विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

होर्मुज का 600 साल पुराना इतिहास, चीन की नजर; अमेरिका बेखबर, कैसे पलटी पूरी कहानी?

Published: Sat, 26 Sep 2026 12:03 AM (IST)

पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज और बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य के ऐतिहासिक महत्व और उन पर नियंत्रण के प्रयासों पर चर्चा तेज है।

Hormuz और Bab al-Mandeb वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग (AI जेनेरेटेड)

Hormuz और Bab al-Mandeb वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग (AI जेनेरेटेड)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज और बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य की चर्चा फिर तेज है। दोनों समुद्री रास्ते वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम हैं।

बाब अल मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है, जबकि होर्मुज फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है। इतिहास बताता है कि इन समुद्री मार्गों पर प्रभाव जमाने की कोशिश सदियों पुरानी है।

चीन की समुद्री पहुंच

कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के इब्राहिम अल-मराशी के अनुसार, 1405 से शुरू हुई मिंग वंश के दौर की समुद्री यात्राओं में चीनी मुस्लिम एडमिरल झेंग हे का अभियान सबसे उल्लेखनीय था। उनके विशाल बेड़े ने हिंद महासागर के कई बंदरगाहों तक पहुंच बनाई।

1414 में वह होर्मुज पहुंचे और इसके बाद लाल सागर क्षेत्र तक गए। हालांकि उनका उद्देश्य स्थायी कब्जे से ज्यादा व्यापार और चीन का प्रभाव बढ़ाना था। 1430 के बाद मिंग शासन ने समुद्री अभियानों को सीमित कर दिया। आज का चीन भी झेंग हे के दौर को खाड़ी और हिंद महासागर से अपने ऐतिहासिक संबंधों के संदर्भ में पेश करता है।

पुर्तगालियों की तोपों वाली रणनीति16वीं सदी में पुर्तगाल ने हिंद महासागर के व्यापार मार्गों पर सैन्य दबदबा बनाने की कोशिश की। 1513 में अफोंसो डी अल्बुकर्क ने अदन पर हमला किया, लेकिन वहां कब्जा नहीं कर सका। 1515 में उसने होर्मुज पर कब्जा कर लिया।

पुर्तगालियों ने जहाजों के आवागमन के लिए ‘कारताज’ नाम की परमिट व्यवस्था लागू की, जिससे समुद्री व्यापार पर उनका नियंत्रण मजबूत हुआ। 1622 में सफाविद ईरान और अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी की संयुक्त कार्रवाई में पुर्तगालियों को होर्मुज से बाहर कर दिया गया।

ब्रिटिशों का अदन से साम्राज्य तक विस्तार

इसके बाद होर्मुज और लाल सागर क्षेत्र में ओटोमन, सफाविद, ओमानी और यूरोपीय शक्तियों का प्रभाव अलग-अलग दौर में बढ़ता रहा। डच और अंग्रेज व्यापारिक कंपनियां भी इस प्रतिस्पर्धा में शामिल हुईं। बाब अल मंदेब के पास ब्रिटिश रणनीति का सबसे अहम केंद्र अदन बना।

1839 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अदन पर कब्जा कर लिया। बाद में पेरिम द्वीप पर भी ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित हुआ। 1869 में स्वेज नहर खुलने के बाद लाल सागर और बाब अल मंदेब का सामरिक महत्व और बढ़ गया और अदन ब्रिटिश समुद्री नेटवर्क का अहम पड़ाव बन गया।

अमेरिका के लिए इतिहास का सबक

1980 में राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने फारस की खाड़ी में बाहरी ताकत के प्रभुत्व की कोशिश को अमेरिकी हितों के लिए गंभीर खतरा माना था। लेकिन इतिहास का बड़ा सबक यह है कि किसी समुद्री ‘चोकप्वाइंट’ पर सैन्य मौजूदगी या नियंत्रण से आसपास के समाजों और राजनीतिक ताकतों पर पूर्ण नियंत्रण नहीं मिल जाता।

होर्मुज और बाब अल मंदेब की कहानी यही दिखाती है कि समुद्री रास्तों पर प्रभाव के साथ स्थानीय राजनीति, क्षेत्रीय ताकत और व्यापारिक हित भी निर्णायक बने रहते हैं।

(द कन्वर्सेशन)

यह भी पढ़ें- होर्मुज के पास जहाज पर टॉरपीडो हमला, एक भारतीय नाविक की मौत; 19 को बचाया गया

यह भी पढ़ें- इधर ट्रंप करते रहे ईरान के साथ अच्छी बातचीत का दावा, उधर होर्मुज में हो गए धमाके