसे भारतीय पायलट ...और पढ़ें

कब-कब को-पायलटों ने जानबूझकर प्लेन को किया क्रैश? (फोटो- रॉयटर्स)
HighLights
फ्लाईदुबई उड़ान में को-पायलट ने पायलट पर धारदार हथियार से हमला किया।
भारतीय पायलट स्मित माछर की बहादुरी से 170 से अधिक यात्री बचे।
विमानों को जानबूझकर क्रैश करने के कई ऐतिहासिक मामले सामने आए।
डिजिटल डेस्क, तेल अवीव। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 (FZ1073) के दौरान को-पायलट ने पायलट पर धारदार हथियार से हमला कर विमान को क्रैश करने की कोशिश की। हालांकि, भारतीय पायलट स्मित मछार की बहादुरी और सूझबूझ के चलते 170 से अधिक यात्रियों की जान बाल-बाल बच गई।
हालांकि, यह कोई पहली घटना नहीं है, इतिहास में ऐसे कई दर्दनाक मामले दर्ज हैं, जहां को-पायलटों ने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं और सनक के कारण जानबूझकर विमानों को (क्रैश) दुर्घटनाग्रस्त कर दिया।
मानसिक तनाव, वित्तीय नुकसान या सनक के चलते कई बार को-पायलटों ने प्लेनों को क्रैश किया है, आइए जानते हैं इन दर्दनाक हवाई हादसों के बारे में जहां पायलटों के चलते सैकड़ों लोगों की सांसें हमेशा के लिए थम गईं।
फेडेक्स फ्लाइट 705 (4 अप्रैल, 1994)
फेडेक्स का फ्लाइट इंजीनियर ऑबर्न कैलोवे नौकरी जाने के खतरे का सामना कर रहा था। अपने परिवार को 2.5 मिलियन डॉलर की जीवन बीमा राशि दिलाने के इरादे से उसने विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की खतरनाक साजिश रची। वह एक गिटार के केस में हथौड़े और भाला छिपाकर मेम्फिस से सैन जोस जा रहे फेडेक्स के मालवाहक विमान (DC-10) में सवार हुआ।
उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद, कैलोवे ने कॉकपिट में घुसकर चालक दल के तीनों सदस्यों- कैप्टन जेरी टकर, फर्स्ट ऑफिसर जेम्स टकर और फ्लाइट इंजीनियर एंडी पीटरसन पर हथौड़े से जानलेवा हमला कर दिया, ताकि विमान को दुर्घटनाग्रस्त करके वह अपने परिवार को बीमा राशि दिला सके।
हालांकि, सिर में गंभीर चोटों के बावजूद पायलटों ने कॉकपिट के अंदर उससे जमकर मुकाबला किया। इसी दौरान बाकी दो क्रू मेंबर्स ने कैलोवे को काबू में किया। शरीर पर लगे अत्यधिक चोट के बावजूद कैप्टन और क्रू ने विमान को सुरक्षित रूप से मेम्फिस हवाई अड्डे पर उतार लिया। चालक दल की सूझबूझ और बहादुरी से एक बड़ा हादसा टल गया और सभी की जान बच गई थी।
सिल्कएयर फ्लाइट 185 (19 दिसंबर, 1997)
इंडोनेशिया के जकार्ता से सिंगापुर जा रही इस उड़ान का बोइंग 737 विमान के कप्तान ने भारी वित्तीय नुकसान का सामना करते हुए जानबूझकर फ्लाइट रिकॉर्डर बंद कर दिए, को-पायलट को कॉकपिट से बाहर लॉक कर दिया और विमान को तेज गति से नदी में गिरा दिया, जिससे विमान में सवार सभी 104 लोगों की मौत हो गई।
हालांकि, इंडोनेशियाई जांच अधिकारियों ने तकनीकी खराबी की संभावना भी जताई थी और इस दावे पर कुछ विवाद रहा, लेकिन अमरीकी जांच एजेंसी (NTSB) सहित दुनिया भर के विमानन विशेषज्ञों द्वारा इसे व्यापक रूप से कप्तान द्वारा किया गया आत्महत्या का मामला ही स्वीकार किया जाता है।
इजिप्टएयर फ्लाइट 990 (31 अक्टूबर, 1999)
न्यूयॉर्क से काहिरा जा रहे इजिप्टएयर फ्लाइट 990 में उड़ान के दौरान जब कप्तान कॉकपिट से बाहर थे, तब को-पायलट गामिल अल-बटौटी ने ऑटोपायलट बंद कर दिया और जिससे विमान तेजी से नीचे की ओर चक्कर लगाने लगा।
ब्लैक बॉक्स रिकॉर्डिंग के अनुसार, जब कैप्टन भागते हुए कॉकपिट में वापस आए, तो उन्होंने घबराकर पूछा, "यह क्या हो रहा है? तुमने क्या किया?", लेकिन को-पायलट ने विमान के नियंत्रण को पीछे की ओर खींचने के कैप्टन के प्रयासों का विरोध किया और विमान अटलांटिक महासागर में गिर गया, इससे विमान में सवार सभी 217 लोगों की जान चली गई।
जर्मनविंग्स फ्लाइट 9525 (24 मार्च, 2015)
स्पेन के बार्सिलोना से जर्मनी के डसेलडोर्फ जा रहे इस एयरबस A320 विमान में 27 वर्षीय को-पायलट एंड्रियास लुबित्ज। वह गंभीर मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहा था। जब मुख्य कैप्टन कॉकपिट से शौचालय जाने के लिए बाहर निकले, तो लुबित्ज ने मौका पाकर कॉकपिट का दरवाजा अंदर से पूरी तरह लॉक कर दिया।
कप्तान ने दरवाजा तोड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन लुबित्ज ने जानबूझकर विमान को फ्रांसीसी आल्प्स पर्वतमाला में दुर्घटनाग्रस्त कर दिया। विमान में सवार सभी 150 लोगों की मौत हो गई।
जर्मनविंग्स की घटना के बाद बदला नियम
जर्मनविंग्स की घटना के बाद, ऐसी स्थिति को रोकने के लिए 'टू-इन-कॉकपिट' नियम लागू किया गया। इसके तहत, जब भी कोई पायलट कॉकपिट से बाहर निकलता है, तो केबिन क्रू के एक सदस्य को कॉकपिट में प्रवेश करना अनिवार्य है। पूरी उड़ान के दौरान कॉकपिट में हमेशा दो लोगों का होना जरूरी है।
