स्वामी विवेकानंद के पोस्टर पर आपत्तिजनक टिप्पणी, कोलकाता के प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय ने दो छात्राओं को निकाला
कोलकाता के प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय ने स्वामी विवेकानंद के पोस्टर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में दो छात्राओं को निष्कासित कर दिया है।

स्वामी विवेकानंद के पोस्टर पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय ने छात्रों को निकाला
HighLights
प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय ने दो छात्राओं को निष्कासित किया।
स्वामी विवेकानंद के पोस्टर पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला।
एसएफआइ ने निष्कासन को कठोर कार्रवाई बताया।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता के प्रतिष्ठित प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय ने स्वामी विवेकानंद की तस्वीर वाले पोस्टर पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी लिखने और अन्य संगठनों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में दो छात्राओं को निष्कासित कर दिया है।
विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। जांच समिति की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल के बाद यह कार्रवाई की गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, दोनों छात्राओं को आगे की शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही वे भविष्य में विश्वविद्यालय के किसी भी डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए भी पात्र नहीं होंगी।
विश्वविद्यालय ने अपने बयान में कहा कि वह हमेशा गरिमापूर्ण शैक्षणिक विमर्श और वैज्ञानिक व सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बहस की स्वतंत्रता का पक्षधर रहा है। हालांकि, विचारकों, विचारों या संगठनों के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एसएफआइ ने कार्रवाई को बताया कठोर
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय छात्रसंघ पर नियंत्रण रखने वाले एसएफआइ ने दोनों छात्राओं के निष्कासन के फैसले की आलोचना की है। संगठन के मुताबिक, इनमें एक पूर्व छात्रा और दूसरी स्नातकोत्तर की विद्यार्थी है।
एसएफआइ ने कहा कि वह किसी भी महापुरुष के चित्र वाले पोस्टर को विकृत करने का समर्थन नहीं करता, लेकिन इस मामले में छात्राओं के शैक्षणिक भविष्य पर गंभीर असर डालने वाला फैसला अधिक संवेदनशीलता के साथ लिया जाना चाहिए था।
एसएफआइ की प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय इकाई के पदाधिकारी बीतान इस्लाम ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई का उद्देश्य सुधार और पुनर्वास होना चाहिए, न कि दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई। संगठन ने चेतावनी दी कि इस तरह का निष्कासन दोनों छात्राओं के शैक्षणिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
एबीवीपी ने पुलिस में दर्ज कराई थी शिकायत
विवाद की शुरुआत 13 अक्टूबर को हुई थी, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद की तस्वीर वाला एक पोस्टर लगाया गया था।
संगठन का आरोप था कि पोस्टर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखकर उसे विकृत किया गया। इसके बाद एबीवीपी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। संगठन ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन भी किया था।
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