US मिडटर्म चुनाव में भारतीय-अमेरिकियों का बजा डंका, कौन कहां से जीता? पूरी लिस्ट
2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने महत्वपूर्ण राजनीतिक दबदबा दिखाया, जिसमें सुहास सुब्रमण्यम, पिया डंडिया और अरुणा मिलर जैसे उम्मीदवारों ने प्रमुख जीत हासिल की।

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी-भारतीयों का दिखा दबदबा
HighLights
सुहास सुब्रमण्यम और पिया डंडिया ने कांग्रेस चुनाव जीते।
अरुणा मिलर मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर फिर से चुनी गईं।
विवेक रामास्वामी को ओहियो गवर्नर पद पर मिली हार।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनावों के शुरुआती नतीजों ने अमेरिकी संसद और राज्य स्तरीय राजनीति में भारतीय अमेरिकी समुदाय के बढ़ते राजनीतिक दबदबे को एक बार फिर पुष्ट कर दिया है।
परिणामों के अनुसार डेमोक्रेटिक पार्टी के भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने प्रतिनिधि सभा से लेकर प्रमुख राज्य कार्यकारी पदों पर शानदार जीत दर्ज की है।
डेमोक्रेटिक उम्मीदवार सुहास सुब्रमण्यम और पिया डंडिया ने अपने-अपने कांग्रेसनल चुनाव जीते, जबकि अरुणा मिलर मैरिलैंड की लेफ्टिनें गवर्नर के रूप में फिर से चुनी गईं। यह भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक शुरुआती चुनावी सफलता है।
वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से 40 वर्षीय सुहास सुब्रमण्यम भारी मतों के अंतर से दोबारा सांसद चुने गए हैं, जबकि फ्लोरिडा के 22वें जिले में 39 वर्षीय पिया डंडिया ने रिपब्लिकन के मजबूत गढ़ में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
वहीं, मैरीलैंड में 61 वर्षीय अरुणा मिलर एक बार फिर लेफ्टिनेंट गवर्नर चुनी गई हैं। कैलिफोर्निया में वरिष्ठ सांसद रो खन्ना और अमी बेरा ने अपनी सीटें बरकरार रखी हैं।
हालांकि, ओहियो के गवर्नर पद के बेहद चर्चित और हाई-प्रोफाइल मुकाबले में ट्रंप समर्थित भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है।
फ्लोरिडा में पिया डंडिया की ऐतिहासिक जीत
फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया डंडिया ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और नेपल्स के प्रमुख व्यवसायी केसी असकर को हराकर संसद में प्रवेश किया।
उनकी यह जीत एक ऐसे जिले में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत है, जिसकी सीमाओं को 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस के प्रयासों के तहत फिर से निर्धारित (रीडिस्ट्रिक्टिंग) किया गया था।
पाम बीच काउंटी में भारतीय प्रवासियों के घर जन्मीं डंडिया पूर्व में न्यूयॉर्क के हार्लेम में शिक्षिका और हाई स्कूल प्रिंसिपल रह चुकी हैं। पूर्व में व्हाइट हाउस फेलो के रूप में काम कर चुकी हैं और एप्पल कंपनी में भी काम कर चुकी हैं।
उन्होंने अपने अभियान में बच्चों की बेहतर शिक्षा, मध्यम वर्ग के लिए किफायती जीवन-यापन और स्थानीय रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित किया।
उनके खिलाफ मैदान में उतरे केसी असकर अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के पूर्व सैनिक और कई रेस्तरां फ्रेंचाइजी के मालिक हैं, जिन्होंने खुद को डोनल्ड ट्रंप की नीतियों का कट्टर समर्थक बताकर प्रचार किया था। डंडिया ने सभी समीकरणों को साधते हुए जीत अपने नाम की।
सुहास सुब्रमण्यम वर्जीनिया में फिर से चुने गए
वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से मौजूदा सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने एकतरफा मुकाबले में जीत दोहराई। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव टी. बेकविथ को 28 प्रतिशत से अधिक वोटों के भारी अंतर से हराया।
सुब्रमण्यम को 63.16 प्रतिशत वोट (1,73,106 वोट) मिले, जबकि बेकविथ को 34.66 प्रतिशत (94,990 वोट) मिले।
निर्दलीय उम्मीदवार अहसन मुजीब मलिक 1.99 प्रतिशत (5,444 वोट) के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि अन्य उम्मीदवारों को 0.19 प्रतिशत वोट मिले।
यह जीत ऐसे समय में मिली है जब सुब्रमण्यम ने भारतीय-अमेरिकियों से मिडटर्म चुनावों में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि अमेरिका में बढ़ती नफरत और भेदभाव के बीच, उनके वोट और उनकी आवाज पहले से कहीं अधिक मायने रखती है।
