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ईरान ने कुवैत के सैन्य शिविर पर दागी मिसाइल, 10 सैनिक घायल; इजरायल में चीन से जुड़ा केमिकल प्लांट भी तबाह

Published: Sun, 29 Mar 2026 07:17 PM (IST)Updated: Sun, 29 Mar 2026 09:28 PM (IST)

मध्य पूर्व में युद्ध को लेकर में फिर से तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। रविवार को कुवैत के सैन्य ...और पढ़ें

ईरान में सुनाई दी तेज धमाकों की आवाज (फोटो - रॉयटर्स)

ईरान में सुनाई दी तेज धमाकों की आवाज (फोटो - रॉयटर्स)

HighLights

  1. कुवैत सैन्य शिविर पर मिसाइल हमले में 10 सैनिक घायल।

  2. इजरायल के केमिकल प्लांट पर भी मिसाइल मलबे से हमला।

  3. ईरान-अमेरिका तनाव घटाने को राजनयिक प्रयास तेज।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार कुवैत के सैन्य शिविर पर मिसाइल हमले किए गए है। कुवैत की सेना ने बताया कि एक सैन्य शिविर पर हुए मिसाइल हमले में 10 सैनिक घायल हो गए। इसके साथ ही इजरायल की कंपनी ADAMA का कहना है कि इजरायल के केमिकल प्लांट पर भी मिसाइल या उसके मलबे से हमला किया गया है।

दक्षिणी इजरायल में स्थित केमिकल प्लांट पर भी हुआ हमला

हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है। सक्रिय तत्वों और फसल सुरक्षा सामग्री बनाने वाली इजरायल की कंपनी ADAMA ने इस बात की जानकारी दी है। बताया गया कि कि दक्षिणी इजरायल में स्थित उसके मख्तेशिम प्लांट पर या तो किसी ईरानी मिसाइल से हमला हुआ, या फिर मिसाइल के मलबे से नुकसान पहुंचा है। जानकारी के अनुसार यह प्लांट चीनी स्वामित्व वाले सिंजेंटा ग्रुप का हिस्सा है।

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वहीं दूसरी ओर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध रोकने के लिए कूटनीति प्रयास तेजी से जारी है। इसी कड़ी में रविवार को तुर्की, सऊदी अरब, मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की दो-दिवसीय बैठक इस्लामाबाद में शुरू हुई। अधिकारी इसे अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत शुरू करने की दिशा में अब तक का सबसे सफल प्रयास बता रहे हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात

पाकिस्तान में बैठक से कुछ घंटे पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ 90 मिनट तक फोन पर बातचीत की। पिछले पांच दिनों में ईरानी नेता के साथ यह उनकी दूसरी बातचीत थी। अधिकारियों के अनुसार, इस बातचीत का मुख्य जोर तनाव कम करने और दोनों पक्षों के बीच विश्वास को फिर से मजबूत करने पर है।

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जानकारी के अनुसार पेजेशकियन ने शरीफ से कहा कि अमेरिका के साथ पिछली परमाणु वार्ताओं के दौरान ईरान पर दो बार हमला किया गया था। उन्होंने कहा कि यह विरोधाभास है। एक तरफ बातचीत और दूसरी तरफ हमले ने वाशिंगटन के इरादों को लेकर ईरान के संदेह को और गहरा कर दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तेहरान की ओर से सीधी बातचीत पर विचार करने से पहले, विश्वास-बहाली के उपायों की आवश्यकता है।

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रियाद के बाद इस्लामाबाद में हो रही बैठक

मालूम हो कि इस्लामाबाद में हो रही यह बैठक अचानक तय नहीं की गई है। यह उसी प्रयास का ही एक विकसित रूप है। जिस पर इस महीने की शुरुआत में रियाद में मुस्लिम और अरब देशों की एक बड़ी बैठक के दौरान पहली बार चर्चा की गई थी। वह प्रयास अब चार देशों के एक कूटनीतिक रास्ते के रूप में मजबूत हो गया है। जिसमें पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका के बीच मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

मूल रूप से इस बैठक को तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित करने की योजना थी, लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में पाकिस्तान की बढ़ती सक्रिय भूमिका के कारण इसे इस्लामाबाद में स्थानांतरित कर दिया गया।

इसके साथ ही, चीन ने पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों के लिए तेहरान को अपना समर्थन दिया है। ईरान को इस कूटनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक शक्तियां अब इस क्षेत्रीय पहल के समर्थन में एकजुट होने लगी हैं।

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क्या चाहता है तेहरान ?

चार देशों की इस बैठक में ईरान की प्रतिक्रिया की समीक्षा करने और वाशिंगटन को वापस भेजे जाने वाले संदेशों में तालमेल बिठाने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया से परिचित अधिकारियों के अनुसार, ईरान पहले ही इस्लामाबाद के ज़रिए अमेरिकी प्रस्ताव का अपना जवाब भेज चुका है। तेहरान की मांगों में युद्ध समाप्त करना, नुकसान के लिए मुआवजा, भविष्य के हमलों के खिलाफ गारंटी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अपने रणनीतिक प्रभाव को मान्यता देना शामिल है।

बैठक का एजेंडा क्या ?

शरीफ के साथ अपनी बातचीत के दौरान, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने चेतावनी दी कि इजराइल इस संघर्ष को क्षेत्र के अन्य देशों तक फैलाने की कोशिश कर रहा है। ईरान पर हमलों के लिए विदेशी धरती के इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त की। वहीं इस्लामाबाद का नजरिया यह है कि कोई भी बातचीत आपसी सम्मान के माहौल में होनी चाहिए, और ईरानी अधिकारियों और नागरिकों की हत्याएं बंद होनी चाहिए।

अधिकारियों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटे यह तय करेंगे कि क्या इस राजनयिक प्रयास के परिणामस्वरूप कोई बैठक हो पाती है। पाकिस्तान ने अब ईरान से बात कर ली है, क्षेत्रीय शक्तियों की मेजबानी की है, और दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है। आगे क्या होगा, यह इस्लामाबाद में नहीं, बल्कि वाशिंगटन और तेहरान में लिए गए निर्णयों पर निर्भर करेगा।

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