'तेल ही नहीं, पानी के लिए भी तरसा देंगे...', होर्मुज पर ट्रंप की धमकी के बाद भड़का ईरान; दी चेतावनी
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध गहरा गया है। ईरान द्वारा इजरायल के अरद और डिमोना पर मिसाइल हमले के ...और पढ़ें

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच पिछले तीन हफ्ते से जारी युद्ध और भीषण होने की दिशा में बढ़ गया है। ईरान द्वारा इजरायल के अरद और डिमोना पर शनिवार को किए गए घातक मिसाइल हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसा न होने पर ईरान के बिजली संयंत्रों को तबाह करके पूरे देश को अंधेरे में डुबो देंगे। पलटवार करते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो वह समूचे पश्चिम एशिया में जल संयंत्रों पर हमले करके पानी का संकट पैदा कर देगा और साथ ही होर्मुज जलमार्ग को हर किसी के लिए बंद कर देगा।
कच्चे तेल की कीमतें चरम पर
पिछले 22 दिनों से जारी सैन्य संघर्ष में 2000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। वहीं होर्मुज जलमार्ग पर रिवोल्यूशनरी गार्ड के पहरे के चलते तेल और गैस की कीमतें चरम पर पहुंच गई हैं, जबकि दुनियाभर में ऊर्जा संकट भी गहरा गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने अल्टीमेटम देकर 'टाइम बम' को सक्रिय कर दिया है।

बाजार के लिए सोमवार 'काला दिन' साबित हो सकता है। इजरायल के परमाणु केंद्र वाले शहर डिमोना और अरद में ईरानी हमले में 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। वहीं, ईरान ने अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान को भी मार गिराने का दावा किया। कतर का भी एक सैन्य हेलीकॉप्टर भी संदिग्ध परिस्थिति में फारस की खाड़ी में गिरा, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई।
ट्रंप ने दिया था अल्टीमेटम
पिछले तीन हफ्ते से बंद पड़े दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण होर्मुज जलमार्ग को लेकर ट्रंप अब और ज्यादा आक्रामक होने लगे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, शनिवार को ट्रंप ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि तय समयसीमा के भीतर होर्मुज जलमार्ग न खुला तो अमेरिका सबसे बड़े संयंत्र से हमले की शुरुआत करेगा।
माना जा रहा है कि उनका संकेत बुशेहर परमाणु संयंत्र या तेहरान के निकट दमावंद गैस संयंत्र की ओर हो सकता है। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी कि उसके ऊर्जा संयंत्रों पर किसी भी हमले की स्थिति में क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ऊर्जा ढांचे, सूचना प्रौद्योगिकी नेटवर्क तथा समुद्री जल शोधन संयंत्रों पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
ईरान ने किया था हमला
ईरान के नतांज परमाणु प्लांट पर हमले का बदला लेने के लिए ईरान ने शनिवार देर रात इजरायल के दक्षिणी शहर अरद और डिमोना पर हमले किए। इसमें डिमोना में इजरायल के सबसे बड़े परमाणु केंद्र के करीब ईरानी मिसाइल गिरी। एपी के अनुसार, अरद में 10 रिहायशी इमारतों को नुकसान हुआ है। हमले में 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
हमले के बाद नेतन्याहू घटनास्थल पर पहुंचे और पूरी दुनिया से ईरान के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई की अपील की। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी आईएईए ने कहा कि परमाणु केंद्र के पास किसी तरह का विकिरण नहीं हुआ है। अल जजीरा के अनुसार, इजरायली एयर फोर्स ने ईरानी मिसाइल को इंटरसेप्ट न कर पाने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अब तक दो बार इजरायल ईरानी हमले रोक पाने में विफल रहा है।
ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर शनिवार को हुए हमले से इजरायल ने इनकार किया है, जबकि पेंटागन ने कोई टिप्पणी नहीं की है। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी संस्था आईएईए ने कहा कि इस परमाणु केंद्र में लगभग 441 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम रखा है, जो इसके मलबे में कहीं दबा हुआ है। ईरान ने कहा कि नतांज के साथ-साथ आंदीमेश्क में अस्पतालों पर भी हमले हुए हैं।
ईरान ने दिए नए चरण के हमलों के संकेत
रॉयटर्स के अनुसार, अरद और डिमोना पर हमले को बड़ी सफलता बताते हुए रिवोल्यूशनरी गार्ड के एरोस्पेस फोर्स प्रमुख मेजर जनरल सैयद माजिद मूसावी ने दावा किया कि इजरायल के आसमान पर ईरान की बढ़त साबित हो चुकी है। इजरायली एयर स्पेस अब अभेद्य नहीं रह गया है। सामरिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।
मूसावी ने कहा कि ईरान के नए हमले अमेरिका और इजरायल को चकित कर देंगे। वहीं, ईरानी संसद प्रमुख एमबी गलीबाफ ने एक्स पर संकेत दिया कि हमलों के अगले चरण की पूर्वनिर्धारित योजना पर काम शुरू करने का सही समय आ गया है।
डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमले के बाद ईरानी सेना प्रमुख अयाल जमीर ने कहा कि युद्ध अभी खत्म होने वाला नहीं है। हालांकि, अल जजीरा के अनुसार, ईरानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि डिएगो गार्सिया की ओर मिसाइल हमले ईरान ने नहीं किए थे।
जल शोधन संयंत्र पर पूरी तरह निर्भर हैं खाड़ी देश
ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र के समुद्री जल शोधन संयंत्रों को निशाना बनाने की चेतावनी के बाद अरब देशों की जल सुरक्षा को लेकर ¨चता बढ़ गई है। रॉयटर्स के अनुसार, यूएई, कतर, बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत और ओमान संयुक्त रूप से दुनिया के लगभग एक-तिहाई समुद्री जल शोधन करते हैं और यहां विश्व के कई सबसे बड़े संयंत्र स्थित हैं।
यूएई में पीने के पानी की 80 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति समुद्री जल शोधन से होती है, जबकि कतर और बहरीन पूरी तरह इसी पर निर्भर हैं। बहरीन ने 2016 से भूजल को केवल आपातकालीन उपयोग के लिए सुरक्षित रखा है। वहीं, सऊदी अरब में 2023 तक कुल जल आपूर्ति का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा शोधन संयंत्रों से प्राप्त हुआ, हालांकि वहां सीमित भूजल भंडार भी उपलब्ध हैं।
