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'नशीला पदार्थ देकर घंटों किया दुष्कर्म', अमेरिका की यूनिवर्सिटी में दरिंदगी; 7 स्टूडेंट्स के खिलाफ केस दर्ज

Published: Mon, 28 Sep 2026 11:57 AM (IST)

न्यूयॉर्क में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच दोबारा शुरू हो गई है। ...और पढ़ें

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (सांकेतिक फोटो: रॉयटर्स)

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (सांकेतिक फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। न्यूयॉर्क में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के रूह कंपा देने वाले मामले की जांच दोबारा शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना साल 2024 में कॉर्नेल के काई फाई फ्रेटरनिटी हाउस में घटी थी। अदालती दस्तावेजों में पीड़िता को जेन डो नाम दिया गया है।

उसने विंस्टन ली, स्कॉट क्रेट्जस्मार, स्कॉट नॉरिस, मैथ्यू इंगल्स, जोनाथन नेवेल, गिलियो लोपेज और डिएगो सराबिया नाम के सात छात्रों पर जबरन नशीला पदार्थ देकर घंटों तक यौन उत्पीड़न और रेप करने का गंभीर आरोप लगाया है।

अब पीड़िता ने यूनिवर्सिटी प्रशासन और आरोपी छात्रों के खिलाफ अदालत में दीवानी मुकदमा दायर किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि संस्थान अपने कैंपस में छात्रों को सुरक्षित माहौल देने और इस जघन्य वारदात को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

फ्रेटरनिटी हाउस में नशा देकर दरिंदगी का आरोप

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, वारदात के वक्त पीड़िता की उम्र 20 साल थी और वह इथाका स्थित कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी। घटना वाले दिन वह काई फाई फ्रेटरनिटी हाउस में अपने एक दोस्त से मिलने गई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब वह शराब के असर में थी, तब दो छात्रों ने उस पर केटामाइन नाम का नशीला पाउडर सूंघने का दबाव बनाया और इसके बाद उसके साथ जबरदस्ती शुरू कर दी।

अदालत में पेश याचिका के अनुसार, जब पीड़िता अचेत अवस्था में पड़ी थी, तब एक आरोपी ने छात्रों के स्नैपचैट ग्रुप 'काई फाई एक्टिव्स' में बेहद अश्लील और आपत्तिजनक मैसेज पोस्ट कर अन्य लड़कों को भी कमरे में बुला लिया।

मैसेज के बाद अन्य छात्र भी वहां पहुंचे और बेहोशी की हालत में पीड़िता के साथ कई घंटों तक लगातार दुष्कर्म किया गया। इस चैट के स्क्रीनशॉट अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किए गए हैं।

यूनिवर्सिटी की कार्रवाई पर उठे सवाल

पीड़िता ने घटना के लगभग तीन सप्ताह बाद यूनिवर्सिटी पुलिस विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता के वकील थॉमस गिउफ्रा का कहना है कि यूनिवर्सिटी ने आंतरिक जांच तो की, लेकिन सात में से सिर्फ दो आरोपी छात्रों को ही निष्कासित किया।

बाकी छात्रों को केवल निलंबन, वर्कशॉप में भेजने या निबंध लिखवाने जैसी मामूली सजा देकर छोड़ दिया गया, जबकि पुलिस ने किसी भी आरोपी को गिरफ्तार तक नहीं किया।

मुकदमे में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी ने ऐसा माहौल बनने दिया जहां यौन हिंसा को गंभीरता से नहीं लिया गया। वकील के मुताबिक, इस खौफनाक हादसे के बाद पीड़िता को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और वह गहरे मानसिक अवसाद से जूझ रही है। पीड़िता ने यूनिवर्सिटी और छात्रों पर लापरवाही व अनुबंध उल्लंघन का आरोप लगाते हुए भारी वित्तीय मुआवजे की मांग की है।

अभियोजक, कॉर्नेल प्रशासन और फ्रेटरनिटी की सफाई

मामले पर नए सिरे से शुरू हुई बहस के बीच टॉम्पकिंस काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ने कहा कि पुलिस जांच की विस्तृत समीक्षा की गई थी, लेकिन उस समय आपराधिक धाराओं में केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे। अब अभियोजक इस मामले की नए सिरे से समीक्षा कर रहे हैं।

दूसरी ओर, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उनके आचार संहिता कार्यालय ने स्थापित नियमों के तहत जांच की थी और संबंधित फ्रेटरनिटी विंग को कैंपस से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

हालांकि, छात्र गोपनीयता कानूनों का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी ने व्यक्तिगत छात्रों पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया।

वहीं, काई फाई फ्रेटरनिटी के राष्ट्रीय मुख्यालय ने इन आरोपों को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और मामले को पूरी गंभीरता से ले रहे हैं।

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