उत्तरकाशी, राधेकृष्ण उनियाल। पहाड़ के पंचायत क्वारंटाइन सेंटर प्रवासियों में भय का वातावरण पैदा कर रहे हैं। सेंटरों के आसपास भालू की धमक और गुलदार की दहाड़ से वहां क्वारंटाइन किए गए प्रवासी सहमे हुए हैं। दरअसल, पहाड़ में अधिकांश पंचायत क्वारंटाइन सेंटर उन सरकारी स्कूलों को बनाया गया है, जो गांव से दूर निर्जन स्थानों पर हैं। शाम ढलते ही गुलदार, भालू व जंगली सुअरों की धमक आम है।

ऐसा ही एक क्वारंटाइन सेंटर है उत्तरकाशी जिले की पुरोला तहसील का प्राथमिक विद्यालय गैंडा हुडोली। यहां विभिन्न प्रदेशों से लौटे गांव के 16 लोगों ने गुलदार की दहशत की बीच अपना क्वारंटाइन पूरा किया। उनके लिए क्वारंटाइन के 14 दिन कोरोना से ज्यादा भयभीत करने देने वाले रहे। 

प्राथमिक विद्यालय गैंडा हुडोली उत्तरकाशी जनपद की तहसील मुख्यालय पुरोला से 25 किमी दूर निर्जन स्थान पर है। गांव से स्कूल की दूरी 500 मीटर है। यहां आठ मई को चार महिलाओं व सात बच्चों समेत 16 लोग क्वारंटाइन किए गए थे। इन सभी की शुरुआती दो रातें तो सुकून से कटीं, लेकिन दस मई के बाद गुलदार की दहाड़ ने उनकी नींद उड़ाकर रख दी। कई दफा तो गुलदार स्कूल परिसर में आ धमका।

क्वारंटाइन रहे कैलाश पैन्यूली बताते हैं कि शाम ढलते ही गुलदार स्कूल के आसपास मंडराने लगता था। एक दिन तो दो गुलदार स्कूल परिसर में आ धमके। ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी परेशानी रात के वक्त शौचालय जाने की थी। खासकर बच्चों को शौचालय तक ले जाने में हर वक्त भय बना रहता था। बताया कि सभी लोग शाम होते ही कमरे में कैद हो जाते थे। दस मई के बाद शायद ही ऐसी कोई रात रही होगी, जब उन्होंने स्कूल परिसर में गुलदार की दहाड़ न सुनी हो। 

एसडीएम पुरोला मनीष कुमार बताते हैं कि लोगों ने सोमवार शाम पुरोला-मोरी मार्ग पर डेरिका गांव के पास दो गुलदार देखे जाने की खबर उन्हें दी। इसे देखते हुए उन्होने टौंस वन प्रभाग के डीएफओ सुबोध काला को क्वारंटाइन सेंटरों के आसपास गश्त बढ़ाने के लिए कहा है।

यहां भी है दहशत 

बड़कोट: तहसील मुख्यालय बड़कोट से 15 किमी दूर जूनियर हाईस्कूल को डंडाल गांव का पंचायत क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। स्कूल आबादी वाले क्षेत्र से 150 मीटर की दूरी पर राड़ी के जंगल से लगा हुआ है। ग्राम प्रधान बेताल सिंह ने बताया कि वर्तमान में क्वारंटाइन सेंटर में तीन लोग रखे गए हैं। जो हर वक्त दहशत के माहौल में रह रहे हैं।

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दहाड़ से उड़ जाती है नींद

नौगांव ब्लॉक में भी कई पंचायत क्वारंटाइन सेंटर निर्जन स्थानों पर हैं। इनमें सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति वहां है, जहां बच्चे और महिलाएं क्वारंटाइन हैं। कोटला की प्रधान सरोज बताती हैं कि उनके गांव में भी एक युवक को पंचायत क्वारंटाइन किया गया है। इसी तरह अरुणगौल गांव में पंचायत क्वारंटाइन किए गए भूपेंद्र बताते हैं कि यहां आने के वह एक भी रात ठीक से सो नहीं पाए। गुलदार की दहाड़ ने उनकी नींद उड़ाई हुई है।

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Posted By: Bhanu Prakash Sharma

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