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    शीत युद्ध की देन हैं 'तीसरी दुनिया के देश', अमेरिका क्यों कर रहा इन पर रोक लगाने की तैयारी?

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 08:40 AM (IST)

    शीत युद्ध के समय 'तीसरी दुनिया' शब्द उन देशों के लिए इस्तेमाल होता था, जो किसी भी गुट में शामिल नहीं थे। अब अमेरिका इन देशों पर रोक लगाने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि उसे लगता है कि चीन इन देशों को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम गलत है और उसे इन देशों के साथ सहयोग करना चाहिए।

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    सेवियत संघ और अमेरिका के बीच चलने वाला शीत युद्ध। फाइल फोटो

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन देशों से लोगों के अमेरिका आने पर रोक लगाने की योजना बना रहे हैं, जिन्हें उन्होंने या तीसरी दुनिया के देश बताया है। हाल में वाशिंगटन में एक अफगान नागरिक द्वारा कथित तौर पर दो नेशनल गार्ड सैनिकों को गोली मारने के बाद उन्होंने यह बात कही है। आइये जानते हैं तीसरी दुनिया के देशों का उदय कैसे हुआ और इसमें कौन से देश शामिल हैं...

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    शीत युद्ध से आई अवधारणा

    प्रथम, द्वितीय व तृतीय विश्व की अवधारणा शीत युद्ध से आई है। जब दुनिया अमेरिका-समर्थित पश्चिमी ब्लाक और साम्यवादी पूर्वी ब्लाक के बीच विभाजित हो गई थी। तब तटस्थ राष्ट्र व शेष देशों को तृतीय विश्व के रूप में वर्गीकृत किया गया था। अक्सर गरीब या अविकसित देशों का वर्णन करने के लिए इस शब्द का प्रयाेग किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से, प्रथम विश्व का तात्पर्य अमेरिका के साथ जुड़े लोकतांत्रिक, औद्योगिक राष्ट्रों से था। द्वितीय विश्व का तात्पर्य साम्यवादी-समाजवादी राज्यों से था और तृतीय विश्व का तात्पर्य उन अधिकांश देशों से था जो किसी भी गुट से संबंधित नहीं थे।

    प्रथम, द्वितीय,तृतीय विश्व के देश

    प्रथम विश्व में उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, जापान, द. कोरिया व आस्ट्रेलिया शामिल थे। कई अफ्रीकी क्षेत्रों को भी इस समूह में रखा गया था, जैसे स्पेन के अधीन पश्चिमी सहारा, रंगभेद युग का दक्षिण अफ्रीका,दक्षिण पश्चिम अफ्रीका (नामीबिया), अंगोला,मोजांबिक। स्विट्जरलैंड, स्वीडन, आस्ट्रिया, आयरलैंड व फिनलैंड जैसे तटस्थ देश भी प्रथम विश्व माने जाते थे। द्वितीय विश्व में सोवियत गणराज्य, पोलैंड, पूर्वी जर्मनी, चेकोस्लोवाकिया,चीन,मंगोलिया, उत्तर कोरिया, वियतनाम, कंबोडिया शामिल थे। वहीं तृतीय विश्व में अन्य सभी राष्ट्र, अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका के अविकसित कृषि प्रधान देश शामिल थे।

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    अमेरिका के लिए 'चिंताजनक' राष्ट्र

    अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआइएस) के निदेशक जोसेफ एडलो ने एक्स पर लिखा, उन्होंने चिंताजनक देश से आए हर विदेशी नागरिक के ग्रीन कार्ड की कठोर जांच का निर्देश दिए हैं। एडलो के बयान के आशय के बारे में पूछे जाने पर, यूएससीआइएस के प्रवक्ता ने कहा,यह सूची ट्रंप के जून के कार्यकारी आदेश में परिभाषित की गई है, जिसमें 19 देशों को चिंताजनक देशों कहा गया था। इस आदेश ने अफगानिस्तान,म्यांमार, चाड, कांगो-ब्राजाविल, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन के नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान व वेनेज़ुएला के यात्रियों पर भी आंशिक प्रतिबंध लगाया था।

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