वाशिंगटन, न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स। यह तो सभी जानते हैं कि एक्सरसाइज यानी व्यायाम से शरीर हृष्ट-पुष्ट रहता है और कई प्रकार की बीमारियां भी दूर रहती हैं। अब एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि व्यायाम करने से गंभीर डिप्रेशन यानी अवसाद से जूझ रहीं महिलाओं को इससे निजात मिल सकती है। हालांकि व्यायाम से होने वाले फायदे इस बात पर निर्भर करते हैं कि हम कौन-सा व्यायाम कब और कैसे कर रहे हैं। क्या हम घर पर स्वत: एक्सरसाइज कर रहे हैं या किसी कोच के नेतृत्व में।

मूड भी रखता है दुरुस्‍त
हाल में हुए ध्ययन यह बताते हैं कि व्यायाम हमारे मूड को ठीक रखता है और कई अध्ययनों में यह दावा भी किया गया है कि शारीरिक रूप से सक्रिय लोग सुस्त रहने वाले या व्यायाम नहीं करने वाले लोगों की तुलना में ज्यादा खुश रहते हैं। कुछ परीक्षणों में इस बात का दावा भी किया गया है कि नियमित व्यायाम से चिंता और अवसाद को कम किया जा सकता है। यह अवसादरोधी दवाओं जितना ही प्रभावी हो सकता है। लेकिन वैज्ञानिक अभी तक यह नहीं बता पाए हैं कि शारीरिक व्यायाम लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को कैसे ठीक कर सकता है।

व्यायाम से होता है रासायनिक पदार्थों का स्राव
वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्कआउट करने से हमारे पूरे शरीर में कई तरह के प्रोटीन और अन्य जैव रासायनिक पदाथोर्ं का स्नाव होता है। ये पदार्थ रक्त में प्रवेश कर हमारे मस्तिष्क तक पहुंच कर तंत्रिका संबंधी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इससे हमारी भावनाएं भी प्रभावित होती हैं। लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि व्यायाम के दौरान निकलने वाले पदार्थों में से कितने तत्व मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। इसका पता लगाने के लिए आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर जैकब मेयर ने एंडोकैनाबिनोइड्स और रनर्स हाई नामक पदार्थो के बारे पड़ताल शुरू की है।

क्या है एंडोकैनाबिनोइड्स
एंडोकैनाबिनोइड्स शरीर में स्वत: ही उत्पन्न होने वाले साइकोएक्टिव पदार्थ है। इसके यौगिक भांग में भी पाए जाते हैं। यह हमारे शरीर में ऊतकों का निर्माण करते हैं। एंडोकैनाबिनोइड्स हमारे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र में विशेष रिसेप्टर्स को बांधते हैं। साथ ही हमारे मूड को शांत और बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

मस्तिष्क को रखता है शांत
अध्ययन से पता चलता है कि व्यायाम अक्सर रक्तप्रवाह में एंडोकेनाबिनोइड (endocannabinoids) के स्तर को बढ़ाता है, जिसके कारण कुछ लोग को वर्कआउट के बाद खुद को शांत और हल्का महसूस करते हैं। नया अध्ययन हाल ही ‘मेडिसिन एंड साइंस इन स्पोर्ट्स एंड एक्सरसाइज’ में प्रकाशित हुआ है। जिसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि नियमित व्यायाम से गंभीर डिप्रेशन से जूझ रहीं महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य में आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन देखा गया।

सुप्‍त कोशिकाएं हो जाती है सक्रिय
एंडोकेनाबिनोइड के स्नाव ज्यादा होने से यह सीधा मस्तिष्क पर पहुंचकर तंत्रिका की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। जिसके कारण सुप्‍त कोशिकाएं जाग्रत हो जाती हैं। अवसाद के दौरान भी मस्तिष्क की कुछ कोशिकाएं सुप्तावस्था में चली जाती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसे में नियमित व्यायाम डिप्रेशन से जूझ रहीं महिलाओं के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं हो सकता। 
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Posted By: Krishna Bihari Singh

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