जीत के बाद सुब्रमण्यम ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय को अमेरिकी राजनीति में आगे आने का आह्वान किया। मतदान के दौरान उन्होंने कहा, 'बाहर आएं, वोट दें और अपनी बात रखें।
जब हमारे समाज और देश में नफरत व भेदभाव का स्तर बढ़ रहा हो, तब आपका वोट पहले से कहीं अधिक ताकतवर हथियार बन जाता है। मैंने चुनाव लड़ा और जीता; आप भी यह कर सकते हैं। अगर आपको राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेना है, तो यही सही समय है।'
1979 में वर्जीनिया में जन्मे सुब्रमण्यम, भारतीय मूल के माता-पिता की संतान हैं। वे राज्य के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी हैं। उनकी माँ बेंगलुरु से हैं, जबकि उनके पिता चेन्नई और सिकंदराबाद में पले-बढ़े हैं।
मैरीलैंड में अरुणा मिलर दोबारा बनीं लेफ्टिनेंट गवर्नर
मैरीलैंड में भारतीय-अमेरिकी नेता अरुणा मिलर ने एक बार फिर इतिहास दोहराया है। अमेरिकी मीडिया नेटवर्क NBC के अनुमानों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक गवर्नर वेस मूर और लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर की जोड़ी ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डैन कॉक्स और उनके साथी रॉब क्रोप को बड़े अंतर से हरा दिया।
61 वर्षीय अरुणा मिलर का दोबारा चुना जाना इसलिए अहम है क्योंकि वे अमेरिका के किसी भी राज्य में दूसरे सर्वोच्च कार्यकारी पद (लेफ्टिनेंट गवर्नर) पर काबिज होने वाली एकमात्र भारतीय-अमेरिकी महिला हैं। वे राज्य के बुनियादी ढांचे, परिवहन, मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक विकास की नीतियों में लगातार अहम भूमिका निभाती रही हैं।
ओहिया में बड़ा उलटफेर: ट्रंप समर्थित विवेक रामास्वामी हारे
ओहियो राज्य में गवर्नर पद की रेस पूरे देश में सबसे ज्यादा चर्चित रही जहां रिपब्लिकन पार्टी के उभरते सितारे और ट्रंप के करीबी सहयोगी विवेक रामास्वामी को बड़ा झटका लगा।
डॉ. एमी एक्टन ने विवेक रामास्वामी को हराकर ओहियो की पहली महिला गवर्नर बनने का गौरव हासिल किया।
पिछले 20 सालों में यह पहला मौका है जब किसी डेमोक्रेट ने ओहियो में गवर्नर का चुनाव जीता है। कोविड 19 महामारी के समय ओहियो की स्वास्थ्य निदेशक रहीं 60 वर्षीय डॉ. एक्टन ने जमीनी स्वास्थ्य सेवाओं, दवाओं की कीमतों और मध्यम वर्ग के मुद्दों को अपना मुख्य एजेंडा बनाया।
विवेक रामास्वामी और रिपब्लिकन संगठनों द्वारा चुनाव प्रचार में 100 मिलियन डॉलर का भारी-भरकम फंड झोंकने और आक्रामक 'MAGA' अभियान चलाने के बावजूद मतदाताओं ने डॉ. एक्टन पर भरोसा जताया।
2028 के राष्ट्रपति चुनाव और नीतिगत दिशा पर प्रभाव
2026 के इन मिडटर्म चुनावों के परिणाम केवल सीटों के गणित तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह 2028 के आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमेरिकी मतदाताओं के मूड का स्पष्ट संकेत देते हैं।
1. ट्रंप की नीतियों की परीक्षा: उपनगरीय और स्विंग सीटों पर डेमोक्रेटिक भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की जीत यह दर्शाती है कि आम मतदाता रिपब्लिकन पार्टी की आक्रामक आव्रजन और व्यापार नीतियों के मुकाबले स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आर्थिक स्थिरता को तरजीह दे रहा है।
2. डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर नई बहस: भारतीय-अमेरिकी नेताओं की यह जीत पार्टी के आंतरिक संतुलन को भी प्रभावित करेगी। जहां एक तरफ पार्टी का एक धड़ा लोकलुभावन आर्थिक सुधारों की वकालत कर रहा है। वहीं सुब्रमण्यम और डंडिया जैसे नेता व्यावहारिक, मध्यममार्गी और समावेशी दृष्टिकोण के जरिए तटस्थ मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने में सफल रहे हैं।
कुल मिलाकर 2026 के मिडटर्म चुनावों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय अब केवल चुनावी फंडिंग या वोटबैंक तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अमेरिकी लोकतंत्र के नीति निर्धारण में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
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