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आज पृथ्वी पर क्रैश होगा नासा का 1.5 टन वजनी अंतरिक्ष यान, मुंबई-बेंगलुरु समेत इन शहरों पर मलबा गिरने का खतरा

Published: Wed, 04 Nov 2026 09:53 AM (IST)

नासा की 1.5 टन की 'स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी' 22 साल बाद पृथ्वी पर लौट रही है, जिसके मलबे भारत के कुछ ...और पढ़ें

अंतरिक्ष यान की तस्वीर (सोशल मीडिया)।

अंतरिक्ष यान की तस्वीर (सोशल मीडिया)।

HighLights

  1. नासा की 1.5 टन स्विफ्ट वेधशाला 22 साल बाद पृथ्वी पर लौट रही।

  2. भारत के मुंबई, हैदराबाद जैसे शहरों में मलबा गिरने की आशंका।

  3. यह वेधशाला 2004 में गामा-रे बर्स्ट अध्ययन के लिए लॉन्च हुई थी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पृथ्वी पर आज आसमान से 'आफत' आने वाली है। दरअसल नासा की 1.5 टन की अंतरिक्ष वेधशाला पृथ्वी पर बुधवार को आ रही है। इस क्रम में इसके मलबे भारत के कुछ हिस्सों पर गिर सकते हैं।

नासा की अंतरिक्ष वेदशाला पृथ्वी पर करीब 22 साल तक सेवा देने के बाद आ रही है। वैज्ञानिकों ने 22तक अंतरिक्ष में इसका इस्तेमाल किया जिसमें कई अहम प्रोजेक्ट्स शामिल रहे।

2004 में किया गया था लॉन्च

'नील गेहरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी' को 2004 में ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों, जिन्हें 'गामा-रे बर्स्ट' कहा जाता है, का अध्ययन करने के लिए लॉन्च किया गया था। लॉन्च के समय, यह अपनी तरह की पहली 'मल्टीवेवलेंथ' वेधशाला थी, जिसे अपने तीन टेलीस्कोपों की मदद से ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

आने वक्त जल सकता है कुछ हिस्सा

नासा ने सोमवार को बताया कि यूएस स्पेस फोर्स का अनुमान है कि यह अंतरिक्ष यान चार नवंबर को सुबह लगभग 3:30 बजे आ सकता है। हालांकि उन्होंने इसमें 11 घंटे का अंतर का भी अनुमान जताया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने ऐसी उम्मीद जताई है कि वायुमंडल से गुजरते समय इस अंतरिक्ष यान का ज्यादातर हिस्सा जल जाए, लेकिन कुछ हिस्से बच भी सकते हैं।

बचे हुए मलबे को समुद्र में गिराने की तैयारी

बचे हुए मलबे के हिस्से को समुद्र में गिराने की तैयारी है। हालांकि, भारत, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, और मध्य व दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्से भी इसके संभावित गिरने वाले क्षेत्र में आ सकते हैं। भारत में इसके हिस्से दक्षिण तरफ गिर सकते हैं। इसमें मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, भुवनेश्वर और कोच्चि जैसे शहर शामिल हैं। वहीं, इसरो ने इस बारे में कुछ नहीं बयान जारी कर नहीं कहा है।

इन मिशन में रहा सहयोग

अंतरिक्ष यान दो दशकों से भी अधिक समय तक वैज्ञानिक कार्य करने में सफल रहा। नासा ने कहा, "इस वेधशाला ने ब्रह्मांडीय वस्तुओं और घटनाओं के बारे में हमारी समझ को काफी व्यापक बनाया है इसमें सुपरमैसिव ब्लैक होल से संचालित सक्रिय आकाशगंगाएं, एक्स-रे फ्लेयर्स वाले तारे, सुपरनोवा विस्फोट, और हमारे अपने सौर मंडल के धूमकेतु व क्षुद्रग्रह शामिल हैं।"

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