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ईरान में फूटा लेटर बम, मोजतबा खामेनेई को लिखा गया सीक्रेट नोट लीक; US से बातचीत को लेकर सत्ता में दो फाड़

Published: Sat, 25 Apr 2026 04:18 PM (IST)

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को भेजे गए एक गोपनीय पत्र से देश के गंभीर आर्थिक संकट और अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता की आवश्यकता का खुलासा हुआ है।

ईरान में फूटा लेटर बम।

ईरान में फूटा लेटर बम।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि तेहरान के नेतृत्व में फूट पड़ गई है। उनके इस दावे के बाद ईरान द्वारा एकता का जो सावधानीपूर्वक नियोजित प्रदर्शन किया गया वह शायद कहीं ज्यादा गहरे आंतरिक संकट को दबाने की कोशिश हो सकती है। इस बात का खुलासा ईरान के राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं और विपक्षी मीडिया आउटलेट ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट में हुआ है।

दरअसल, इस विवाद के केंद्र में एक कथित तौर पर गोपनीय पत्र है, जिसे ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को भेजा था। इस पत्र में चेतावनी दी गई थी कि ईरान का बिगड़ता आर्थिक संकट नेतृत्व के सामने परमाणु मुद्दे पर अमेरिका के साथ गंभीरता से बातचीत करने के अलावा कोई और व्यावहारिक विकल्प नहीं छोड़ता है।

गहराता जा रहा मतभेद

सीक्रेट लेटर के सामने आने के बाद इसे अब कई पर्यवेक्षकों द्वारा इस बात के सबूत के तौर पर देखा जा रहा है कि ईरानी सत्ता-प्रतिष्ठान के भीतर इस बात पर मतभेद गहराता जा रहा है कि तेहरान को वॉशिंगटन के साथ समझौता करना चाहिए या टकराव जारी रखना चाहिए।

आर्थिक पतन की चेतावनी देने वाला गोपनीय पत्र

इस मामले से परिचित लोगों के अनुसार, पत्र में यह तर्क दिया गया था कि ईरान की आर्थिक स्थितियां बेहद गंभीर और असहनीय हो गई हैं। कथित तौर पर इसमें नेतृत्व से आग्रह किया गया था कि वह अपने मौजूदा रास्ते पर पुनर्विचार करे और परमाणु मुद्दे पर अमेरिका के साथ सार्थक बातचीत की दिशा में आगे बढ़े।

कहा गया है कि इस पर दस्तखत करने वालों में संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, मुस्तफा पौरमोहम्मदी और दूसरे बड़े नेता शामिल थे।

खबरों के मुताबिक, कुछ अधिकारियों ने इस पर दस्तखत करने से मना कर दिया। तेहरान के राजनीतिक गलियारों में अब जिस एक नाम की चर्चा हो रही है, वह हैं पूर्व मुख्य परमाणु वार्ताकार अली बाघेरी कानी।

यह पत्र निजी तौर पर मुजतबा खामेनेई को संबोधित था और इसे सार्वजनिक करने, संसद में पेश करने या व्यापक राजनीतिक वर्ग के लिए नहीं लिखा गया था।

लीक से मचा राजनीतिक बवाल

तेहरान में चल रही खबरों के मुताबिक, यह दस्तावेज बाद में उस सीमित दायरे से बाहर के कुछ कट्टरपंथी लोगों को दिखाया गया। उन खबरों के अनुसार, बाघेरी कानी ने कथित तौर पर इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने इस पत्र पर दस्तखत नहीं किए थे। इस लीक की वजह से भारी विरोध का सामना करना पड़ा है।

गालिबफ के करीबी माने जाने वाले जलील मोहेब्बी ने सोशल मीडिया पर एक तीखी चेतावनी जारी करते हुए लिखा कि ईरानी कानून के तहत जो कोई भी सरकार के किसी गोपनीय पत्र को उजागर करेगा उसे जेल हो सकती है।

ट्रंप के दावे का एक साथ खंडन किया गया

यह लेटर ठीक उस समय लीक हुआ, जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि ईरानी अधिकारी इस बात पर "कुत्ते और बिल्लियों की तरह लड़ रहे हैं" कि वॉशिंगटन के साथ बातचीत की जाए या नहीं।

तेहरान ने तुरंत इसका कड़ा विरोध किया। इसके बाद ईरानी नेताओं ने लगभग एक जैसे सार्वजनिक संदेश जारी किए, जिनमें एकता और नए सर्वोच्च नेता के प्रति निष्ठा पर जोर दिया गया था।

विवाद के केंद्र में परमाणु वार्ता

ईरानी विपक्ष की रिपोर्ट के अनुसार, मुजतबा खामेनेई ने कथित तौर पर बातचीत के पहले दौर से पहले एक 'रेड लाइन' (सीमा) तय कर दी थी और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर सीधे चर्चा न करें।

लेकिन वार्ताकारों के पास इस मुद्दे से बचने की गुंजाइश कथित तौर पर बहुत कम थी, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच कोई भी गंभीर बातचीत अनिवार्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ही केंद्रित होती है। ऐसा लगता है कि इस फैसले से कट्टरपंथी सांसदों में गुस्सा भड़क उठा है।

संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के उपाध्यक्ष महमूद नबावियन ने कहा कि वार्ताकार टीम ने "क्रांति के नेता द्वारा तय की गई स्पष्ट रेड लाइन के विपरीत" काम करके एक "रणनीतिक गलती" की है।

मीडिया की "समर्पण और समझौता" की चेतावनी

सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े ईरान के 'नूर न्यूज' ने बाद में एक वीडियो जारी कर चेतावनी दी कि एक "खतरनाक धारा" गालिबफ और अरागची को ऐसे लोगों के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है जो प्रतिरोध के बजाय "समर्पण और समझौता" चाहते हैं। इससे यह संकेत मिला कि यह विवाद अब निजी बैठकों से आगे बढ़कर खुले गुटीय संघर्ष में बदल गया है।

यह पत्र क्यों मायने रखता है?

विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना आधुनिक ईरानी इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण पलों में से एक जैसी है। 1988 में वरिष्ठ अधिकारियों ने अयातुल्ला रूहुल्लाह खुमैनी को चेतावनी दी थी कि ईरान अब ईरान-इराक युद्ध को और अधिक समय तक जारी नहीं रख सकता।

तब उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 598 को स्वीकार कर लिया और युद्ध समाप्त कर दिया। उन्होंने इस फैसले को "जहर का प्याला पीने" जैसा बताया था। खबरों के मुताबिक, यह नया पत्र भी कुछ ऐसा ही संदेश देता है कि अब विचारधारा और आर्थिक वास्तविकता के बीच टकराव हो रहा है।

आगे क्या होगा?

ईरान का सार्वजनिक संदेश अब पूरी तरह से एकता पर जोर देता है। लेकिन घटनाओं का क्रम यह बताता है कि सत्ताधारी व्यवस्था के भीतर एक मुख्य सवाल पर गहरा मतभेद है कि क्या ईरान बिना किसी परमाणु समझौते के अपने आर्थिक संकट से उबर सकता है या फिर उसे वैचारिक विरोध के बावजूद बातचीत करनी ही पड़ेगी? फिलहाल, तेहरान का कहना है कि उनके बीच कोई फूट नहीं है।

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