नेपाल त्रासदी में अब तक 788 लोगों की मौत, 2500 से ज्यादा लापता; युद्ध स्तर पर चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल में भीषण बाढ़ के कारण अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है और 2500 से अधिक लोग ...और पढ़ें
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नेपाल बाढ़ में 788 मौतें, 2500 से अधिक लोग लापता (फोटो- पीटीआई)

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डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल पुलिस ने बताया कि रविवार दोपहर 3 बजे तक नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद कुल 781 शव बरामद किए गए हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा 264 मौतें चितवन में हुई हैं, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 194, नवलपरासी वेस्ट 120, गोरखा 58, नुवाकोट 52, धाडिंग 50, तनहुन 37 और रसुवा 13 मौतें हुईं।
इससे पहले, नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने बताया था कि दोपहर 1 बजे तक 2502 लोग लापता थे और कई प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान जारी है। पहचान न हो पाने वाले शवों को देश भर के 21 अस्पतालों में रखा जा रहा है।

149 भारतीय नागरिकों को बचाया गया
भारत के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बताया कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद अब तक कुल 149 भारतीय नागरिकों को बचाया गया है। MEA ने रविवार शाम 5.30 बजे तक बचाए गए सभी 149 भारतीय नागरिकों की लिस्ट एक्स पर पोस्ट की। इस बीच, 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी उड़ान नेपाल पहुंची और राहत सामग्री सौंप दी गई।
MEA सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, 'नेपाल के साथ खड़े हैं। 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी उड़ान नेपाल पहुंची और राहत सामग्री सौंप दी गई। इसमें सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए उपकरणों के साथ एक टनल टेक्निकल टीम; DNA एनालिसिस के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम और कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट जैसी राहत सामग्री शामिल है।'

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि 230 फीट के सिंगल लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के लिए उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। उन्होंने एक्स पर कहा, 'सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए जल्द ही उपकरण भेजे जाएंगे। इन्हें लगाने के लिए टेक्निकल टीमों के जल्द पहुंचने की उम्मीद है। अब तक, काठमांडू में कुल 68.5 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई है, जिसमें जरूरी दवाएं, पोर्टेबल जेनरेटर सेट, खाने के पैकेट, पानी साफ़ करने वाली गोलियां और टेक्निकल उपकरण शामिल हैं।'

इस बीच, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने रविवार को नेपाल में तैनात भारतीय फोरेंसिक टीम के सदस्यों से मुलाकात की। यह टीम भयानक बाढ़ के पीड़ितों के शवों की पहचान में मदद करने के लिए वहां तैनात है। उन्होंने दोहराया कि भारत नेपाल में चल रहे बचाव और राहत कार्यों का मज़बूती से समर्थन करना जारी रखेगा।

MEA ने एक्स पर बताया, 'राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल में तैनात भारतीय फोरेंसिक टीम के सदस्यों से मुलाकात की। यह टीम हाल ही में आई बाढ़ के पीड़ितों के शवों की पहचान में मदद के लिए DNA सैंपल के एनालिसिस में अपनी नेपाली समकक्ष टीम के साथ मिलकर काम करेगी।'

जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे हैं 933 कर्मचारी
NDRRMA ने बताया कि लापता लोगों में से 933 क्षेत्रीय जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारी हैं, 592 विदेशी नागरिक हैं और 127 नेपाली नागरिक हैं जो विदेशी पर्यटकों के साथ यात्रा कर रहे थे।
लापता लोगों की सूची में नेपाल पुलिस, नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल, सीमा शुल्क कार्यालय और आव्रजन कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, 239 घायल लोगों का इलाज चल रहा है; आपदा क्षेत्र में छह सर्जिकल मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं।

20000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए
लगभग 20,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनकी मदद से जमीनी बलों ने कुल 8,730 लोगों को बचाया है। एयर क्रू ने 363 हेलीकॉप्टर उड़ानें भरी हैं, जिनसे 3,081 लोगों (जिनमें 236 विदेशी शामिल हैं) को एयरलिफ्ट किया गया और हाल के दिनों में बाढ़ में फंसी जलविद्युत सुरंग से सीधे 279 लोगों को बचाया गया।
NDRRMA ने आगे बताया कि नेपाल सरकार ने आपातकालीन नकद सहायता जारी की है, जिसमें रसुवा और नुवाकोट को 10-10 मिलियन NPR, धाडिंग को 5 मिलियन NPR और 15 स्थानीय सरकारों को कुल 67.5 मिलियन NPR की राशि शामिल है।

त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में पहुंचाए जा रहे शव
राहत कार्यों के तहत उत्तरगया और धुंचे जैसे अलग-थलग पड़े इलाकों में खाना, कम्युनिकेशन यूनिट और इमरजेंसी का सामान पहुंचाने के लिए 50 ट्रांसपोर्ट गाड़ियां और आठ हेलीकॉप्टर भेजे गए हैं।
लगातार हवाई और जमीनी ऑपरेशन जारी रखने के लिए ईंधन के भंडार का भी सही तरीके से प्रबंधन किया जा रहा है। काठमांडू से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री भेजी जा रही है।
इस बीच, बाढ़ में लापता लोगों के परिवार और रिश्तेदार त्रिभुवन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन की मॉर्चरी (शवगृह) पहुंच रहे हैं, जहां लोगों के शव लाए जा रहे हैं। त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों के परिवारों के लिए भी बेचैनी और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

मेरा बेटा कहां हैं : बहादुर शाही
समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए शेर बहादुर शाही, जिनके बेटे सुरंग में फंसे हैं, ने कहा, 'मेरा बेटा बचाए गए लोगों में शामिल नहीं है। वह त्रिशूली 3A प्रोजेक्ट में मैकेनिकल इंजीनियर है। वे सभी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं। हम उनसे संपर्क नहीं कर पाए हैं। सरकार को बचाव अभियान के लिए जरूरी क्षमता और विशेषज्ञता तुरंत जुटानी चाहिए थी।
हालांकि नेपाली सेना सुरंग स्थल पर पहुंच गई थी, लेकिन उन्हें सही क्षमताओं और तकनीशियनों की जरूरत थी। चाहे भारत हो या अमेरिका, सभी भाई और पड़ोसी हैं; हम बचाव अभियान के लिए भारत सरकार के भी आभारी हैं।'

इससे पहले शनिवार को विदेश मंत्रालय ने बताया कि रसुवा में एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में फंसे चार भारतीय नागरिकों को आज बचा लिया गया। मंत्रालय द्वारा पहचाने गए बचाए गए लोगों में रिपु कुमार, चनेश्वर नार्जारी, कृपा शंकर और मोहम्मद मिन्हाजुद्दीन शामिल हैं।
