चिन्यालासौड़ (उत्तरकाशी), जेएनएन। दो दशक पहले चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के खालसी गांव निवासी बैशाखू लाल ने कभी नहीं सोचा था कि वह जिस जन्मभूमि को छोड़कर प्रदेश में नौकरी के लिए जा रहा है, आज उसी जन्म भूमि में उसे अपने स्वजनों के साथ दुबारा लौटना पड़ेगा।

बैशाखू लाल ने बताया कि 20 साल से वह अपने परिवार के साथ पंजाब के फिरोजपुर में किराये के मकान में रहता था। किसी तरह से वह अपने परिवार के साथ रहकर प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर परिवार को भरण पोषण कर रहा था। परिवार में उनके साथ उनकी पत्नी, तीन बेटे, दो बहू और नातियों को मिलाकर 13 सदस्य हैं।

कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण रोजगार भी छीना और परिवार के भरण पोषण का संकट पैदा हुआ। फिर 58 वर्षीय बैशाखू लाल ने परिवार के साथ गांव लौटने का मन बनाया। 26 मई को अपने पूरे परिवार के साथ अपने गांव खालसी पहुंचा। जहां उनका परिवार प्राथमिक विद्यालय खालसी में पंचायत क्वारंटाइन है। 10 जून को उनका क्वारंटाइन का समय समाप्त हो जाएगा। 

अब बैशाखू लाल के सामने समस्या आवास की है। बैशाखू लाल का पैतृक घर पूरी तरह से टूट गया है। अब बैशाखू लाल उन्होंने अपने गांव में ठेकेदार को दो कमरे बनाने का ठेका दिया है। जो करीब एक महीने में तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अब उनके सामने बेरोजगारी की समस्या खड़ी हो गई है।

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जो जमा पूंजी है वह तो दो कमरे बनाने में खर्च हो जाएगी। क्वारंटाइन के बाद खाने और रहने की व्यवस्था कैसे होगी अभी पता नहीं है। लेकिन, गांव की प्रधान और ग्रामीणों का आश्वासन मिला है। खालसी प्रधान आरती कंडियाल ने बताया कि बैशाखू लाल का राशन कार्ड बनाया जा रहा है। साथ ही मनरेगा जॉब कार्ड भी बनाया जाएगा। ग्राम पंचायत बैशाखू लाल की हर संभव मदद करेगी।

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