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कोलकाता: 'कैश ऑन डिलीवरी' के नाम पर ठगी, धोखाधड़ी के मामले में 17 लोग गिरफ्तार

Published: Wed, 22 Apr 2026 04:17 PM (IST)

कोलकाता पुलिस ने 'कैश ऑन डिलीवरी' मोड के जरिए हो रही साइबर धोखाधड़ी के मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया है।

कैश ऑन डिलीवरी के नाम पर ठगी (प्रतीकात्मक फोटो)

कैश ऑन डिलीवरी के नाम पर ठगी (प्रतीकात्मक फोटो)

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। 'कैश ऑन डिलीवरी' मोड के जरिए किए गए साइबर धोखाधड़ी के मामले में कोलकाता पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मोड का इस्तेमाल कई लोग ऑनलाइन सामान मंगवाने के लिए करते हैं।

एक मामले की जांच करते हुए कोलकाता पुलिस के साइबर पुलिस विभाग ने गरियाहाट में एक कॉल सेंटर की तलाशी लेने के बाद 17 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें नौ महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने 43 मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप और वायरलेस फोन जब्त किए।

कैश ऑन डिलीवरी के नाम पर ठगी

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि 'कैश ऑन डिलीवरी' के जरिए ऑर्डर किया गया सामान मिलने से पहले ऑनलाइन भुगतान करना उचित नहीं है। सामान मिलने के बाद ही उसकी कीमत का भुगतान किया जाना चाहिए।

ज्यादातर लोग जो ऑनलाइन चीजें ऑर्डर करते हैं, वे सामान मिलने के बाद नकद भुगतान करते हैं। कोलकाता पुलिस के अनुसार, इस बार जालसाजो ने 'कैश ऑन डिलीवरी' को ही धोखाधड़ी का एक जरिया बना लिया है।

कई खरीदार जालसाजों के कहने पर सामान उनके दरवाजे तक पहुंचने से पहले ही गलत जगह पर पैसे भेज देते हैं। इसके बाद, उन्हें ऑर्डर किया गया सामान नहीं मिलता है।

डिजिटल जानकारी चुराकर देते थे ठगी को अंजाम

पुलिस के अनुसार, जालसाज डिजिटल जानकारी चुराते हैं और देखते हैं कि कौन-कौन लोग अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 'कैश आन डिलीवरी' के जरिए चीजें ऑर्डर कर रहे हैं।

जिस कंपनी या विक्रेता से सामान ऑर्डर किया गया है, उसके कर्मचारी खरीदार को सामान पहुंचाने से पहले ही जालसाज खरीदार को फोन कर देते हैं। उसके बाद वे कई तरह के बहाने बनाकर खरीदार से कहते हैं कि वे नकद के बजाय क्यूआर कोड के जरिए पैसे का भुगतान करें।

पुलिस के अनुसार, जो भी खरीदार जालसाजों के जाल में फंस जाते हैं और सामान मिलने से पहले ही क्यूआर कोड या फोन नंबर पर पैसे भेज देते हैं, उनके साथ धोखाधड़ी हो जाती है। जालसाज खरीदार द्वारा ऑनलाइन खरीदा गया सामान उन्हें पहुंचाते ही नहीं हैं।

बाद में, जब असली ऑनलाइन कंपनी के कर्मचारी सामान पहुंचाने आते तो खरीदारों को एहसास होता है कि जिस व्यक्ति को उन्होंने पैसे भेजे थे, वह कोई 'डिलीवरी एजेंट' नहीं था।

इस तरह से ऑनलाइन धोखाधड़ी का यह नया तरीका सामने आया है। इस साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी कई शिकायतों की जांच करते हुए पुलिस ने इस गिरोह का भंडाफोड़ किया और 17 लोगों को गिरफ्तार किया।

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