विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

फ्रांस से पुर्तगाल तक सड़कों पर क्यों उतरे लोग, यूरोप में कैसे भड़का जनआक्रोश? Inside Story

Published: Sat, 31 Oct 2026 07:53 PM (IST)

यूरोप में बढ़ती महंगाई, आवास और जीवन-यापन के खर्चों ने व्यापक जनआक्रोश को जन्म दिया है। पुर्तगाल, स्पेन और इटली जैसे देशों में भी लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हैलोवीन के मौके पर फ्रांस में त्योहार के उल्लास की जगह भारी तनाव देखने को मिल रहा है। नए सिरे से होने वाले विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की आशंका को देखते हुए देश भर में 70000 पुलिस और जेंडरमेरी जवानों को तैनात किया गया है।

दुकानों को बंद कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि महीने की शुरुआत में भड़की हिंसा दोबारा न हो सके। इस जनआक्रोश के पीछे लगातार बढ़ती महंगाई, चरमराती सार्वजनिक सेवाएं और आम लोगों के लिए बुनियादी खर्च जुटाने की भारी जद्दोजहद मुख्य वजह है।

सिर्फ नौकरी नहीं, बुनियादी खर्च भी भारी

1 (16)

यह आक्रोश केवल फ्रांस तक सीमित नहीं है। उच्च जीवन स्तर और मजबूत सामाजिक सुरक्षा के लिए पहचाने जाने वाले यूरोप के नागरिकों की आय अब उनके जरूरी खर्चों के सामने कम पड़ने लगी है।

ड्यूश बैंक रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में शहर के केंद्र में तीन कमरों के फ्लैट का किराया चुकाने के बाद दो कामकाजी लोगों के पास सिर्फ €253 बचते हैं।

मिलान में यह रकम केवल €697 रह जाती है। इसके विपरीत, उत्तरी यूरोप के ज्यूरिख और जिनेवा में किराए के बाद भी जोड़ों के पास €8,000 से अधिक बच जाते हैं। लिस्बन में औसत शुद्ध आय €1,408 है, जबकि किराया €2,561 तक पहुंच चुका है।

आमदनी का बड़ा हिस्सा घरों में बंद

यूरोस्टैट की रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से 2024 के बीच यूरोपीय संघ में घरों की कीमतें 53% और किराया 25% बढ़ा, जो कि आम मुद्रास्फीति (39%) से कहीं तेज था।

ग्रीस में परिवार अपनी खर्च योग्य आय का औसतन 36% हिस्सा केवल आवास पर खर्च कर रहे हैं, जबकि 43% आबादी पर किराए, मॉर्टगेज या बिजली बिल का बकाया है।

युवाओं की स्थिति और भी गंभीर है, जहां 15 से 29 वर्ष के लगभग 27% युवा अत्यधिक भीड़भाड़ वाले और छोटे मकानों में रहने को मजबूर हैं।

2 (15)

सस्ती किराने का मतलब आसान जिंदगी नहीं

आवास के अलावा भोजन का खर्च भी घरेलू बजट को बिगाड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय संघ में भोजन का औसत खर्च कुल बजट का 13.1% है, लेकिन रोमानिया में यह 23% और पुर्तगाल में 18% तक पहुंच जाता है।

जहां जरूरी सामान की कीमतें कम भी हैं, वहां लोगों की आमदनी इतनी कम है कि बजट का बड़ा हिस्सा राशन खरीदने में ही चला जाता है। इसके साथ ही ऊर्जा और अन्य बुनियादी जरूरतों की लगातार बढ़ती लागत ने लोगों की बचत को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

3 (8)

अलग-अलग देशों में विरोध की अपनी वजहें

यूरोप भर में हो रहे इन प्रदर्शनों के पीछे कई तात्कालिक कारण हैं। फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत और शिक्षकों की कमी से शुरू हुआ आंदोलन अब कम वेतन और महंगाई के खिलाफ देशव्यापी गुस्से में बदल चुका है। स्पेन और पुर्तगाल में पर्यटन के कारण आवास की आसमान छूती कीमतों पर लोग सड़कों पर हैं।

इटली में रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी के विरोध में आवाज उठाई जा रही है। वहीं बेल्जियम और जर्मनी में शिक्षा, आवास और अनिवार्य सैन्य सेवा को फिर से शुरू करने के विरोध में छात्र और युवा आंदोलन कर रहे हैं।

धीमी विकास दर पर बढ़ता कर्ज

जेएनयू के एक प्रोफेसर के अनुसार, यह संकट आर्थिक सुस्ती, महंगाई, आवास की कमी और बदलती राजनीति का मिलाजुला परिणाम है। पर्यटन के प्रसार ने स्थानीय निवासियों को अपने ही शहरों से बाहर धकेल दिया है।

वहीं, जेएनयू के प्रोफेसर राजन कुमार के अनुसार, यूक्रेन युद्ध और रूसी ऊर्जा आपूर्ति बंद होने से उत्पादन और परिवहन लागत में भारी उछाल आया है। इसके अलावा, फ्रांस का कर्ज सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 119% तक पहुंच गया है, जिससे सरकारों के लिए रक्षा खर्च बढ़ाने के साथ-साथ जनकल्याण योजनाओं को बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।

प्रदर्शन को लेकर फ्रांस की चेतावनी

फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने चेतावनी दी है कि लगातार तीन तिमाहियों से विकास दर रुक जाने के कारण देश की अर्थव्यवस्था संकट के कगार पर है और बजट में त्वरित सुधार के बिना हालात और बिगड़ सकते हैं।

जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में स्पेन, फ्रांस, ग्रीस और इटली में होने वाले चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दल भी इस जनआक्रोश का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। केवल सरकारें बदलने या महंगाई की रफ्तार थोड़ी धीमी होने से यह संकट आसानी से खत्म होता नहीं दिख रहा है।

यह भी पढ़ें- फ्रांस में फिर भड़क सकती है हिंसा, मैक्रों सरकार ने दी उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी

यह भी पढ़ें- फ्रांस-इटली और स्पेन समेत यूरोप के कई देशों में हिंसक प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लाखों लोग

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।