आबू धाबी, एएफपी। सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हमले के बाद ईरान पर हमले की धमकी दे रहे अमेरिका के तेवर गुरुवार को ढीले पड़ गए। ईरान ने चेतावनी दी है कि उस पर किसी भी तरह के हमले की परिणाम पूर्ण युद्ध के रूप में सामने आ सकता है। इसके बाद सऊदी अरब पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा कि वह चाहेंगे कि संकट को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया जाए।

पोंपियो ने शनिवार को हुए हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने हमले में हाथ होने से ईरान के इन्कार को खारिज करते हुए इसे 'युद्ध' जैसी कार्रवाई बताकर उसकी निंदा की। बता दें कि शनिवार को सऊदी अरब के अरामको कंपनी के दो संयंत्रों पर हमला हुआ था, जिससे दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी का उत्पादन आधा रह गया है।

इस घटना के बाद ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने भी ईरान के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी है। ट्रंप ने भी कहा था कि ईरान के खिलाफ सभी विकल्प खुले हुए हैं।

हालात का आकलन करने संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे पोंपियो ने कहा कि उनका देश संकट का शांतिपूर्ण समाधान पसंद करेगा। उन्होंने कहा, 'मैं आशा करता हूं कि ईरान भी ऐसा ही चाहेगा।'

इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद जरीफ ने चेतावनी दी कि अमेरिका या सऊदी अरब की तरफ से किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई होती है तो वह युद्ध का कारण बन सकती है। सीएनएन के साथ बातचीत में जरीफ ने कहा, 'हम युद्ध नहीं चाहते, हम सैन्य संघर्ष में उलझना नहीं चाहते। लेकिन हम अपने क्षेत्र की रक्षा करने से पीछे भी नहीं हटेंगे।'

सलमान से मिले पोंपियो 

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मोर्गन ऑर्टेगुस ने कहा कि पोंपियो ने जेद्दा में क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की थी। दोनों इसको लेकर सहमत थे कि ईरान को उसके आक्रामक रवैये के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

हमला अस्वीकार्य और अभूतपूर्व

उन्होंने कहा, ' अस्वीकार्य और अभूतपूर्व हमला.. न केवल सऊदी अरब की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि सऊदी अरब में रहने और काम करने वाले सभी अमेरिकी नागरिकों के जीवन को भी खतरे में डाल दिया है।'

सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता तुर्की-अल-मलिकी ने कहा कि हमला उत्तर दिशा की तरफ से किया गया और ईरान द्वारा कराया गया। हालांकि, उन्होंने हमले के लिए ईरान को दोषी पाए जाने को लेकर कुछ नहीं कहा।

हूती विद्रोहियों ने ली है जिम्मेदारी

सऊदी अरब के दक्षिणी पड़ोसी देश यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने हमले की जिम्मेदारी ली है। लेकिन अमेरिका और सऊदी अरब दोनों का ही मानना है कि जैसा हमला हुआ है वह हूती विद्रोहियों की क्षमता से बाहर की बात है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने भी कहा है कि हूती विद्रोहियों का दावा भरोसेमंद नहीं है। बुधवार को सीबीएस न्यूज से अमेरिका के एक अधिकारी ने भी कहा था कि हमले को ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खमनेई ने इस शर्त के साथ मंजूरी थी कि उनके देश का इसमें नाम नहीं चाहिए।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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