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बंगाल में नौकरी बहाली की मांग पर अड़े शिक्षक, 30 नवंबर को सरकार के खिलाफ विधानसभा मार्च का एलान

Published: Sat, 07 Nov 2026 08:13 PM (IST)Updated: Sat, 07 Nov 2026 08:15 PM (IST)

बंगाल में 2016 के रद शिक्षक पैनल के 'योग्य' उम्मीदवारों ने शहीद मीनार पर विरोध प्रदर्शन किया, सुप्रीम कोर्ट के ...और पढ़ें

बंगाल सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने को लेकर अड़े शिक्षक (फोटो-पीटीआई)

बंगाल सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने को लेकर अड़े शिक्षक (फोटो-पीटीआई)

HighLights

  1. 2016 के रद शिक्षक पैनल के योग्य उम्मीदवारों का विरोध।

  2. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 26,000 नौकरियां जाने का संकट।

  3. 30 नवंबर को विधानसभा तक मार्च की चेतावनी।

जागरण संवाददाता, कोलकाता। बंगाल में 2016 के रद हुए शिक्षक पैनल के 'योग्य' उम्मीदवारों ने शनिवार को शहीद मीनार के पास इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगभग 26,000 नौकरियां जाने के बाद से ये शिक्षक और कर्मचारी गहरे संकट में हैं।

उम्मीदवारों का आरोप है कि सत्ता में आने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वादा किया था कि भाजपा सरकार आने पर वे बिना भ्रष्टाचार के सबूत वाले योग्य उम्मीदवारों की बहाली सुनिश्चित करेंगे।

हालांकि, सत्ता परिवर्तन के छह महीने बीत जाने के बाद भी इस पर कोई कदम न उठाए जाने से उम्मीदवारों में भारी रोष है।

नौकरी नहीं मिली तो मुख्यमंत्री की जाएगी कुर्सी

'क्वालिफाइड टीचर्स एंड स्टाफ प्लेटफॉर्म' के नेतृत्व में उम्मीदवारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी नौकरियां बहाल नहीं की गईं, तो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी की तरह अपनी कुर्सी गंवानी पड़ेगी।

सुमन बिस्वास ने आरोप लगाया कि जब भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ था, तब शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में थे, जिससे इस घोटाले में उनकी संलिप्तता का गंभीर शक पैदा होता है।

विरोध प्रदर्शन को और तेज करते हुए इन उम्मीदवारों ने 30 नवंबर को सियालदह स्टेशन से पश्चिम बंगाल विधानसभा तक एक बड़े मार्च का आह्वान किया है, हालांकि अभी तक इसके लिए पुलिस की अनुमति नहीं मिली है।

नई परीक्षा में असफल अभ्यर्थियों ने उठाई आवाज

हाल ही में स्कूल सेवा आयोग द्वारा आयोजित नई भर्ती परीक्षाओं में 2016 के कई पुराने योग्य उम्मीदवार उत्तीर्ण नहीं हो सके, जिससे उनका गुस्सा फूट पड़ा है। गैर-शिक्षण कर्मचारियों की परीक्षा में भी लगभग 1,500 योग्य उम्मीदवार पास होने से चूक गए।

पूर्व मिदनापुर से आए ऋषि राज मुनियान जैसे प्रदर्शनकारियों ने पूर्ववर्ती और मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने व्यवस्था पर भरोसा कर बदलाव लाया था, लेकिन अब वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राज्य महासचिव बापी प्रमाणिक ने स्पष्ट किया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और तय कानूनी नीतियों के तहत ही भर्ती प्रक्रिया चला रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत हमले न करने की अपील करते हुए सरकार से आग्रह किया है कि वह कानून के दायरे में रहकर प्रभावित परिवारों की मदद के लिए कोई सकारात्मक रास्ता निकाले। 30 नवंबर के प्रस्तावित मार्च को लेकर प्रशासनिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है।

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