नेपाल के मुर्दाघरों में लाश रखने की नहीं बची जगह, बहकर कई किलोमीटर दूर तक पहुंचे शव
नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के कारण मुर्दाघर शवों से भर गए हैं, जिनकी क्षमता केवल 350 शवों की है

शव बहकर नीचे की ओर आ रहे हैं (फोटो: पीटीआई)

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डिजिटल डेस्क, पोखरा। भोटेकोशी नदी की बाढ़ में बह गए लोगों के शव जैसे-जैसे बहकर नीचे की ओर आ रहे हैं, अस्पतालों के लिए इन्हें रखने में मुश्किल हो रही है। आपदा से जूझ रहे नेपाल के मुर्दाघरों में सिर्फ 350 शव रखने की क्षमता है। जब तक स्वजन आएंगे और शवों को पहचानकर ले जाएंगे, तब तक इनकी देखभाल करनी है।
लेकिन, अस्पतालों के मुर्दाघरों में इसके लिए जगह नहीं है। इसे देखते हुए कई स्थानों पर अधिकारियों को अस्थायी इंतजाम करना पड़ रहा है। रसुवा और नुवाकोट से बह गए पीड़ितों के शव चितवन, तनहुं, नवलपरासी और निचले इलाकों तक में मिल रहे हैं।
शवों से भरा चितवन जिला
बहकर आए पीड़ितों के शवों से चितवन जिला भर गया है, जिसके कारण अधिकारियों को अस्थायी इंतजाम करने पड़े हैं। साथ ही, पोखरा के अस्पतालों ने भी बताया है कि कई जिलों से शव आने के बाद उनके मुर्दाघर भर गए हैं। अधिकारियों ने भरतपुर में शव रखने के लिए एक अस्थायी केंद्र बनाने का फैसला किया है।

भरतपुर में विद्युत रोड पर स्थित औद्योगिक उद्यम विकास संस्थान की एक खाली इमारत को अस्थायी केंद्र में बदला जाएगा। त्रिशूली और नारायणी नदियों के चितवन वाले हिस्से में फिशलिंग से गोलाघाट तक लगभग 200 शव बरामद किए गए हैं। शवों को निकालने का काम अब भी जारी है। चितवन के अस्पतालों में बने मुर्दाघरों में 30 से 50 शव रखे जा सकते हैं। वहां पहले से ही जगह की कमी है।
चितवन से लगभग 160 किलोमीटर दूर पोखरा में भी ऐसे ही दृश्य देखने को मिल रहे हैं। जहां बाढ़ के बाद शवों को लगातार लाया जा रहा है। कई जिलों में जगह कम पड़ने के कारण शवों को पोखरा लाया गया है। तनाहुन, गोरखा, नवलपरासी पूर्व और धाड़िंग से कुल 93 शव यहां लाए गए हैं।

नदी से शवों को निकालने के लिए
पुलिस टीम को तैनात किया गयानेपाल पुलिस के अधीक्षक रामेश्वर पौडेल ने बताया कि नदी से शवों को निकालने के लिए पुलिस टीम को तैनात किया गया है। हम नदी से शव निकालते हैं और उनकी क्लोज-अप फोटो लेते हैं। अगर शव स्पष्ट नहीं दिखता, तो हम पहले उसे साफ करते हैं, फिर बॉडी बैग में रखकर उस पर टैग लगाते हैं और मुर्दाघर या अस्थायी केंद्र पर लाते हैं।
अगर लापता लोगों के रिश्तेदार पूछताछ के लिए आते हैं, तो हम बरामद शवों की फोटो दिखाते हैं। अगर लोग शव की पहचान कर लेते हैं, तो जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद हम उन्हें शव सौंप देते हैं। वहीं, अज्ञात और बिना दावे वाले शवों के प्रबंधन के लिए जिला पुलिस प्रमुख की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है।

पुलिस शवों की तस्वीरें लेती है, फिंगरप्रिंट लेती है और डीएनए नमूने एकत्र करती है। जिन मामलों में शवों की पहचान नहीं की जा सकती, वहां खास जगह पर टैग के साथ अंत्येष्टि कर दी जाती है।
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