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नेपाल में बाढ़ के बाद 'डिजिटल तबाही', AI से बनी फर्जी तस्वीरें और पुराने वीडियो हो रहे शेयर

Published: Mon, 31 Aug 2026 11:17 PM (IST)

नेपाल में बाढ़ के दौरान सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं, पुराने वीडियो और एआई-जनरेटेड फर्जी सामग्री की बाढ़ आ गई है, जिससे वास्तविक जानकारी पहचानना मुश्किल हो रहा है।

नेपाल बाढ़ आपदा में एआई जनित गलत सूचनाओं का बढ़ता खतरा (फोटो-PTI)

नेपाल बाढ़ आपदा में एआई जनित गलत सूचनाओं का बढ़ता खतरा (फोटो-PTI)

HighLights

  1. नेपाल बाढ़ में सोशल मीडिया पर फर्जी सामग्री की बाढ़।

  2. प्रेस काउंसिल ने भ्रामक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए।

  3. एआई-जनित गलत सूचनाएं फैक्ट-चेकर्स के लिए चुनौती।

डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल में अचानक आई भयानक बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों के साथ एक और चुनौती सामने आ गई है।

सोशल मीडिया पर आपदा से जुड़ी गलत सूचनाओं, पुराने वीडियो और एआई से बनाए गए फर्जी तस्वीरों और वीडियो की बाढ़ आ गई है। इससे लोगों के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि कौन-सी तस्वीर या वीडियो वास्तव में नेपाल की मौजूदा आपदा की है और कौन-सी फर्जी।

स्थिति को देखते हुए नेपाल प्रेस काउंसिल ने भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत के लिए एक खास पोर्टल शुरू किया है।

द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, भोटेकोशी घटना पर विशेष शिकायतें नाम से शुरू किए गए इस पोर्टल के जरिए लोग आपदा से जुड़े गलत और आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत कर सकते हैं।

72 यूजर्स को कंटेंट हटाने का निर्देश

नेपाल प्रेस काउंसिल के चेयरमैन उमेश श्रेष्ठ के मुताबिक, 72 इंटरनेट मीडिया यूजर्स को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का निर्देश दिया गया है। इनमें ज्यादातर पोस्ट निजी अकाउंट से किए गए थे। काउंसिल को शनिवार शाम तक कुल 101 शिकायतें मिली थीं।

इनमें 67 शिकायतें निजी अकाउंट से किए गए पोस्ट के खिलाफ थीं। कुछ ऑनलाइन न्यूज पोर्टल और उनके इंटरनेट मीडिया पेज भी शिकायतों के दायरे में आए हैं।

पुरानी तस्वीरों के साथ एआई का नया खतरा

फैक्ट-चेकर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आपदा से जुड़ा काफी कंटेंट पहली नजर में वास्तविक दिखाई देता है। जांच में कई ऐसे वीडियो और तस्वीरें सामने आए हैं जो नेपाल की मौजूदा बाढ़ के बजाय दूसरे देशों की पुरानी आपदाओं से जुड़े हैं।

भ्रामक तस्वीरों और वीडियो का असर ऐसे समय में ज्यादा गंभीर हो जाता है, जब परिवार अपने लापता परिजनों की खबर पाने के लिए सोशल मीडिया पर नजर बनाए हुए हैं। किसी पुराने वीडियो को मौजूदा घटना बताकर साझा करने से लोगों में भ्रम और डर बढ़ सकता है।

नेपाल फैक्ट चेक भी ऐसे भ्रामक कंटेंट और एआई से तैयार फर्जी सामग्री की पड़ताल कर रहा है। फैक्ट-चेकर्स का कहना है कि एआई ने आपदाओं से जुड़ी गलत सूचनाओं की पुरानी समस्या को और जटिल बना दिया है।

त्रासदी से कमाई की कोशिश पर सवाल

अधिकारियों और फैक्ट-चेकर्स की चिंता सिर्फ गलत सूचना तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर ज्यादा लाइक, व्यू और शेयर हासिल करने की होड़ में कुछ यूजर्स आपदा की तस्वीरों और वीडियो को वायरल कंटेंट की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे मानवीय त्रासदी को कमाई का जरिया बनाने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सरकार की सोशल मीडिया रेगुलेशन और मैनेजमेंट कमेटी ने इस समस्या से निपटने के लिए इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों से बातचीत शुरू की है।

कमेटी को ग्राफिक कंटेंट, एआई से तैयार गलत सूचनाओं, फर्जी क्यूआर कोड और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों से निपटने की जिम्मेदारी दी गई है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)