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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 25, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Afghanistan: तालिबान की दो टूक, कहा- इस्लाम के खिलाफ जाकर नहीं लेंगे अंतरराष्ट्रीय मदद

By Mohd FaisalEdited By:
Published: Mon, 25 Jul 2022 09:01 AM (IST)

Afghanistan अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही तालिबान अपने फैसलों को लेकर चर्चा में बना हुआ ...और पढ़ें

Afghanistan: तालिबान की अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दो टूक (फोटो: एएनआइ)
Afghanistan: तालिबान की अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दो टूक (फोटो: एएनआइ)

काबुल, एजेंसी। तालिबान के आचरण और नैतिकता मंत्री खालिद हनाफी ने रविवार को कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ जुड़ाव के लिए तैयार है। लेकिन अगर वे इस्लाम के खिलाफ हैं, तो उनका एहसान स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने कानून में सिर्फ अल्लाह, पैगंबर मोहम्मद, रशीदुन के खलीफा और साथियों का अनुसरण करते हैं। हम किसी से कुछ भी स्वीकार नहीं करते हैं, जो इस्लाम के खिलाफ हैं।

'अफगानिस्तान में महिलाएं हिजाब का 100 प्रतिशत कर रही इस्तेमाल'

टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हनफी ने गजनी का दौरा करते हुए तालिबान पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की निंदा की। मंत्री ने सरकारी कर्मचारियों से शरिया के आधार पर अपनी उपस्थिति को समायोजित करने का भी आह्वान किया। हनफी ने कहा कि सभी कर्मचारी जो प्रांतों, जिलों और मंत्रालयों में हैं, उन्हें इस्लामी मूल्यों के अनुसार अपनी उपस्थिति दर्ज करनी चाहिए। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद, महिलाएं हिजाब का 100 प्रतिशत पालन कर रही हैं।

रिपोर्ट में तालिबान के मानवाधिकारों के उल्लंघन का हुआ खुलासा

इसके अलावा, जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मिशन ने कहा कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की नवीनतम रिपोर्ट तालिबान द्वारा मानव अधिकारों के उल्लंघन के एक परेशान करने वाले स्वरूप का खुलासा करती है। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन ने तालिबान के अधिग्रहण के बाद से 10 महीनों में अफगानिस्तान में व्याप्त मानवाधिकार की स्थिति को रेखांकित करते हुए एक रिपोर्ट जारी की है। मिशन ने कहा कि रिपोर्ट में तालिबान के मानवाधिकारों के उल्लंघन के पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है, लेकिन यह इस रिपोर्ट में परिलक्षित उल्लंघनों और दुर्व्यवहारों की संख्या और पिछले साल अगस्त से मानवाधिकार की स्थिति के बिगड़ने की पूरी गुंजाइश को पूरी तरह से नहीं दर्शाती है।

संयुक्त राष्ट्र मिशन की रिपोर्ट ने जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र मिशन ने कहा कि यह रिपोर्ट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कार्यप्रणाली और या उन जगहों तक पहुंच की कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जहां अफगानिस्तान में यातना और दुर्व्यवहार, गैरकानूनी हत्याएं, मनमानी गिरफ्तारी और नजरबंदी और जबरन विस्थापन हो रहा है। रिपोर्ट निस्संदेह तालिबान द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के एक परेशान और सुसंगत पैटर्न का खुलासा करती है, जो मानवाधिकारों के लिए उच्चायुक्त, अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर विशेष प्रतिवेदक, और अंतरराष्ट्रीय और गैर-सरकारी संगठनों के पिछले निष्कर्षों के अनुरूप है।

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