फ्लाईदुबई विमान हमले में इजरायल की बड़ी सुरक्षा चूक, UAE के दावे से गरमाया मामला
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में एक ओमानी को-पायलट ने भारतीय कैप्टन पर हमला कर विमान क्रैश करने की कोशिश की।

फ्लाईदुबई विमान हमले में इजरायल की बड़ी सुरक्षा चूक(प्रतीकात्मक तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, तेल अवीव। दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में आसमान के बीचो-बीच हुई खूनी झड़प और प्लेन क्रैश करने की साजिश ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस सनसनीखेज मामले के बाद अब इजरायल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इजरायल के चैनल 12 न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, गैर-कूटनीतिक देशों के पायलटों पर सख्त प्रतिबंध होने के बावजूद बीते कुछ वर्षों में ओमान के दर्जनों पायलटों ने तेल अवीव के लिए धड़ाधड़ उड़ानें भरी हैं।
इजरायल की सुरक्षा में यह बड़ी चूक तब उजागर हुई, जब हाल ही में फ्लाइट के एक कट्टरपंथी ओमानी को-पायलट ने कॉकपिट में ही विमान के मुख्य कैप्टन पर जानलेवा हमला कर दिया।
क्या है मामला?
आरोपी ओमानी को-पायलट का इरादा विमान को क्रैश कर उसमें सवार करीब 174 यात्रियों की जान जोखिम में डालना था। उड़ान के दौरान आरोपी ने क्रैश एक्स से भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था, जिसके बाद विमान तेजी से 17,000 फीट नीचे की ओर गोता खाने लगा।
हालांकि, घायल कैप्टन की बहादुरी और विमान में सवार ऑफ-ड्यूटी क्रू मेंबर्स और यात्रियों की सूझबूझ से आरोपी को काबू कर लिया गया और एक बड़ा हवाई हादसा टल गया। इस घटना ने अब खाड़ी देशों और इजरायल के बीच उड्डयन सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा खुफिया जांच की खामियों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
सुरक्षा एजेंसी शिन बेट की लापरवाही पर उठे सवाल
ओमान ने 2020 के अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और उसके इजरायल के साथ कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। नियमों के मुताबिक, जिन देशों के इजरायल से राजनयिक संबंध नहीं हैं, वहां के पायलट इजरायल के लिए उड़ान नहीं भर सकते।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने में नाकाम रही। इजरायल ने इस नियम की निगरानी विदेशी एयरलाइनों के भरोसे छोड़ दी थी और कभी फ्लाईदुबई के पायलटों की नागरिकता या पृष्ठभूमि की गहन जांच नहीं की।
अब यह सवाल उठ रहे हैं कि इन पायलटों को वर्षों तक इजरायल आने की मंजूरी कैसे मिलती रही। इजरायली परिवहन मंत्रालय का कहना है कि शिन बेट ने कभी फ्लाईदुबई को लेकर ऐसी कोई चेतावनी जारी नहीं की थी, सिवाय इसके कि सामान की जांच बढ़ाई जाए।
तीन देशों में चल रही संयुक्त जांच
इस पूरी घटना की जांच इजरायल, यूएई और सऊदी अरब की एजेंसियां कर रही हैं। सऊदी अरब में इलाज के बाद दोनों पायलटों को अबू धाबी भेज दिया गया है।
सऊदी अधिकारियों की शुरुआती पूछताछ के आधार पर संकेत मिले हैं कि को-पायलट ने कथित तौर पर कट्टरपंथी कारणों से यह हमला किया था।
वर्तमान में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद और शिन बेट इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या आरोपी को-पायलट ने यह कदम अकेले उठाया था या इसके पीछे किसी आतंकी संगठन का हाथ है।
इजरायल और यूएई के बीच मतभेद
जांच पूरी होने से पहले ही इजरायल द्वारा इसे कट्टरवादी हमला करार दिए जाने से यूएई नाराज है। अबू धाबी का कहना है कि वह इस मामले की आगे की जांच खुद करेगा।
हालांकि यूएई ने हमले के पीछे किसी वैचारिक मंशा से पूरी तरह इनकार नहीं किया है, लेकिन उसका मानना है कि किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचने से पहले पूरी जांच जरूरी है।
वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना को इजरायल विरोधी दुष्प्रचार और इस्लामी कट्टरपंथ का नतीजा बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस महीने होने वाले आम चुनावों से पहले नेतन्याहू इस घटना के जरिए अपनी मजबूत सुरक्षा छवि को पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
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