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'स्मित कुछ करो, तुम इस तरह नहीं मर सकते'; कैप्टन मच्छर ने बताई फ्लाईदुबई फ्लाइट की Iniside Story

Published: Sun, 18 Oct 2026 08:11 PM (IST)Updated: Sun, 18 Oct 2026 08:14 PM (IST)

कैप्टन स्मित मच्छर ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में हुए आतंकी हमले की खौफनाक कहानी ...और पढ़ें

उड़ान के दौरान को-पायलट ने कैप्टन पर हमला किया

उड़ान के दौरान को-पायलट ने कैप्टन पर हमला किया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में हुए आतंकी हमले को लेकर कैप्टन स्मित मच्छर ने हमले की पूरी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि उड़ान के करीब दो घंटे बाद कॉकपिट में वो खौफनाक घटना घटी, जिसे वो जिंदगी म नहीं भूक पाएंगे।

कैप्टन मच्छर उस समय सिस्टम पर लैंडिंग का समय और ईंधन की मात्रा चेक कर रहे थे, तभी उनके सिर के पिछले हिस्से पर जोरदार हमला हुआ।

पहले उन्होंने सोचा कि बोइंग 737 के कॉकपिट की छत का कोई हिस्सा टूटकर गिरा है, लेकिन सेकंडों में और वार होने पर जब उन्होंने मुड़कर देखा तो पता चला कि हमला उनके ही को-पायलट ने किया था।

खून बहने से उनकी नजर धुंधली पड़ गई और वे बेहोशी की हालत में चले गए। हमला जारी रहने के दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर उतरने लगा।

शनिवार शाम 'स्काई न्यूज अरबिया' को दिए अपने पहले इंटरव्यू में मच्छर ने बताया कि यह एक सामान्य उड़ान थी। उनके साथ जो को-पायलट था, उसके साथ वे पहली बार उड़ान भर रहे थे। वह को-पायलट नमाज पढ़ने के लिए खड़ा हुआ और कुछ ही मिनटों में उसने हिंसक हमला कर दिया।

कुछ करो, तुम इस तरह नहीं मर सकते: मच्छर

कैप्टन स्मित मच्छर ने फ्लाइट FZ1073 पर हुए आतंकी हमले को याद करते हुए बताया, 'एक पल ऐसा आया जब मैंने खुद से कहा स्मित, कुछ करो, तुम इस तरह नहीं मर सकते।'

इस घटना के बाद विमान का रास्ता बदल दिया गया और उसे सऊदी अरब के तबुक में उतारा गया। कैप्टन मच्छर ने बताया कि उस घटना के बाद क्या हुआ, इसकी उन्हें बस कुछ धुंधली यादें ही हैं; वे अभी भी डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों की मदद से उन यादों को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

यह एक ऐसा रूट था जिस पर वे कई बार उड़ान भर चुके थे। विमान में अतिरिक्त क्रू मौजूद था, और लैंडिंग के बाद 'रिलीफ कैप्टन' को विमान उड़ाने की जिम्मेदारी संभालनी थी। मच्छर ने बताया, 'यह एक सामान्य उड़ान थी। सब कुछ एक आम दिन की तरह चल रहा था, जब तक कि अचानक सब कुछ बदल नहीं गया।'

उड़ान के दो घंटे बाद कॉकपिट में क्या हुआ?

कैप्टन मच्छर ने बताया, उड़ान के करीब दो घंटे बाद, रिलीफ कैप्टन रोस्टर और उड़ान के घंटों के बारे में बात करने के लिए कॉकपिट में आए थे। उसी समय को-पायलट, जो टॉयलेट जाने के लिए बाहर गया था, वापस लौट आया। बातचीत के दौरान, उसने नमाज पढ़ने की इच्छा जताई और रिलीफ कैप्टन से बाहर जाने के लिए कहा।

मच्छर ने बताया कि जब उड़ान स्थिर होती है, तो इस एरिया में ऐसी गुजारिशें मान ली जाती हैं। को-पायलट ने दूसरे कैप्टन को बाहर जाने के लिए कहा, फिर उनके पीछे खड़ा हो गया और नमाज पढ़ने लगा।

'सम्मान के नाते, मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैं कंप्यूटर पर लैंडिंग का समय और फ्यूल चेक कर रहा था, ये मॉनिटरिंग पायलट के रोजमर्रा के काम होते हैं। फिर अचानक, मेरे सिर के पिछले हिस्से पर बहुत जोर से वार हुआ। यह कोई बहुत मजबूत और सख्त चीज थी। उस वक्त मुझे समझ नहीं आया कि मुझे किस चीज से मारा है।'

सबसे पहले मेरे दिमाग में आया कि शायद विमान की छत का कोई हिस्सा टूट गया है और कोई बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। मैं खुद को संभालकर अपने सिस्टम्स को चेक करने की सोच ही रहा था कि तभी और वार होने लगे।

हमले के बाद क्या हुआ?

