मुर्शिदाबाद में एक रात में नदी में समा गए 19 घर और प्राचीन मंदिर, बेघर परिवार पेड़ों के नीचे रहने को मजबूर
पद्मा नदी के भीषण कटाव से मुर्शिदाबाद के राधाकृष्णपुर में एक ही रात में 19 घर और एक प्राचीन मनसा ...और पढ़ें

पद्मा नदी के कटाव से राधाकृष्णपुर में 19 घर डूबे

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में पद्मा नदी ने एक ही रात में पूरा रिहायशी इलाका उजाड़ दिया। रघुनाथगंज-2 प्रखंड के तारानगर ग्राम पंचायत के राधाकृष्णपुर में रविवार शाम से शुरू हुए भीषण कटाव में प्राचीन मनसा मंदिर समेत कम से कम 19 घर नदी में समा गए।
कई चाय की दुकानें, मिठाई की दुकानें और साइकिल मरम्मत की दुकानें भी नदी की तेज धारा में बह गईं। कई बीघा खेती की जमीन भी पद्मा में समा चुकी है। अब 50 से 70 घरों पर कटाव का खतरा मंडरा रहा है।
प्राचीन मनसा मंदिर भी नदी की तेज धारा में समाया
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक सप्ताह पहले तक नदी का किनारा बस्ती से काफी दूर था। गत आठ सितंबर से नदी का कटाव शुरू हुआ था, लेकिन पिछले चार दिनों में इसकी गति कुछ कम हो गई थी।
रविवार शाम अचानक नदी की धारा तेज हुई और देखते ही देखते किनारा भरभराकर ढहने लगा। लोग अपनी आंखों के सामने घर और जमीन को नदी में समाते देखते रहे। जान बचाने के लिए कई परिवारों को अपना गांव छोड़ना पड़ा।
जिन परिवारों ने घर और सामान गंवाया है, उनमें कई खुले आसमान के नीचे, सड़क किनारे और पेड़ों के नीचे रात गुजार रहे हैं। कुछ परिवारों ने स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में शरण ली है।
पीड़ित सुप्रिया दास ने बताया कि उनके दो कमरे, रसोईघर, स्नानघर, बरामदा और चारदीवारी तक नदी में समा गए। घर से सामान निकालने का भी पर्याप्त समय नहीं मिला।
बेघर परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर
ग्रामीण प्रशासन पर भी नाराज हैं। बाबुल दास ने आरोप लगाया कि चार दिनों से कटाव जारी रहने के बावजूद प्रशासन की ओर से समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया।
केवल कुछ बालू की बोरियां डालकर काम चलाया गया, लेकिन उन्हें अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। प्रेमकुमार सिंह ने कहा कि केवल बालू की बोरियों से नदी के तांडव को रोकना संभव नहीं है।
उन्होंने तत्काल बोल्डर डालकर स्थायी तटबंध बनाने की मांग की। ऐसा नहीं हुआ तो पूरा राधाकृष्णपुर गांव ही राज्य के नक्शे से मिट सकता है। पिछले साल भी नदी कटाव में घर गंवा चुके काशीनाथ दास ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें पट्टे की जमीन देने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक मामला फाइलों में अटका है।
विस्थापित परिवारों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। कटाव की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को जंगीपुर पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह, अनुमंडल अधिकारी गद्दाम सुधीरकुमार रेड्डी, स्थानीय प्रखंड विकास अधिकारी और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि रविवार रात से ही पुलिस की ओर से माइक के जरिए बेहद खतरनाक इलाकों में रहने वाले लोगों को वहां से हटने की चेतावनी दी जा रही है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में पुलिस बल की तैनाती भी की गई है।
