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1 अरब डॉलर में शांति का सौदा: क्या सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों में ईरान ने कराई प्राइवेट डील?

Published: Tue, 27 Oct 2026 08:22 PM (IST)

सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों को 1 अरब डॉलर का वित्तीय पैकेज देने की पेशकश की है, जिसका ...और पढ़ें

सऊदी ने हूतियों को 1 अरब डॉलर का शांति पैकेज दिया

सऊदी ने हूतियों को 1 अरब डॉलर का शांति पैकेज दिया

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डिजिटल डेस्क, येरुशलम। इजरायली अखबार 'इजरायल हायोम' की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों को 1 अरब डॉलर (95,02,68,50,000 रुपये) का वित्तीय पैकेज देने की पेशकश की है।

यह पेशकश ईरान की मध्यस्थता से हुए एक समझौते के तहत की गई है, जिसका मकसद युद्धविराम लागू करना और सऊदी अरब पर हो रहे हमलों को रोकना है।

शांति के लिए 1 अरब डॉलर की पेशकश

'इजरायल हायोम' के अनुसार, खाड़ी देशों के राजनयिक सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे पर हूती विद्रोहियों के हमलों को पूरी तरह से रोकना है।

खबरों के मुताबिक, इस समझौते पर चर्चा तब हुई जब सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने तेहरान का अचानक दौरा किया।

इस दौरान ईरान ने एक क्षेत्रीय राजनयिक मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी मंत्री 1 अरब डॉलर की नकद राशि एक 'हरक्यूलिस' सैन्य परिवहन विमान में रखकर तेहरान पहुंचे थे।

मक्का समझौते में क्या हुआ था?

सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और मक्का संयुक्त रक्षा गठबंधन के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का तेहरान दौरा, इस गठबंधन के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनका मकसद मौजूदा संकट से जुड़े पक्षों के बीच तनाव कम करना, बातचीत और राजनयिक समाधान को बढ़ावा देना और कतर और पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता के प्रयासों का समर्थन करना है।'

यह बैठक मक्का रक्षा समझौते से जुड़े सऊदी अरब के सहयोगियों द्वारा आयोजित की गई थी। चर्चा में भाग लेने वालों में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन शामिल थे।

ईरान ने कराई सऊदी-हूती के बीच पीस डील?

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बावजूद, जिसमें किसी हमले की स्थिति में सामूहिक सैन्य सहायता देना अनिवार्य है, पाकिस्तान और तुर्की दोनों ही पूरी तरह से मदद देने में विफल रहे हैं। उन्होंने अपनी भूमिका को सक्रिय युद्ध या सैन्य सुदृढ़ीकरण के बजाय केवल सैन्य सलाहकारों तक ही सीमित रखा है।

इस बीच, ईरान का प्रतिनिधित्व करने के लिए वहां ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अधिकारी मौजूद थे।

इसके बदले में, हूतियों को युद्धविराम बनाए रखने और सऊदी अरब पर हमले बंद करने के लिए कहा गया था। हालांकि, मौजूदा समय में हूतियों ने अपने हमलों को यह कहते हुए सही ठहराया है कि सऊदी अरब अपने समझौते से मुकर गया है। ऐसा करने में ईरान ने उनकी मदद की है।

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