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उत्तराखंड में गंगोत्री हाईवे पर सुरंग की दीवार से फूटी जलधारा, गुणवत्ता पर सवाल

Published: Wed, 19 Aug 2026 02:12 PM (GMT+05:30)

गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर तांबाखाणी सुरंग की दीवार से तीसरी बार जलधारा फूटने से गंदगी और राहगीरों की परेशानी बढ़ ...और पढ़ें

बीआरओ को हस्तांतरित होने के बाद भी अब तक शुरू नहीं हो पाया सुधारीकरण कार्य। जागरण

बीआरओ को हस्तांतरित होने के बाद भी अब तक शुरू नहीं हो पाया सुधारीकरण कार्य। जागरण

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जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तांबाखाणी सुरंग की दीवार से फिर तीसरी बार जलधारा फूट पड़ी है।

रिसाव बढ़ने से सुरंग में गंदगी का आलम है। लेकिन, बीआरओ को सुरंग हस्तांतरित हुए आठ माह का समय होने के बावजूद अब तक सुरंग में सुधारीकरण कार्य शुरू नहीं हो पाये हैं, जबकि पूर्व में बीआरओ के अधिकारियों ने सुरंग हस्तांतरित होने के बाद इसमें सुधारीकरण करने की बात कही थी।

19 करोड़ रुपये की लागत

बता दें कि जिला मुख्यालय से गुजरने वाले गंगोत्री हाईवे पर करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से 370 मीटर लंबी तांबाखाणी सुरंग वर्ष 2013 में बनकर तैयार हुई थी, जिसमें निर्माण के बाद से ही पानी के रिसाव की समस्या बनीं हुई है। पिछले कई वर्षों तक यह सुरंग देखरेख के लिए किसी विभाग या एजेंसी की जिम्मेदार तय न होने से लावारिश स्थिति में रही।

वर्ष 2021 में तत्कालीन डीएम मयूर दीक्षित ने इसे बीआरओ को हस्तांतरित करने की कवायद शुरू की। गत वर्ष दिसंबर माह में इसे बीआरओ को हस्तांतरित किया गया। लेकिन, आठ माह बाद भी इसमें सुधारीकरण कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। वहीं, मानसून सीजन में प्रति वर्ष सुरंग की दीवारों से जलधाराएं फूट रही हैं। इस कारण रिसाव बढ़ने से सुरंग के फुटपाथ पर जलजमाव सहित गंदगी बढ़ रही है।

पूर्व में वर्ष 2023, फिर वर्ष 2025 में भी इसकी दीवारों से जलधाराएं फूटी थी, तब एक बार प्रशासन ने जांच को विशेषज्ञ समिति का भी गठन किया था। वर्तमान में सुरंग की बांयी दीवार से फिर पानी की धारा फूट पड़ी है, जिससे लगातार पानी निकल रहा है। इससे सुरंग निर्माण की गुणवत्ता के साथ इसके भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

तांबाखाणी सुरंग की मरम्मत को डीपीआर निर्माण के लिए परिवहन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें टेंडर के माध्यम से निर्माण कंपनी का चयन होगा, जिसकी प्रक्रिया गतिमान है।पानी के रिसाव की समस्या को लेकर पहले विशेषज्ञ एजेंसी से अध्ययन कराने को कहा गया है, अध्ययन के बाद ही मरम्मत संबंधी कार्य करवाए जाएंगे। - राज किशोर, कमांडर बीआरओ

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