नेपाल की सुरंगों में जिंदगी की जंग, कीचड़ और मलबे के बीच 537 लोगों की तलाश
नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर ढहने से आई बाढ़ के बाद नौ हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे 933 ...और पढ़ें

नेपाल बाढ़ के बाद सुरंगों में फंसे 537 लोगों को बचाने की कोशिश जारी

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा ढहने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ के बीच हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
रसुवा और नुवाकोट जिलों की नौ हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में कुल 933 लोगों के फंसे होने की सूचना है। इनमें से 361 लोगों को अब तक बाहर निकाला जा चुका है, जबकि करीब 537 लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।
प्रेट्र के अनुसार, मलबे और कीचड़ से सुरंगों के रास्ते बंद होने के कारण बचाव अभियान में भारी दिक्कत आ रही है। करीब 10 हजार सुरक्षाकर्मी और बचावकर्मी सुरंगों तक पहुंचने के लिए खुदाई में जुटे हैं। नेपाली सेना भारी उपकरणों के साथ ब्लास्टिंग की मदद भी ले रही है।
त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग में फंसे करीब 40 लोगों को निकालने के लिए भारत की 11 सदस्यीय सुरंग बचाव विशेषज्ञ टीम काम कर रही है। भारतीय सेना के 22 जवान भी मौके पर मौजूद हैं। चीन की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम अपर त्रिशूली-3बी परियोजना में बचाव अभियान में जुटी है।

अपर त्रिशूली-1 में सबसे ज्यादा लोग फंसे
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथारिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, अलग-अलग हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में 600 से ज्यादा कर्मचारी फंसे हैं। लांगतांग खोला साइट पर अपर त्रिशूली-1 और 1बी परियोजनाओं से 254 लोगों को निकाला जा चुका है।
216 मेगावाट की निर्माणाधीन अपर त्रिशूली-1 परियोजना में करीब 500 कर्मचारी, मजदूर और इंजीनियर फंसे थे। इनमें करीब 400 लोगों के अब भी अंदर होने की आशंका है।
अपर त्रिशूली-3बी साइट पर 213, रसुवागढ़ी में 93, अपर त्रिशूली-3ए और लांगतांग खोला साइट पर 42-42 तथा मेलुंग खोला में सात लोगों के फंसे होने की सूचना है। रसुवा भोटेकोशी में चार और मध्य त्रिशूली में दो लोग फंसे बताए गए हैं। त्रिशूली-3बी हब सबस्टेशन में 16, चिलिम में आठ तथा देवीघाट और रसुवा डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर में दो-दो कर्मचारी लापता हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, अपर त्रिशूली-3ए परियोजना में 90 सदस्यीय बचाव दल लगाया गया है। टीम मुख्य सुरंग के क्राउन हेड तक पहुंच गई है और वहां से करीब छह वर्गफुट का रास्ता बनाने का काम चल रहा है।

तीन और भारतीयों को बचाया गया
एनडीआरआरएमए के अनुसार, नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 955 हो गई है, जबकि करीब 3900 लोग अब भी लापता हैं।
नेपाली सेना ने रसुवा जिले के चिलिम गांव से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला है। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि तीनों को भारत भेजने की तैयारी की जा रही है।
एनडीआरआरएमए के मुताबिक, बचाव अभियान में जरूरी उपकरणों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्राधिकरण के पूर्व सीईओ अनिल पोखरेल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन उपकरणों की सीमित उपलब्धता के कारण पर्याप्त मात्रा में खरीद नहीं हो सकी।

चीन ने नेपाल के आरोपों को किया खारिज
चीन ने नेपाल के उस आरोप को खारिज किया है कि उसने ग्लेशियरों की गतिविधियों और पानी के स्तर से जुड़ा जरूरी डाटा साझा नहीं किया। प्रेट्र के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जिआकुन ने कहा कि चीन के वर्ल्ड मेट्रोलाजिकल सेंटर ने बाढ़ से 12 दिन पहले नेपाल को ईमेल भेजकर भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ की चेतावनी दी थी।
उन्होंने तिब्बत-नेपाल सीमा पर इस आपदा में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी। लापता लोगों में 49 भारतीय शामिल हैं।

रायटर के अनुसार, नेपाल और चीन के अधिकारियों ने 27 मई को काठमांडू में बैठक कर बाढ़, मौसम और ग्लेशियर से जुड़े खतरों पर चर्चा की थी। नेपाल ने ग्लेशियरों में होने वाली शुरुआती हलचल और संभावित खतरे की जानकारी पहले उपलब्ध कराने की मांग की थी।
नेपाल के एक सरकारी हाइड्रोलाजिस्ट के मुताबिक, चीन भारी बारिश के पूर्वानुमान की जानकारी साझा करता है, लेकिन हिमस्खलन, पानी के स्तर, भूस्खलन और अन्य बड़े प्राकृतिक खतरों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं कराता। हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संबंधित जानकारी खुले और पारदर्शी तरीके से साझा की गई थी।
