खामोश कमांड और गुप्त नेटवर्क... ह्यूमन चेन से चिट्ठियां भेजकर ईरान चला रहे मोजतबा खामेनेई
मोजतबा खामेनेई ईरान की सत्ता को गुप्त मानव श्रृंखला नेटवर्क के जरिए चला रहे हैं, ताकि अमेरिका और इजरायल की हाईटेक निगरानी से बचा जा सके।

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की तस्वीर पकड़ा समर्थक। (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हाथ से लिखी चिट्ठियां, सील बंद लिफाफे और भरोसेमंद लोगों की मानव श्रृंखला इन्हीं के सहारे आज ईरान की सत्ता संचालित हो रही है। मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अली खामेनेई की मौत के बाद देश की कमान संभाली, लेकिन खुद पूरी तरह सार्वजनिक नजरों से गायब हैं।
न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उनके आदेश आधुनिक डिजिटल माध्यमों से नहीं, बल्कि इस गुप्त मानव श्रृंखला नेटवर्क के जरिए पहुंचाए जा रहे हैं, ताकि अमेरिका और इजरायल की हाईटेक निगरानी से बचा जा सके और उनकी लोकेशन का कोई सुराग न मिले।
न आवाज, न चेहरा, सुरक्षा के लिए सख्त खामोशी
रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम लीडर का अब तक कोई वीडियो या आडियो सामने नहीं आया है। उनके संदेश या तो लिखित रूप में जारी होते हैं या फिर सरकारी टीवी पर पढ़कर सुनाए जाते हैं। इसे एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है, ताकि पहले सार्वजनिक संबोधन में किसी भी तरह की कमजोरी उजागर न हो और दुश्मन देशों को कोई तकनीकी सुराग न मिले।
हालात इतने संवेदनशील हैं कि रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष कमांडर और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी उनसे मिलने से बच रहे हैं। आशंका है कि उनकी आवाजाही या संपर्क के जरिए इजरायल उनकी लोकेशन ट्रैक कर सकता है और एक और सटीक हमला संभव हो सकता है।
हमले के जख्म, लेकिन फैसलों पर पूरी पकड़
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके चेहरे और होंठों पर चोट के कारण बोलने में दिक्कत हो रही है, एक पैर पर तीन सर्जरी के बाद अब कृत्रिम पैर लगाने की जरूरत बताई गई है, जबकि घायल हाथ धीरे-धीरे ठीक हो रहा है।
इसके बावजूद वे मानसिक रूप से पूरी तरह सक्रिय हैं और देश के अहम फैसलों में लगातार शामिल हैं। उनकी देखभाल में मसूद पेजेश्कियन खुद शामिल हैं और उनका ठिकाना डाक्टरों व मेडिकल टीम से घिरा हुआ बताया गया है यानी एक ऐसा नेतृत्व, जो सामने नहीं दिखता, लेकिन हर निर्णय के केंद्र में मौजूद है।
तनाव कायम, कूटनीतिक रास्ते बंद
ईरान ने इन दावों को दुश्मन का प्रोपेगेंडा बताते हुए खारिज किया है और कहा है कि यह देश की एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने की साजिश है। हालांकि जमीनी हालात कुछ और ही संकेत दे रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच असहज युद्धविराम जरूर है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव चरम पर बना हुआ है।
कूटनीतिक कोशिशें भी ठहर गई हैं, क्योंकि ईरान अपने परमाणु अधिकारों पर अडिग है और प्रस्तावित वार्ताओं में शामिल होने से इनकार कर चुका है। ऐसे में सत्ता का यह खामोश लेकिन सख्त माडल साफ इशारा करता है कि ईरान की रणनीति अब खुलकर नहीं, बल्कि छिपकर और बेहद नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ रही है जहां हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है।
