उत्तरकाशी रामलीला में 57 वर्षों से रस घोल रहे प्रह्लाद सिंह, अब नई पीढ़ी को सिखा रहे संगीत के गुर
प्रह्लाद सिंह पिछले 57 वर्षों से उत्तरकाशी की रामलीला में नाल वादन कर रहे हैं, जो अब 69 वर्ष की आयु में भी अपनी संगीत साधना जारी रखे हुए हैं।

HighLights
प्रह्लाद सिंह 57 वर्षों से उत्तरकाशी रामलीला में नाल वादन कर रहे।
टीन के डिब्बों से शुरू हुआ संगीत का सफर, अब 69 वर्ष के।
सेवानिवृत्ति के बाद भी नई पीढ़ी को सिखा रहे संगीत।
अजय कुमार, उत्तरकाशी। ढोलक और तबले के मिश्रित रूप नाल पर जब प्रह्लाद सिंह की उंगलियां थिरकती हैं तो रामलीला के मंच पर संगीत का रस घुलने लगता है। सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त 69 वर्षीय प्रह्लाद सिंह पिछले करीब 57 वर्षों से ढोलक व नाल वादन की दुनिया से जुड़े हैं। वर्तमान में वह उत्तरकाशी की ऐतिहासिक रामलीला में नाल वादन कर रहे हैं। जिला मुख्यालय से लेकर भटवाड़ी ब्लाक के दर्जनभर से अधिक गांवों में रामलीला और धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में भी उनकी थाप गूंजती है।
टीन के डिब्बों से शुरू हुआ सफर
मूल रूप से बिहार के गया जिले के ग्राम पतिआवा, जहानाबाद निवासी प्रह्लाद सिंह बताते हैं कि चार-पांच वर्ष की उम्र से ही संगीत में रुचि जाग गई थी। उस समय वह खाली टीन के डिब्बों को बजाकर धुन निकालने का प्रयास करते थे। 12-13 वर्ष की उम्र में ढोलक बजाना शुरू किया।
वर्ष 1966 में गांव में अकाल पड़ने पर वह रोजगार की तलाश में कोलकाता चले गये, वहां करीब एक वर्ष तक ढोलक बजाई। वर्ष 1969 में देहरादून के डाकपत्थर स्थित छिबरो पावर हाउस पहुंचे और स्थानीय रामलीलाओं व संगीत कार्यक्रमों में वादन करने लगे। वर्ष 1984-85 में मनेरी पहुंचकर सिंचाई विभाग में मस्टरोल पर ट्रेस क्लीनर (खलासी) का काम शुरू किया।
इसी दौरान मनेरी बांध कालोनी की रामलीला में नाल वादन करने लगे, जहां करीब 34 वर्षों तक वह नाल वादन करते रहे। वर्ष 2000 के बाद श्री आदर्श रामलीला समिति, उत्तरकाशी से भी जुड़ गए। वह कहते हैं कि लोगों से मिले प्रेम और सम्मान ने उन्हें उत्तरकाशी से जोड़े रखा है। वर्ष 2017 में सिंचाई विभाग से रनर पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनकी संगीत साधना जारी है।
नई पीढ़ी को दे रहे संगीत की सीख
प्रह्लाद सिंह तिलोथ क्षेत्र में रहते हैं, जहां वह इच्छुक युवा और कीर्तन मंडलियों से जुड़ी महिलाओं को ढोलक व नाल वादन के गुर सीखाते हैं। पांच दशक से अधिक समय से जारी उनकी संगीत साधना आज भी रामलीला के मंच पर नाल की थाप के रूप में गूंज रही है।
इन गांवों की रामलीला में भी करते हैं वादन
प्रह्लाद सिंह उत्तरकाशी जिले के तिहार, रैथल, गोरसाली, मल्ला, लाटा, सिल्ला, सारी, औंगी, डिडसारी, भाटुकसौड़, मनेरी गांव, नेताला, गणेशपुर, सिरोर, साल्ड मातली, अठाली, पटारा और कामर आदि की रामलीला में भी नालवादन करते आ रहे हैं। कई जगह से आयोजक उन्हें नाल वादन के लिए विशेष रूप से लेने आते हैं।
