अमेरिका: घरों में सुरक्षा के लिए रखी बंदूकें बन रहीं बुजुर्गों की आत्महत्या की वजह, चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने
अमेरिका में घरों में सुरक्षा के लिए रखी बंदूकें अब बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं, खासकर मानसिक ...और पढ़ें

(यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है)

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका में घरों की हिफाजत के लिए खरीदी गई बंदूकें अब वहां के बुजुर्गों की जिंदगी के लिए गंभीर जोखिम साबित हो रही हैं। मानसिक तनाव और भूलने की बीमारी से जूझ रहे वृद्ध लोगों में इन हथियारों के कारण खुदकुशी के मामले तेजी से बढ़े हैं।
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी के अनुसार, 2024 में 65 से 85 वर्ष आयु वर्ग के 8226 बुजुर्गों की मौत गोली लगने की वजह से हुई। इसका अर्थ है कि हर दिन औसतन करीब 23 बुजुर्गों ने गोली लगने से जान गंवाई। इनमें से 90 प्रतिशत से भी अधिक मामले आत्महत्या के थे।
डिमेंशिया के मरीजों तक हथियारों की आसान पहुंच
शोध अध्ययनों से यह सामने आया है कि डिमेंशिया से पीड़ित लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति की पहुंच में बंदूक उपलब्ध है। सात राज्यों में किए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण के अनुसार, डिप्रेशन और याददाश्त खोने की समस्या से ग्रस्त 33 प्रतिशत बुजुर्गों के घरों में बंदूकें मौजूद थीं।
चिंता की बात यह है कि इनमें से हर चार में से एक घर में हथियार पूरी तरह असुरक्षित और खुली हालत में रखे गए थे।
समय रहते बातचीत की जरूरत
रिसर्चर लॉरा प्रेटर के साथ बातचीत में एक 72 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि वे अपने बिस्तर के ठीक पास दो हथियार रखते हैं, जबकि वे गंभीर डिप्रेशन और भूलने की बीमारी से पीड़ित थे।
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ केल्सी कॉनरिक का मानना है कि बीमारी के शुरुआती लक्षणों के दौरान ही परिजनों को इस विषय पर खुलकर बात करनी चाहिए, जिससे बुजुर्ग खुद अपने हथियार सुरक्षित करने या हटाने का फैसला ले सकें।
वहीं, कोलोराडो यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ क्रिस नोपके के अनुसार, अक्सर परिवार के सदस्य बुजुर्गों की नाराजगी या आपसी रिश्तों में खटास आने के डर से इस संवेदनशील विषय पर चर्चा करने से बचते हैं, जो आगे चलकर जानलेवा साबित होता है।
