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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 30, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बारिश की बूंदों को सहेजने के लिए 22 गांवों के ग्रामीणों ने किया श्रमदान

By Sunil NegiEdited By:
Published: Tue, 30 Mar 2021 10:08 AM (IST)

आधुनिकता के दौर में समाप्त होती सामूहिकता की भावना के बीच उत्तरकाशी में 22 गांवों के ग्रामीणों ने उम्मीदों की ...और पढ़ें

बारिश की बूंदों को सहेजने के लिए 22 गांवों के ग्रामीणों ने श्रमदान किया।
बारिश की बूंदों को सहेजने के लिए 22 गांवों के ग्रामीणों ने श्रमदान किया।

जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। आधुनिकता के दौर में समाप्त होती सामूहिकता की भावना के बीच उत्तरकाशी में 22 गांवों के ग्रामीणों ने उम्मीदों की अलख जगाई है। ग्रामीणों की यह सामूहकिता भी जल संरक्षण के कार्य में देखने को मिली है। विश्व जल दिवस से ठीक दो दिन पहले 20 मार्च को 22 गांवों के 238 ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से श्रमदान किया।

सरमाली जलागम क्षेत्र के बौंठाटॉप में 10 लाख लीटर की चाल-खाल और दस जल कुंड बनाए। यही नहीं आगामी मानसून सीजन से पहले बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने का प्लान भी तैयार कर दिया है। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने ग्रामीणों की इस सामूहिक पहल का स्वागत किया तथा ग्रामीणों बधाई दी। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि जल संरक्षण का कार्य इसी तरह की सामूहिक पहल से बेहतर तरीके से हो सकता है। जिसमें हर व्यक्ति बारिश के एक-एक बूंद को सहेजने में अपनी जिम्मेदारी निभाए।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर डुंडा ब्लाक का भंडारस्यूं क्षेत्र है। इस क्षेत्र में 22 से अधिक गांव हैं। इन गांवों की पेयजल योजनाएं निकटवर्ती बौंठाटॉप के जंगल से निकलने वाले सरमाली गदेरे से संचालित हो रही हैं। लेकिन, पिछले दो दशक से धीरे-धीरे सरमाली गदेरे का जल स्तर कम होता जा रहा है। और गांवों में आबादी बढ़ने से पानी की मांग भी बढ़ रही है।

रिलायंस फाउंडेशन के परियोजना निदेशक कमलेश गुरुरानी ने ग्रामीणों को चाल-खाल बनाने के लिए प्रेरित किया। जल संचय के साधनों की तलाश की तो सरमाली जल स्रोत के कैचमेंट क्षेत्र बौंठाटॉप व आसपास वर्षों पुराने ताल व चाल खाल सूखे पड़े मिले। फिर 20 मार्च को सरमाली गाड़ के जलागम क्षेत्र के बौंठा टॉप में 22 गांवों के ग्रामीण एकत्र हुए। रिलायंस फाउंडेशन के दिशा निर्देशन तथा जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल मिशन के कैच द रेन अभियान के अंतर्गत ग्रामीणों ने वर्षा जल संचयन के लिए श्रमदान किया।

सामूहिक पहल को लेकर ग्रामीणों का उत्साह देखकर पंचायत प्रतिनिधियों, महिला स्वयं सहायता समूह, वन विभाग के कर्मचारियों एवं नेहरू युवा केंद्र के स्वयं सेवियों ने भी श्रमदान करने में प्रतिभाग किया।

एक बार में एकत्र होगा 10 लाख लीटर पानी

इस सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम में ओल्या, डांग, जसपुर, बल्ला, सरतली, बांदु, मालना, पटारा, जखारी, कल्याणी, जिनेठ, गैंवला, पुजियार गांव, मसून, मंडियासारी, पैंथर, लोलदा, बटियार गांव, सिंगोटि, कुंशी, डबर गांव, भाडूसेरा के ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया। जल संरक्षण को लेकर ग्रामीण काफी उत्साहित दिखे। गांव से बौंठाटॉप पहुंचने के लिए ग्रामीण करीब छह किलोमीटर पैदल चले। जिसके बाद महिला और पुरुष चाल खाल के निर्माण में जुटे। बौंठाटॉप के पास एक बड़ी चाल-खाल का निर्माण किया। इस चाल पर एक समय में 10 लाख लीटर बारिश का पानी एकत्र हो सकता है।

इसके साथ हल्के ढलान पर चल कुंडों का भी निर्माण किया। ओल्या के पूर्व प्रधान मदन मोहन भट्ट बताते हैं कि पिछले दो वर्षों से वे लगातार रिलायंस फाउंडेशन के साथ मिलकर चाल खालों का निर्माण और पुरानी चाल-खालों को जीर्णोंद्धार कर रहे हैं। ताकि जल संरक्षण की इस परंपरागत प्रक्रिया से हमारे पेयजल स्रोतों को मजबूती मिले। जंगलों में नमी से वनाग्नि की घटनाएं भी कम होंगी और वन्यजीवों के लिए वर्ष भर पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। 

रिलायंस फाउंडेशन के परियोजना निदेशक कमलेश गुरुरानी ने बताया कि समुदाय द्वारा किए जा रहे ये प्रयास आस पास के क्षेत्र के गांवों को भी जल जंगल के संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे। ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव बहुत तेजी से दिखाई दे रहे हैं, पिछले वर्ष मानसून की बारिश भी बहुत कम हुई है। इसलिए आवश्यक है कि हम जल के संरक्षण के प्रयास जारी रखें और इसको एक जनांदोलन का रूप दें।

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