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कभी जन आंदोलन का पर्याय था रामलीला मैदान, अब जंतर-मंतर क्यों बना प्रदर्शनकारियों की पहली पसंद?

Published: Mon, 12 Oct 2026 09:27 PM (IST)

कभी राजनीतिक रैलियों और जन आंदोलनों का पर्याय रहा रामलीला मैदान अब अपनी प्रासंगिकता खो रहा है। दिल्ली में प्रदर्शनकारी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. रामलीला मैदान अब धार्मिक आयोजनों तक सीमित।

  2. जंतर-मंतर संसद के करीब, प्रदर्शनकारियों की पहली पसंद।

  3. सुविधाजनक स्थान और निःशुल्क होने से जंतर-मंतर बेहतर।

निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी में जब-जब चुनाव नजदीक आते थे, तो अपनी बात पहुंचाने के लिए रामलीला मैदान राजनीतिक रैली से लेकर जन आंदोलन का पर्याय था।

यही वजह है कि दिल्ली के 2017 के नगर निगम चुनाव तक में भाजपा ने यही से तैयारियों का श्री गणेश किया और अमित शाह ने रैली को संबोधित किया। लेकिन, 2020 के विधानसभा, 2024 के लोकसभा और 2025 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने यहां रैली करने की जहमत तक नहीं उठाई।

जय प्रकाश नारायण ने जनसभा को किया था संबोधित

इक्का दुक्का कार्यक्रमों को छोड़ दें तो इस मैदान से अब प्रमुख और राष्ट्रीय राजनीतिक दलों ने धरना, प्रदर्शन और राजनीतिक रैली से दूरी बना ली है। जबकि जन आंदोलन का यह मैदान गवाह रहा है। क्योंकि सत्ता परिवर्तन के लिए 1975 में जय प्रकाश नारायण ने यही पर जनसभा को संबोधित किया था।

तीन साल में केवल 27 बुकिंग

2011 में यह मैदान बाबा रामदेव और अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का गवाह तक रहा है। लेकिन अब यह मैदान केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक ही सीमित हो गया है। बीते तीन साल में कुल इसकी 27 बुकिंग हुई हैं। इसमें केवल चार ही प्रदर्शन के लिए था।

संत निरंकारी ग्राउंड का आखिरी कार्यक्रम

दिल्ली के जिन दो और अन्य मैदानों को प्रदर्शन के लिए चिह्नित किया गया है उसमें संत निरंकारी ग्राउंड हैं। इसमें आखिरी कार्यक्रम मार्च 2026 में मर्जेंटा लाइन के मेट्रो कारिडोर के उद्धाटन का था। यहां पर पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित किया था।

इसी प्रकार सीबीडी ग्राउंड में कोई राजनीतिक कार्यक्रम बीते तीन वर्षों में नहीं हुआ है। हालांकि यहां डीडीए से किराये पर जमीन लेकर अस्थायी बैंक्वेट हाल बने हुए हैं। इसके साथ यहां सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए बुकिंग होती है।

जंतर-मंतर क्यों है प्रदर्शनकारियों के लिए पहली पंसद?

यह संसद भवन के नजदीक है। प्रदर्शनकारियों को लगता है कि संसद के नजदीक आकर वह सरकार के सामने अपनी बात रख पा रहे हैं। साथ ही यहां पर प्रदर्शन से चर्चा में जल्दी आ जाते हैं। यहां पर घने पेड़ हैं और साफ सुथरा इलाका है। इसलिए गर्मी, मानसून या ठंड में यहां पर प्रदर्शन करना ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है।

गर्मी में पेड़ों की छांव मिल जाती है। ठंड में सड़क के बीच में पेड़ों से निकलकर आने वाली गुनगुनी धूप भी लोगों को राहत देती है। जबकि वर्षा में पेड़ भी भीगने से बचने के लिए ओट बन जाते हैं। इसके साथ यहां पहुंचना सुविधाजनक है।

शक्ति प्रदर्शन करना होगा मुश्किल

वहीं, रामलीला मैदान, सीबीडी ग्राउंड और निरंकारी मैदान खुले और कच्चे मैदान हैं। यहां पेड़ों की संख्या भी कम हैं। इसलिए धूप, वर्षा और ठंड से बचने के लिए बड़े टेंट या हैंगर लगाने की जरूरत होती है, जिसका खर्चा ही लाखों में आता है।

यहां पर शक्ति प्रदर्शन करना हो तो कम से 40 से 60 हजार लोगों को जुटाना पड़ेगा। तभी भीड़ दिख पाएगी। इन स्थानों पर प्रदर्शन के लिए शुल्क देना पड़ता है जबकि जंतर-मंतर निश्शुल्क है।

दो मैदान में चल रही है रामलीला

राजधानी दिल्ली के तीन मैदान धरना प्रदर्शन के लिए विकल्प के लिए सुझाए गए हैं। उसमें से सिर्फ संत निरंकारी मैदान ही फिलहाल धरना प्रदर्शन के लिए उपलब्ध हैं।

रामलीला मैदान, पुरानी दिल्ली में वर्षों पुरानी रामलीला का आयोजन और झूले लगे हुए हैं। जबकि पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी ग्राउंड में तीन रामलीलाओं का आयोजन हो रहा है। अभी 21 अक्टूबर तक इन स्थानों पर धरना प्रदर्शन के लिए कोई स्थान उपलब्ध नहीं है।

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