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ईरान में मची खलबली, अराघची को हटाने की तैयारी में पेजेशकियान; रिपोर्ट में बड़ा दावा

Published: Fri, 01 May 2026 02:42 PM (IST)

ईरान में राष्ट्रपति पेजेशकियान और संसद स्पीकर गालिबफ विदेश मंत्री अब्बास अराघची को पद से हटाने की तैयारी में हैं। ...और पढ़ें

अराघची को हटाने की तैयारी में पेजेशकियान। (फाइल फोटो)

अराघची को हटाने की तैयारी में पेजेशकियान। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. राष्ट्रपति पेजेशकियान विदेश मंत्री अराघची को हटाना चाहते हैं।

  2. अराघची पर रिवोल्यूशनरी गार्ड के निर्देश मानने का आरोप।

  3. ईरानी नेतृत्व में गंभीर आंतरिक तनाव और खींचतान।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरानी नेतृत्व के भीतर तनाव एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबफ कथित तौर पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।

ईरानी मामलों पर केंद्रित ब्रिटेन स्थित मीडिया आउटलेट 'ईरान इंटरनेशनल' के अनुसार, इन दोनों नेताओं ने अरागची पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने राष्ट्रपति पद की अनदेखी करते हुए 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' के निर्देशों का पालन किया है।

अराघची पर क्या आरोप लगा?

यह मतभेद उन आरोपों के कारण पैदा हुआ है कि अराघची ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर कम, बल्कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर अहमद वाहिदी के एक सहायक के तौर पर ज्यादा काम किया है। मामले से परिचित सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्री वाहिदी के साथ पूर्ण समन्वय में काम कर रहे हैं और कथित तौर पर राष्ट्रपति पेजेशकियान को सूचित किए बिना उनके निर्देशों पर आधारित नीतियों को लागू कर रहे हैं।

अराघची को पद से हटाया जा सकता है

इस अंदरूनी दरार के कारण पेजेश्कियन में गहरी असंतोष की भावना पैदा हो गई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने करीबी लोगों से कहा है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो वह अराघची को पद से हटा देंगे।

जैसा कि 'ईरान इंटरनेशनल' ने बताया है कि राष्ट्रपति को लगता है कि संवेदनशील कूटनीतिक दांव-पेचों के दौरान विदेश मंत्री के सैन्य कमान की ओर झुकने से उनकी स्थिति कमजोर हुई है।

ईरान की सत्ता में मची खींचतान

पेजेशयान और वाहिदी के बीच मतभेद पहले 28 मार्च को सामने आए थे, जब सूत्रों ने 'ईरान इंटरनेशनल' को बताया था कि इस विवाद की जड़ "युद्ध के प्रबंधन और लोगों की आजीविका तथा देश की अर्थव्यवस्था पर इसके विनाशकारी परिणामों" में निहित है।

खबरों के मुताबिक, सत्ता की इस खींचतान ने राष्ट्रपति को "पूरी तरह से राजनीतिक गतिरोध" में फंसा दिया है। ऐसी भी खबरें हैं कि उनसे संघर्ष के दौरान मारे गए सरकारी अधिकारियों की जगह नए अधिकारियों को नियुक्त करने का अधिकार छीन लिया गया है।

कथित तौर पर वाहिदी ने यह दावा किया है कि युद्धकालीन आपातकाल के चलते, सभी संवेदनशील प्रबंधकीय पदों पर सीधे तौर पर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा ही चयन और संचालन किया जाना चाहिए।

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