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अभिषेक बनर्जी को 3 FIR में मिली अंतरिम राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सरकार, कलकत्ता HC के आदेश को दी चुनौती

Published: Sat, 07 Nov 2026 03:03 PM (IST)

बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा अभिषेक बनर्जी को तीन आपराधिक मामलों में मिली अंतरिम राहत को सुप्रीम कोर्ट ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से मिले अंतरिम संरक्षण के खिलाफ बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है, जिसके तहत अभिषेक को तीन आपराधिक मामलों में 30 नवंबर तक पुलिस की कठोर कार्रवाई (गिरफ्तारी) से अंतरिम राहत मिली हुई है।

राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। दीपावली की छुट्टियों के बाद शीर्ष अदालत में इस मामले की सुनवाई होने की संभावना है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अभिषेक के खिलाफ विभिन्न थानों में कई शिकायतें और एफआईआर दर्ज हुई थीं।

इनमें सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविरों से जुड़ी शिकायतों सहित अन्य आरोप शामिल हैं। इन मामलों में संभावित पुलिस कार्रवाई से राहत के लिए अभिषेक ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था।

हाई कोर्ट ने 25 अगस्त को तीन मामलों में उन्हें अंतरिम संरक्षण दिया था। बाद में सात सितंबर को भी अदालत ने 30 नवंबर तक यह राहत जारी रखी।

अलग-अलग मामलों में एक साथ संरक्षण देने पर राज्य की आपत्ति

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में भी अभिषेक को संरक्षण दिए जाने का विरोध किया था। उसका तर्क था कि उनके खिलाफ अलग-अलग धाराओं के तहत अलग-अलग एफआइआर दर्ज हैं।

ऐसे में प्रत्येक मामले में अलग कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय एक साथ संरक्षण क्यों दिया जाए? राज्य का कहना था कि अभिषेक ने संबंधित मामलों में अग्रिम जमानत की मांग नहीं की थी।

हाई कोर्ट ने राज्य की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अब राज्य ने इसी अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि अभिषेक के खिलाफ दर्ज एफआइआर रद नहीं की जा रही हैं और पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है।

हालांकि, जांच के सिलसिले में उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने से कम से कम 48 घंटे पहले नोटिस देना होगा। अभिषेक को भी जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।

अब सुप्रीम कोर्ट में राज्य की चुनौती पर सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में कोई बदलाव होता है या नहीं।

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