नेतन्याहू के भविष्य का 'अग्निपरीक्षा' वाला दिन, इजरायल में आज मतदान; दांव पर 19 साल की साख
इजरायल में मंगलवार को संसदीय चुनाव के लिए मतदान होगा, जो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लोकप्रियता और हमास युद्ध के बाद उनकी नीतियों पर जनमत संग्रह माना जा रहा है।

इजरायल में संसदीय चुनाव के लिए मतदान

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, यरुशलम। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की प्रतिष्ठा-लोकप्रियता परखने के लिए पैमाना बने इजरायल के संसदीय चुनाव के लिए मंगलवार को मतदान होगा। इसमें साफ हो जाएगा कि सात अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हुए हमास के हमले और उसके बाद इजरायल की जवाबी कार्रवाई को इजरायली जनता ने किस रूप में लिया है।
तीन वर्ष के इस दौर में गाजा में शांति स्थापित नहीं हुई है और लेबनान के दक्षिणी भाग में मौजूद इजरायली सेना भी जब-तब कार्रवाई कर रही है। खास बात यह है कि मुख्य मुकाबले में शामिल कोई भी दल स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र का समर्थन नहीं कर रहा है।
इस चुनाव में नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को पूर्व सेना प्रमुख गादी एसेनकोट के नेतृत्व वाला गठबंधन और पूर्व प्रधानमंत्री नाफ्ताली बेनेट चुनौती दे रहे हैं। ओपीनियन पोल किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बहुमत मिलने की उम्मीद नहीं जता रहे हैं। मंगलवार को होने वाले मतदान में देश के कुल 73 लाख मतदाता 120 सदस्यों वाली संसद नीसेट के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे।
इजरायल के चुनाव में मतदाता किसी प्रत्याशी विशेष को नहीं चुनते हैं बल्कि वे पार्टी या पार्टियों के गठबंधन को वोट देते हैं। ऐसे में चुनाव विचारधारा और नीतियों के आधार पर होता है किसी प्रत्याशी विशेष के पसंद-नापसंद से नहीं।
किसी पार्टी या गठबंधन को संसद में पहुंचने के लिए न्यूनतम 3.25 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन आवश्यक है। नीसेट के लिए निर्वाचित सदन की अवधि चार वर्ष होती है लेकिन सदन चाहे तो वह समय से पूर्व खुद को भंग कर नए चुनाव की सिफारिश कर सकता है।
बेंजामिन नेतन्याहू दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता हैं और अलग-अलग कार्यकालों में करीब 19 वर्ष से प्रधानमंत्री हैं। इस प्रकार से वह इजरायल में सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहे हैं। नेतन्याहू नए कार्यकाल के लिए भी चुनाव मैदान में हैं। वह बीते तीन वर्षों में देश की सुरक्षा के लिए अपनी सरकार कार्यों के आधार पर जनता से समर्थन मांग रहे हैं।
इसलिए यह चुनाव नेतन्याहू को स्वीकार या अस्वीकार करने वाला भी माना जा रहा है। जबकि पूर्व सेना प्रमुख एसेनकोट मध्यमार्गी याशर पार्टी के नेता हैं और नेतन्याहू को चुनौती देने वाले मुख्य नेता के तौर पर उभरे हैं।
हमास के साथ छिड़ी लड़ाई में वह नेतन्याहू की युद्धकालीन कैबिनेट के सदस्य थे लेकिन जून 2024 में उन्होंने यह कहते हुए इस कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था कि युद्ध को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है। इसी प्रकार से पूर्व प्रधानमंत्री बेनेट नेतन्याहू सरकार की युद्धनीति को सही नहीं मानते हैं यद्यपि वह भी दक्षिणपंथी दलों का नेतृत्व कर रहे हैं।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