उन्होंने बताया कि कुछ ही सेकंड में उनकी नजर सिमटकर बस कुछ इंच तक रह गई। जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें बात समझ आ गई। वह मुझे मारते हुए कुछ कह रहा था, लेकिन मुझे समझ नहीं आया कि वह क्या बोल रहा है। मच्छर ने अपनी सीट बेल्ट खोली और खुद को बचाने की कोशिश की, जिसमें एक वार उनके हाथ पर लगा।

तभी कुछ ऐसा हुआ कि हालात पूरी तरह बदल गए। उन्होंने रिलीफ कैप्टन को जोर से आवाज लगाई, और क्योंकि वो दरवाजे के स्विच पास ही था, इसलिए वे उसे खोलने में कामयाब रहे। इसके तुरंत बाद वे बेहोश हो गए।

उन्हें याद है कि दरवाजा फिर से बंद होने से पहले, को-पायलट और बाकी क्रू के बीच चिल्लाने की आवाजे आ रही थीं; को-पायलट उन्हें भी मारने की धमकी दे रहा था। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें इंजनों की आवाज धीमी होती सुनाई दी और महसूस हुआ कि विमान नीचे की तरफ गोता लगा रहा है।

'मुझे इंस्ट्रूमेंट्स देखने की जरूरत नहीं है; आंखें बंद करके भी मैं समझ सकता हूं कि इंजन धीमे हो रहे हैं और विमान नीचे जा रहा है। कोई भी पायलट आपको यही बताएगा।' उन्होंने बताया कि खून बहने की वजह से वे बार-बार बेहोश हो रहे थे और फिर एक ऐसा मोड़ आया जब उन्हें कोई फैसला लेना था।

'मैंने खुद से कहा, ‘स्मित, कुछ तो करो! तुम इस तरह नहीं मर सकते।’ ऐसा नहीं है कि मैंने अपनी मौत को स्वीकार कर लिया था। बस मन में यही था कि कुछ करना होगा, वरना।।।'

कैप्टन मच्छर ने किसे दिया विमान सुरक्षित उतारने का श्रेय?

पायलट ने बताया कि इसके बाद क्या हुआ, इसकी उन्हें बस कुछ धुंधली यादें ही हैं। वे अभी भी डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों की मदद से उन यादों को पूरी तरह समझने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्हें बस इतना याद है कि उन्होंने अपने पैरों को किसी चीज से टिकाया और दरवाजे की तरफ जोर लगाया। उन्होंने बताया कि उन्हें याद है कि वे कॉकपिट और गैली के बीच मुंह के बल लेटे हुए थे, दरवाजा खुला था और यात्री घबराए हुए थे।

मच्छर ने विमान का कंट्रोल संभालने और उसे सुरक्षित उतारने का श्रेय अपने साथी को दिया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी बात है जो मरते दम तक उनके साथ रहेगी।

जब उनसे पूछा गया कि विमान को कैसे बचाया गया, तो उन्होंने किसी एक व्यक्ति का नाम लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'क्रू और यात्रियों समेत सभी ने अपनी क्षमता के अनुसार बेहतरीन काम किया।'

उन्होंने बताया कि उन्हें तब जाकर यकीन हुआ कि वे खतरे से बाहर हैं, जब विमान जमीन पर उतरा। तब तक, विमान में मौजूद एक डॉक्टर और उनके क्रू ने उन्हें होश में रखा।

उन्होंने कहा, 'उस समय मेरा पूरा ध्यान बस यही था कि मुझे हार नहीं माननी है। लोग कहते हैं कि मौत के समय कुछ झलकियां (फ्लैशबैक) दिखाई देती हैं। ऐसे में आपको बस वही इंसान याद आता है जो आपके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है।'

उन्होंने सबसे पहली कॉल अपने दो साल के बेटे को की। घटना के बाद के दिनों में, उन्हें बार-बार उस पहले झटके की यादें (फ्लैशबैक) आती रहीं। मच्छर ने बताया कि उनकी हालत हर दिन बेहतर होती जा रही है और अब वे बैठ सकते हैं और बातचीत भी कर सकते हैं।

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