क्या है 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी', अमेरिका ने की फुल-प्रूफ प्लानिंग; इजरायल-ईरान की जंग में अब तक क्या-क्या हुआ?
अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' चलाया। इसके तहत ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका ने शनिवार, 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ एक बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया, जिसका नाम 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' था। अमेरिका के इस ऑपरेशन में इजरायल ने भी साथ निभाया। अमेरिका-इजरायल ने इन हमलों में ईरान की खास मिलिट्री जगहों को निशाना बनाया।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिस के पास हमला किया गया, जिसके बाद खबर सामने आई कि अमेरिकी हमलों में खामेनेई की मौत हो गई है।
क्या है ऑपरेशन फ्यूरी?
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी एक कॉम्बैट मिशन है, जिसे इजरायल के सपोर्ट से यूनाइटेड स्टेट्स ने चलाया। इसे मिसाइल फैसिलिटीज, नेवल इंस्टॉलेशन और कमांड सेंटर्स समेत स्ट्रैटेजिक ईरानी मिलिट्री साइट्स को टारगेट करने के लिए किया गया था।
US अधिकारियों के मुताबिक, यह मिशन ईरान के मिसाइल प्रोग्राम्स और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर से होने वाले संभावित खतरों पर हमला करके अमेरिकी नागरिकों और साथियों की रक्षा के लिए बनाया गया था।
US डिफेंस अधिकारियों ने स्ट्राइक शुरू होने के तुरंत बाद ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की पब्लिकली घोषणा कर दी थी।
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कौन था ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का टारगेट?
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका-इजरायल ने मिलकर हमले किए, जिसमें पूरे ईरान में सैन्य ठिकानों और नेवल जगहों पर फोकस किया गया।
डोनल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान पर हमले के बाद वीडयो शेयर किया और बताया, 'इस ऑपरेशन का मकसद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना और साथियों के लिए खतरों को खत्म करना था।
अमेरिका के हमले का उद्देश्य ईरान की न्यूक्लियर एक्टिविटीज के बारे में भी कड़ा संदेश देना था। अमेरिका ने ईरान से कई बार न्यूक्लियर हथियार न बनाने की बात कही।
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डोनल्ड ट्रंप की ईरान को चेतावनी
डोनल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा था, ईरान के पास अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका की मांगों को मानने के लिए 10 दिन हैं।
ईरान ने इसके जवाब में अमेरिकी बेस और इजरायल पर बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इस ऑपरेशन से अमेरिका-ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया।
ईरान ने दिया अमेरिकी हमलों का जवाब
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिनों के शोक का एलान किया गया। ईरान ने कहा कि सुप्रीम लीडर की मौत का बदला लिया जाएगा।
अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने सात देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स समेत ईरानी सेना ने मिडिल ईस्ट में US के ठिकानों पर बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला करके जवाब दिया।
ईरान ने अमेरिका के साथी देशों संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर पर भी बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। ईरान ने इन हमलों से अपने पड़ोसी मुल्कों बताया है कि उन्हें भी अमेरिका का साथ देने की कीमत चुकानी होगी।
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ट्रंप ने ईरान के लोगों से की अपील
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी नागरिकों से मिलिट्री कैंपेन खत्म होने के बाद अपनी सरकार पर कंट्रोल करने की अपील की। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, 'आपकी आजादी का समय आ गया है।'
डोनल्ड ट्रंप ने ईरान ने कहा, 'जब हम काम पूरा कर लें, तो अपनी सरकार पर कब्जा कर लें। यह आपकी होगी।'
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का वीडियो
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले 24 घंटों का वीडियो फुटेज जारी किया। इस वीडियो में बताया गया, 'राष्ट्रपति ने कार्रवाई का आदेश दिया और हमारे बहादुर सैनिक, नाविक, एयरमैन, मरीन, गार्डियन और कोस्ट गार्डमैन इस आदेश का पालन कर रहे हैं।
वीडियो में अमेरिकी ग्राउंड फोर्स के ऑपरेट किए जाने वाले हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) को दिखाया गया है। इसमें एडवांस्ड और कॉस्ट-इफेक्टिव हथियारों का मिला-जुला रूप दिखाया है, जो स्केल और स्ट्रैटेजी में तेजी से बढ़ोतरी को दिखाता है।
अमेरिका ने नए तैनात किए गए LUCAS वन-वे अटैक ड्रोन के साथ, हमलों में टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें और F/A-18 और F-35 जेट सहित एडवांस्ड फाइटर एयरक्राफ्ट शामिल किए।
सोर्स: यूएस सेंट्रल कमांड
