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भक्ति के आंगन में देशभक्ति का रंग, विभाजन का दर्द बयां कर रहा संतोष मित्र स्क्वायर पूजा पंडाल

By Milan Kumar ShuklaEdited By: Garima Singh
Published: Thu, 15 Oct 2026 08:09 PM (IST)Updated: Thu, 15 Oct 2026 08:34 PM (IST)

कोलकाता का प्रसिद्ध संतोष मित्र स्क्वायर दुर्गा पूजा पंडाल इस बार 'वंदे मातरम्' थीम पर आधारित है, जो राष्ट्रगीत के ...और पढ़ें

‘वंदे मातरम्’ थीम आधारित कोलकाता का प्रसिद्ध संतोष मित्र स्क्वायर स्थित दुर्गापूजा पंडाल। सभी फोटो जागरण

‘वंदे मातरम्’ थीम आधारित कोलकाता का प्रसिद्ध संतोष मित्र स्क्वायर स्थित दुर्गापूजा पंडाल। सभी फोटो जागरण

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मिलन कुमार शुक्ला, कोलकाता। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल, आजादी के संघर्ष की गौरवगाथा और देश के विभाजन की त्रासदी। इन तीनों भावों को समेटे कोलकाता का प्रसिद्ध संतोष मित्र स्क्वायर दुर्गापूजा पंडाल इस बार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पूजा के 91वें वर्ष में पंडाल की थीम ‘वंदे मातरम्’ रखी गई है।

पंडाल का उद्घाटन हो चुका है और पंचमी से ही यहां दर्शन के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी है। आने वाले दिनों में भव्य सजावट और अनूठी प्रस्तुति देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

विधायक सजल घोष की परिकल्पना पर आधारित इस थीम में राष्ट्रगीत की विरासत के साथ स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया है। आयोजकों की कोशिश है कि पंडाल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र न रहे, बल्कि लोगों को देश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की याद भी दिलाए।

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भारत के नक्शे में सिमटी आजादी की कहानी

पंडाल का मुख्य प्रवेश द्वार भारत के नक्शे की आकृति में तैयार किया गया है। इसके अग्रभाग पर विभाजन के दौर की वास्तविक तस्वीरों को जगह दी गई है।

ये तस्वीरें 1947 के उस भयावह समय की याद दिलाती हैं, जब देश के बंटवारे के कारण लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े और विस्थापन की पीड़ा झेलनी पड़ी।

पंडाल में लाल किले की झलक भी दिखाई गई है, जो स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की परंपरा और देश के गौरव का प्रतीक है।

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ट्रेन में दिखेगा विभाजन का दर्द

पंडाल का एक प्रमुख आकर्षण विभाजन के दौरान सीमा पार जाने को मजबूर लोगों की यात्रा को दर्शाती ट्रेन है। इसमें यात्रियों की सजीव प्रतिमाओं के साथ धुएं और अन्य दृश्य प्रभावों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे चलती ट्रेन का एहसास होता है।

यह दृश्य विभाजन के समय की अफरातफरी और विस्थापित परिवारों की पीड़ा को जीवंत करता है। पंडाल में खुदीराम बोस और मातंगिनी हाजरा जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं भी लगाई गई हैं।

वहीं, कोलकाता के इतिहास को समर्पित एक विशेष दीवार पर डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा शहर की ऐतिहासिक विरासत को रेखांकित करती है।

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कमल, भारत माता और शिव की झलक

भव्य रोशनी के लिए मशहूर संतोष मित्र स्क्वायर में इस बार पहली बार लाइट एंड साउंड शो प्रस्तुत किया जा रहा है। पंडाल कलाकार शिबशंकर दास के मुताबिक, इसकी परिकल्पना हैदराबाद के गोलकोंडा किले में होने वाले शो की तर्ज पर की गई है।

प्रवेश के समय छत से लटकती कमल की कलात्मक संरचना दर्शकों का ध्यान खींचती है। एक ओर भारत माता का चेहरा और दूसरी ओर भगवान शिव की प्रतिमा दिखाई देती है।

वहीं, मिंटो पाल द्वारा तैयार मां दुर्गा की प्रतिमा अपने पारंपरिक स्वरूप में रखी गई है। इतिहास, देशभक्ति, आध्यात्मिकता और आधुनिक तकनीक का यह संगम संतोष मित्र स्क्वायर को इस दुर्गोत्सव के खास आकर्षणों में शामिल करता है।

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