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एक शव के दो दावेदार, नेपाल बाढ़ में लाशों की पहचान के लिए लड़ाई, DNA टेस्ट अनिवार्य

Published: Mon, 31 Aug 2026 07:13 PM (IST)Updated: Mon, 31 Aug 2026 07:58 PM (IST)

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद शवों की पहचान एक बड़ी चुनौती बन गई है, जहां एक ही शव पर दो परिवारों ने दावा किया है।

एक शव पर दो परिवारों का दावा (फोटो क्रेडिट- द काठमांडू पोस्ट)

एक शव पर दो परिवारों का दावा (फोटो क्रेडिट- द काठमांडू पोस्ट)

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डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है वहीं 4000 से ज्यादा लापता हैं। इस बीच एक शव पर दो परिवारों ने अपना दावा पेश किया है। ऐसे में अधिकारियों को डीएनए टेस्ट का सहारा लेना पड़ रहा है, क्योंकि शव की पहचान करने में मुश्किल हो रही है।

पोखरा एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज में रखे शव नंबर 1003 की पहचान दो परिवारों के रिश्तेदारों ने की. एक परिवार मैलुंग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के कर्मचारी गोपाल डाहित का था, और दूसरा रूपनदेही के टूरिस्ट गाइड दामोदर बस्याल का जो बाढ़ के बाद लापता हो गए थे। दोनों परिवारों का कहना है कि लाश की शारीरिक बनावट उनके लापता रिश्तेदार से मिलती-जुलती है।

Nepal floods (6)

DNA टेस्ट की पड़ी जरूरत

दोनों परिवारों के अपने-अपने दावे पर अड़े रहने के कारण, अधिकारियों ने रविवार को डाहित और बस्याल के रिश्तेदारों से DNA सैंपल लिए ताकि लाश के DNA से उनकी तुलना की जा सके। जब तक नतीजों से पहचान पक्की नहीं हो जाती, तब तक लाश मुर्दाघर में ही रहेगी।

यह मामला अकेला नहीं है। कास्की जिला पुलिस के अनुसार, अस्पताल में एक और लाश पर भी दो परिवारों ने दावा किया है। पुलिस ने अब तक पांच परिवारों के रिश्तेदारों से DNA सैंपल लिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि जिन लाशों पर उन्होंने दावा किया है, वे वाकई उनके लापता रिश्तेदार हैं या नहीं।

काठमांडू पोस्ट के अनुसार, 'कास्की जिला पुलिस के कार्यवाहक प्रवक्ता इंस्पेक्टर दीपक रिजाल ने कहा, 'आपदा के समय, इस बात की संभावना रहती है कि कोई परिवार गलती से किसी और की लाश न ले जाए। इसीलिए DNA टेस्ट जरूरी है।'

यह उलझन तब पैदा हुई जब अधिकारी भोटेकोशी बाढ़ के बाद मिली बड़ी संख्या में लाशों की पहचान की प्रक्रिया में जुटे थे। गोरखा, तनाहुन, धाडिंग और पूर्वी नवलपरासी से कुल 102 लाशें पोखरा लाई गई थीं। रविवार तक, 16 लाशों की पहचान कर उन्हें रिश्तेदारों को सौंप दिया गया था।

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दो परिवार, एक शव...

बाढ़ के बाद लापता होने पर डाहित के रिश्तेदार उन्हें खोजने के लिए बर्दिया से आए थे। उनकी दो बहनें, एक भाई और भाभी शुक्रवार को बारबर्दिया नगरपालिका-2 के जोगीगांव से निकले थे। अगली सुबह, वे पूर्वी नवलपरासी के गैंडाकोट पहुंचे, जहां उन्हें मिली हुई लाशों की तस्वीरें दिखाई गईं। उन्होंने लाश नंबर 1003 को डाहित के रूप में पहचाना।

पुलिस ने उन्हें बताया कि लाश पोखरा भेज दी गई है और परिवार उसी दिन वहां पहुंच गये। शारीरिक विवरण उस तस्वीर से मेल खाता हुआ लग रहा था जिसे उन्होंने देखा था और अस्पताल शनिवार शाम को लाश सौंपने की तैयारी कर रहा था। लेकिन तभी दाहित के बड़े भाई, कृष्ण बहादुर थारू, शव को खुद देखने के लिए पोखरा के रास्ते में ही थे। जब वे रविवार दोपहर को वहां पहुंचे, तब तक एक और परिवार ने शव पर अपना दावा कर दिया था।

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'बॉडी नंबर 1003' पर विवाद 

राधेश्याम शर्मा बस्याल, एक रिश्तेदार से 'बॉडी नंबर 1003' की फोटो मिलने के बाद पोखरा गए थे। उनके छोटे भाई दामोदर, मानसरोवर से 67 पर्यटकों के एक ग्रुप के साथ केरुंग की यात्रा पर जाने के बाद लापता हो गए थे। बस्याल ने कहा कि फोटो में कई खास बातें उनके भाई से मिलती-जुलती थीं।

उन्होंने अपने मोबाइल पर दामोदर की फोटो दिखाते हुए कहा, 'एक तिल था। वह मिल गया। उनके होंठ मोटे थे और वह भी मिल गया। वह मेरा सबसे छोटा भाई है। मैं DNA टेस्ट के लिए तैयार हूं।' उन्होंने कहा कि जब तक वैज्ञानिक तरीके से पहचान पक्की नहीं हो जाती, तब तक शव किसी भी परिवार को नहीं सौंपा जाना चाहिए।

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