काबुल,एएनआइ। Blast in Afghanistan, अफगानिस्तान के परवान शहर में भीषण आत्मघाती विस्फोट के बाद एक और ब्लास्ट की खबर है। जानकारी अनुसार दूसरा धमाका काबुल के मैक्रोरीन 2 क्षेत्र में हुआ। इस दौरान मसूद स्क्वायर और अमेरिकी दूतावास के करीब ब्लास्ट हुआ। इससे पहले पहला धमाका राष्ट्रपति अशरफ गनी की चुनावी रैली को निशाना बनाकर किया गया। इस धमाके में 26 लोगों की मौत हो गई और 42 से अधिक घायल हो गए। इनमें महिलाएं और बच्चे की संख्या ज्यादा है। टोलो न्यूज ने इसकी जानकारी दी है। गनी के एक करीबी ने बताया कि राष्ट्रपति जब धमाका हुआ तो वहीं मौजूद थे, लेकिन एकदम सही सलामत हैं।

तालिबान विद्रोही समूह ने ली आत्मघाती हमलों की जिम्मेदारी

तालिबान विद्रोही समूह ने दो विस्फोटों के लिए जिम्मेदारी का दावा किया। इसके साथ ही कहा गया कि मंगलवार को हुए अफगानिस्तान में हमले के दौरान दर्जनों लोग मारे गए। आत्मघाती हमलों ने अफगान सुरक्षा बलों को लक्षित किया था, यह समूह के प्रवक्ता ने कहा। पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, राजधानी काबुल और मध्य प्रांत के परवन में विस्फोटों में कम से कम 26 लोगों की मौत हो गई और 45 अन्य घायल हो गए। बता दें कि इससे पहले गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता नसरत रहीमी ने कहा था कि परवन विस्फोट एक आत्मघाती हमला था और हमलावर एक मोटरसाइकिल पर सवार था। 

गनी की चुनावी रैली को इसलिए बनाया गया निशाना

जानकारी अनुसार मरने वालों और घायलों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। दहशतगर्दों ने गनी की चुनावी रैली को निशाना बनाया ताकि ज्यादा से लोग घायल हो सके। इसका एक कारण 28 सितंबर को होने वाला चुनाव है। ध्यान रहे की आतंकी संगठन तालिबान नहीं चाहता कि देश में चुनाव हो। ऐसे में उसने गनी की रैली को निशाना बनाया है ताकि चुनाव सफल न हो। इससे पहले दो बार चुनाव टल चुका है। 

तालिबान ने कहा था और अमेरिकी मरेंगे

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अमेरिकी सैनिक के मौत के बाद अमेरिका-तालिबान शांति वार्ता को रद कर दिया था। इसके बाद तालिबान ने अमेरिका को धमकी दी थी कि वार्ता रद करने से और अमेरिकयों की जान जाएगी। इसके बाद से देश में लगातार धमाके हो रहे हैं और अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया जा रहा है। इससे पहले 9/11 की 18वीं बरसी पर अफगानिस्तान में अमेरिकी दूतावास पर रॉकेट से हमला किया गया था। 

वार्ता रद होने पर क्या कहा था तालिबान ने

वार्ता को रद करने के लिए ट्रंप की आलोचना करते हुए इस्लामिक समूह ने बयान जारी किया था, इस दौरान कहा गया 'इससे अमेरिका को और नुकसान होगा। इसकी विश्वसनीयता प्रभावित होगी, इसका शांति विरोधी रुख दुनिया के सामने होगा, जान-माल का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप का ये फैसला उनके अपरिपक्वता और कम अनुभव को दर्शाता है। वहीं अफगानिस्तान ने ट्रंप के इस फैसले के स्वागत किया था। राष्ट्रपति गनी ने तालिबान से हिंसा बंद करने और सरकार से सीधी वार्ता की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि तालिबान के हिंसा बंद करने पर ही अफगानिस्तान में शांति आ सकती है।

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Posted By: Tanisk

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