कोलकाता, जागरण संवाददाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार सजा पूरी कर चुके चार रोहिंग्या को जेल में नहीं रख सकती, हालांकि जब तक उन्हें म्यामांर सरकार के सुपुर्द नहीं कर दिया जाता, तब तक जरुरत पड़ने पर निगरानी में खुली जगहों पर रखा जा सकता है। अदालत ने उनके प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया पर केंद्र व राज्य सरकार से 26 फरवरी तक रिपोर्ट भी मांगी है।

गौरतलब है कि इन चारों को गैरकानूनी तरीके से भारत में प्रवेश करने के अपराध में 2016 में बंगाल से गिरफ्तार किया गया था और फॉरेनर्स एक्ट के तहत जिला अदालत ने 18-18 महीने की सजा सुनाई थी। चारों की सजा अब पूरी हो चुकी है, हालांकि प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उन्हें जेल में ही रखा गया है। उनकी रिहाई के लिए सुदीप घोष चौधरी नामक अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में आवेदन किया था।

मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश टीबीएन राधाकृष्णन और न्यायाधीश अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार भारत में अवैध तरीके से प्रवेश करने वाले चारों रोहिंग्या को सजा पूरी होने के बाद जेल में नहीं रख सकती। जरुरत पड़ने पर उन्हें निगरानी में खुली जगहों पर रखा जा सकता है।

प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया में अगर समय लगता है तो अदालत उनके ठहरने के लिए योजना तैयार करने पर विचार कर सकती है। दूसरी तरफ राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि चारों को म्यांमार सरकार को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। 

पुलिस हिरासत में व्यापारी की मौत पर बवाल

चोरी का सामान खरीदने के आरोप में पूछताछ के लिए ले गए व्यापारी की थाने में मौत हो गई। इससे गुस्साए मृतक के स्वजनों ने थाने में घुसकर जमकर हंगामा काटा। घटना के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी बीच वहां पहुंचे तृणमूल समर्थकों के साथ भाजपाइयों की भिड़ंत हो गई। दोनों पक्षों में मारपीट के साथ ही वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। एस सब इंस्पेक्टर पर पूछताछ के दौरान व्यापारी के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

Posted By: Preeti jha

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