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7 अक्टूबर के हमले, गाजा और ईरान युद्ध के बाद इजरायल में आज मतदान... क्या सातवीं बार पीएम बनेंगे नेतन्याहू?

Published: Tue, 27 Oct 2026 08:26 AM (IST)

युद्धों के बीच इजरायल में आम चुनाव हो रहे हैं, और आज मतदान चल रहा है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के राजनीतिक ...और पढ़ें

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू(फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, यरुशलम। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मंगलवार को हो रहे चुनावों में अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा का सामना कर रहे हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमलों, गाजा में लंबे सैन्य अभियान, ईरान के साथ सीधे युद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के बढ़ते अलगाव के बीच इजरायली मतदाता सरकार चुनने के लिए आ मतदान कर रहे हैं।

19 वर्षों तक सत्ता में रहने वाले इजरायल के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नेता नेतन्याहू के लिए चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। चुनावी सर्वेक्षणों के अनुसार, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनके दक्षिणपंथी गठबंधन का मुकाबला पूर्व सैन्य प्रमुख गादी ईसेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन से है।

सुरक्षा मामलों में सख्त रुख रखने वाले ईसेनकोट को दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी दोनों तरह के मतदाताओं का समर्थन मिल रहा है। संसद नेसेट की 120 सीटों में से किसी भी पक्ष के पास पूर्ण बहुमत का स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है। यदि कोई भी गठबंधन जरूरी संख्या नहीं जुटा पाता, तो नेतन्याहू अगले चुनाव तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।

क्या है गठबंधन की गणितीय समीकरण?

इजरायल की चुनावी प्रणाली में खंडित जनादेश के चलते छोटी पार्टियों की भूमिका निर्णायक होगी। नेतन्याहू को सरकार बनाने के लिए फिर से अति-दक्षिणपंथी नेताओं इतामार बेन-ग्विर और बेजलेल स्मोट्रिच के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है, जिनकी नीतियों का पश्चिमी देशों में विरोध हुआ है।

दूसरी ओर, ईसेनकोट ने फलस्तीनी वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों की हिंसा की आलोचना की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल की अरब अल्पसंख्यक आबादी का मतदान प्रतिशत भी सत्ता के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चुनाव बेहद नजदीकी रहेगा और किसी भी दल को भारी बहुमत मिलने की संभावना कम है।

क्या है चुनावी मुद्दा?

नेतन्याहू ने अपने अभियान में युद्धकालीन नेतृत्व और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ अपनी करीबी साझेदारी को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने दावा किया कि यदि वे सत्ता में बने रहे, तभी ट्रंप प्रशासन ईरानी खतरे को पूरी तरह समाप्त करने के लिए कदम उठाएगा।

दूसरी ओर, ईसेनकोट ने नेतन्याहू पर भय और झूठ की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन जनता द्वारा चुने गए किसी भी नेता के साथ मिलकर काम करेगा। ईसेनकोट ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक विकल्पों की वकालत की है।

7 अक्टूबर के हमलों की जवाबदेही पर बंटी राय

यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 की सुरक्षा विफलताओं की जवाबदेही तय करने का माध्यम भी बन गया है। विरोधियों का मानना है कि देश के सबसे घातक आतंकी हमले की निष्पक्ष राष्ट्रीय जांच होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल की छवि सुधारने के लिए नई सरकार जरूरी है।

वहीं, नेतन्याहू के समर्थकों का तर्क है कि उन्होंने युद्ध के दौरान देश की रक्षा का काम मजबूती से संभाला है और वे मौजूदा सुरक्षा संकटों से निपटने के लिए सबसे सक्षम नेता हैं।

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