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सीजन ऑफ एंगर? विरोध और हिंसा की आग में जल रही दुनिया, फ्रांस के बाद इटली-पुर्तगाल में प्रदर्शन शुरू

Published: Sun, 18 Oct 2026 01:10 PM (IST)Updated: Sun, 18 Oct 2026 01:19 PM (IST)

दुनियाभर के कई देशों में बढ़ती महंगाई, आवास संकट और शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया के कई देशों में बड़े पैमाने पर हिंसक और व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं, जिनकी आग तेजी से फैलती जा रही है। फ्रांस से लेकर अर्जेंटीना और अल्बानिया तक सड़कों पर उतरे लोगों का असंतोष काफी हद तक एक जैसा है।

बढ़ती महंगाई, घर खरीदने व किराए की बढ़ती लागत, शिक्षा और सामाजिक सेवाओं के बजट में कटौती, घटती क्रय शक्ति और सरकारों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी लहर इन जन-आंदोलनों की मुख्य वजहें बनी हुई हैं।

protest in france_

फ्रांस: शिक्षा बजट कटौती और बेलगाम महंगाई पर फूटा गुस्सा

फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले जनता का असंतोष चरम पर पहुंच गया है, जहां कानूनी प्रावधानों के चलते राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों दोबारा चुनाव लड़ने के पात्र नहीं हैं।

इस संकट की शुरुआत पेरिस में शिक्षकों और छात्रों द्वारा शिक्षा बजट में कटौती व स्कूलों की खराब हालत के खिलाफ एक छोटे स्थानीय आंदोलन से हुई थी, जो धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया।

अब यह आंदोलन ईंधन की बढ़ती कीमतों और जीवन-यापन के खर्च के खिलाफ एक विशाल जनविद्रोह बन चुका है। फ्रांसीसी आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार, देश भर में करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जिनमें अकेले राजधानी पेरिस में 1.10 लाख लोग शामिल थे।protest in Belgium

बेल्जियम और पुर्तगाल: एजुकेशन फीस और महंगे मकानों का संकट

यूरोप के अन्य देशों में भी जनता सड़कों पर उतर आई है। बेल्जियम में सार्वजनिक खर्च में कटौती और विश्वविद्यालय पंजीकरण फीस बढ़ाने के विरोध में छात्रों ने मोर्चा खोल दिया, जो बाद में बढ़ती महंगाई के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलन में बदल गया।

ब्रुसेल्स और लीज में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जहां भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन चलानी पड़ीं। बेल्जियम के गृह मंत्री ने इसे समाज को अस्थिर करने वाली संगठित हिंसा करार दिया।

वहीं पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने कम वेतन और आवास के असहनीय संकट के खिलाफ मार्च निकाला। लिस्बन सहित कई शहरों में 2017 के बाद से संपत्तियों की कीमतें और मकानों का किराया दोगुने से अधिक हो चुका है। इससे युवाओं और कम आय वाले परिवारों के सामने छत का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

protest in italy

इटली और अल्बानिया: आर्थिक तंगी और घटते रोजगार पर उबाल

इटली के मिलान शहर में भी स्थिर वेतन, महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़पें हुईं। उधर अल्बानिया में विश्वविद्यालयों की बदहाली, महंगी पढ़ाई, वित्तीय मदद की कमी और डिग्री के बाद रोजगार न मिलने से नाराज छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा।

protest in albenia

13 अक्टूबर को राजधानी तिराना में शिक्षा मंत्रालय के बाहर हुए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जहां छात्रों ने इमारत पर ईंट-पत्थर फेंके और पुलिस ने लाठीचार्ज किया। यह आंदोलन अब देश में बढ़ती असमानता और बेरोजगारी के खिलाफ व्यापक जन-आक्रोश का रूप ले चुका है।

Protest in USA_

अमेरिका, अर्जेंटीना और तुर्किये: राजनीतिक और आर्थिक संकट गहराया

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नीतियों के विरोधी नो किंग्स नेटवर्क ने मध्यावधि चुनावों में मतदाताओं को समय से पहले वोट डालने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से देश भर के शहरों में रैलियां आयोजित कीं।

अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में राष्ट्रपति जेवियर माइली द्वारा विश्वविद्यालयों के बजट में की गई भारी कटौती के खिलाफ छात्रों, कर्मचारियों और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने संसद के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन किया। माइली के सत्ता संभालने के बाद से शिक्षा बजट संकट पर यह पांचवां बड़ा विरोध प्रदर्शन था।

तुर्किये की राजधानी अंकारा में महंगाई और नाकाफी पेंशन के खिलाफ बुजुर्गों और मजदूर संगठनों ने संवैधानिक न्यायालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान 60 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी अली सेकेरोग्लू ने अपनी आर्थिक तंगी और दो बेरोजगार बेटों की व्यथा बताते हुए विरोध स्वरूप अपनी सर्विस पिस्तौल से खुद को गोली मार ली।

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