चीन का HQ-9B हो गया फुस्स? ईरान में US-इजरायल की तबाही के बाद उठे सवाल
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान में भारी तबाही हुई, जिससे चीन के HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम की ...और पढ़ें

चीन के एयर डिफेंस सिस्टम रहा नाकाम!
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों ने ईरान में भारी तबाही मचाई और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत उसके रक्षा मंत्री और डिफेंस स्टाफ के चीफ की मौत हो गई। बड़े पैमाने पर तबाही के बाद तेहरान के एयर डिफेंस सिस्टम पर को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल, ईरान ने हाल ही में चीन से HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। अमेरिका और इजरायल के सटीक हमलों रोकने में डिफेंस सिस्टम नाकाम रहा। इससे पहले जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था, उस वक्त भी ये सिस्टम फेल हो गया था।
चीन के एयर डिफेंस सिस्टम पर क्यों उठ रहे सवाल?
ईरान में खराब प्रदर्शन ने अब कॉम्बैट एनालिस्ट को HQ-9B की काबिलियत पर सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया है। हालांकि, एयर डिफेंस सिस्टम का फेलियर कमियों और खामियों का इशारा हो सकता है, लेकिन यह भी हो सकता है कि यूएस और इजरायल की मिली-जुली एयरपावर ने HQ-9B वाले इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी पड़ गया हो।
रूस और अमेरिका से प्रेरणा लेकर बनाया सिस्टम
चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन का बनाया हुआ HQ-9B रूसी S-300PMU और अमेरिकन पैट्रियट PAC-2 सिस्टम से प्रेरित था, लेकिन अब यह पूरी तरह से स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम बन गया है। इसका पहला टेस्ट 2006 में किया गया था और यह पिछले दस साल से इस्तेमाल हो रहा है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी रेंज 260 किमी. है और यह ज्यादा ऊंचाई पर प्रोजेक्टाइल को मार गिराने के लिए 50 किमी. तक जा सकता है।
चीन ने कौन से इलाकों में तैनात कर रखा है ये एयर डिफेंस सिस्टम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, HQ-9B एक साथ 6-8 टारगेट पर हमला कर सकता है और 100 तक को ट्रैक कर सकता है। HQ-9B को बीजिंग, तिब्बत और साउथ चाइना सी इलाकों में तैनात किया गया है। ये सभी इलाके चीन की रणनीतिक हितों के लिए बहुत जरूरी हैं, जिसका मतलब है कि यह सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम उसके एयर डिफेंस नेटवर्क का मुख्य आधार है।
ईरानी सेना के बेड़े में कैसे शामिल हुआ HQ-9B?
जैसे ही खाड़ी में तनाव बढ़ा, ईरान ने अपने सुरक्षा हथियारों का जखीरा बढ़ाना शुरू कर दिया। पता चला है कि HQ-9B को ईरान ने चीन के साथ तेल के बदले हथियार की डील के तहत खरीदा था। 2025 की लड़ाई के दौरान इजरायली मिसाइलों के सामने रूसी S-300PMU-2 के खराब प्रदर्शन के बाद यह ईरान का बड़ा अपग्रेड था।
HQ-9B को शायद नतांज न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स, फोर्डो एनरिचमेंट फैसिलिटी, IRGC के मिसाइल और UAV बेस और तेहरान और इस्फहान के पास एयरबेस जैसे जरूरी इंस्टॉलेशन के आस-पास तैनात किया गया था।
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