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'हमले को लेकर शेयर की गुमराह करने वाली पोस्ट', ईरान से जंग के बीच 19 भारतीयों के खिलाफ UAE का एक्शन

Published: Mon, 16 Mar 2026 08:00 AM (IST)

संयुक्त अरब अमीरात ने मध्य-पूर्व में तनाव के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में 35 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 19 भारतीय शामिल हैं।

हमले की गलत जानकारी को लेकर यूएई ने 35 लोगों के खिलाफ की कार्रवाई।

हमले की गलत जानकारी को लेकर यूएई ने 35 लोगों के खिलाफ की कार्रवाई।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 35 लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है, जिनमें 19 भारतीय भी शामिल हैं। इन लोगों ने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो पोस्ट किए थे जिनमें गुमराह करने वाली या मनगढ़ंत बातें थीं।

ये वीडियो पिछले महीने के आखिर में शुरू हुए मिडिल-ईस्ट में तनाव के दौरान पोस्ट किए गए थे। यह तनाव तब शुरू हुआ था जब अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान पर हवाई हमले किए थे।

तेजी से चलाया जाएगा मुकदमा

यूएई के अधिकारियों ने बताया कि इन संदिग्धों पर तेजी से मुकदमा चलाया जाएगा। जांच में पता चला है कि इन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके ऐसे वीडियो और कहानियां फैलाईं, जिनमें छेड़छाड़ की गई थी और जो मौजूदा क्षेत्रीय तनाव से जुड़ी थीं।

दो हिस्सों में हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई दो हिस्सों में हुई। ताजा सूची में अलग-अलग राष्ट्रीयताओं के 25 लोग शामिल हैं, जिनमें 17 भारतीय भी हैं। इन लोगों को अलग-अलग धाराओं के तहत सूचीबद्ध किया गया है। इसके अलावा 10 लोग अलग थे, जिनमें दो भारतीय भी शामिल थे। इनके नाम शनिवार को सामने आए और गिरफ्तारी के आदेश दिए गए थे।

एक बयान में यूएई के अटॉर्नी-जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्स ने कहा कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म की कड़ी निगरानी के बाद उठाया गया है, ताकि मनगढ़ंत जानकारी और बनावटी सामग्री के प्रसार को रोका जा सके।

तीन ग्रुप में बंटे थे आरोपी

बयान में कहा गया, "जांच और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से पता चला कि आरोपी तीन समूहों में बंटे हुए थे, जिन्होंने अलग-अलग तरह के काम किए। इनमें मौजूदा घटनाओं से जुड़े असली क्लिप प्रकाशित करना, एआई का इस्तेमाल करके नकली क्लिप बनाना और एक ऐसे देश को बढ़ावा देना शामिल था जो सैन्य आक्रामकता वाले काम करता है और साथ ही उसके नेतृत्व और सैन्य कार्रवाइयों की तारीफ करता है।"

10 आरोपियों के पहले ग्रुप में पांच भारतीय, एक पाकिस्तानी, एक नेपाली, दो फिलिपीनी और एक मिस्र का नागरिक शामिल था। इन्होंने ऐसे असली वीडियो क्लिप प्रकाशित और प्रसारित किए, जिनमें देश के हवाई क्षेत्र से मिसाइलों के गुजरने और उन्हें रोके जाने या उनके टकराने से होने वाले असर को दिखाया गया था।

आरोप है कि इन लोगों ने घटनाओं पर नजर रखने वाले लोगों के जमावड़ों का वीडियो बनाया और उसमें ऐसी कमेंट्री और साउंड इफेक्ट जोड़े जिनसे यह लगे कि कोई हमला हो रहा है, ताकि लोगों में चिंता और घबराहट फैलाई जा सके।

दूसरे समूह में सात लोग शामिल थे, जिनमें पांच भारतीय और नेपाल तथा बांग्लादेश से एक-एक व्यक्ति शामिल था। इन्होंने एआई का इस्तेमाल करके बनाया गया मनगढ़ंत विज़ुअल कंटेंट पब्लिश किया या देश के बाहर हुई घटनाओं के फुटेज को दोबारा सर्कुलेट किया और झूठा दावा किया कि ये घटनाएं यूएई के अंदर हुई थीं।

बयान में कहा गया है कि छह लोगों के तीसरे समूह में पांच भारतीय और एक पाकिस्तानी शामिल थे। इन लोगों ने प्रकाशित सामग्री पर "एक शत्रु देश (ईरान) और उसके राजनीतिक तथा सैन्य नेतृत्व का महिमामंडन करने और उसकी क्षेत्रीय सैन्य आक्रामकता को उपलब्धियों के रूप में पेश करने" का आरोप लगाया। इसके अलावा दो अन्य व्यक्तियों पर भी (जो दोनों भारतीय हैं) इसी तरह के अपराधों के आरोप हैं।

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