मां के संघर्ष को मिला मुकाम: दोनों बच्चों की एक साथ लगी नौकरी, बेटी बनी एलोपैथिक फार्मेसी अफसर... बेटे का आयकर विभाग में चयन
पति की मृत्यु के बाद मां शांति देवी ने अभावों में भी बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने दी, जिसके सुखद ...और पढ़ें

रेखा बनीं एलोपैथिक फार्मेसी अधिकारी, छोटे भाई सुशील का आयकर विभाग में चयन.

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, खटीमा। पैरों में चप्पल टूटी हो तो नई चप्पल बाद में खरीदी जा सकती है, लेकिन बच्चों की फीस जमा करने और किताबें खरीदने में देर नहीं होनी चाहिए। सिसैया मेलाघाट की शांति देवी ने पति को खोने के बाद इसी सोच के साथ चार बच्चों को आगे बढ़ाया।
कभी त्योहार पर अपने लिए नए कपड़े नहीं खरीदे तो कभी अपनी जरूरतें टाल दीं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई पर आंच नहीं आने दी। वर्षों के इस संघर्ष का सुखद परिणाम अब सामने है। बेटी रेखा का एलोपैथिक फार्मेसी अधिकारी और बेटे सुशील कुमार का आयकर विभाग में चयन हुआ है।
पांच अक्टूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से नियुक्ति पत्र मिलने के बाद घर लौटी रेखा को देखकर मां की आंखों में खुशी के आंसू थे। बस एक कसक थी आज बच्चों के पिता होते तो यह खुशी और बड़ी होती।
तंग आर्थिक स्थिति के बावजूद नहीं हारी हिम्मत
सिसैया मेलाघाट के धर्मजीत के परिवार की स्थिति साधारण थी, लेकिन उनका सपना बड़ा था। तंग आर्थिक स्थिति के बावजूद धर्मजीत अपने चार बच्चों सिद्धार्थ, रेखा, सुशील और रेनू को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना संजोए हुए थे। वह जानते थे कि गरीबी की बेड़ियों को तोड़ने का एकमात्र जरिया सिर्फ अच्छी शिक्षा है।
धर्मजीत का सपना था कि अभावों से गुजरकर जो संघर्ष उन्होंने स्वयं देखा, वह उनके बच्चों को न झेलना पड़े। वह पहले गायत्री अस्पताल में काम करते थे और बाद में छोटा क्लीनिक चलाने लगे। परिवार के पास थोड़ी खेती थी, जिससे घर के लिए अनाज का कुछ इंतजाम हो जाता था।
सीमित आमदनी के बावजूद पति-पत्नी ने बच्चों की शिक्षा को हमेशा पहली प्राथमिकता दी। वर्ष 2020 में धर्मजीत के निधन ने परिवार को झकझोर दिया। उस समय रेखा बी-फार्मा की पढ़ाई कर रही थीं। घर में कोई ताऊ-चाचा भी नहीं थे, जो परिवार की जिम्मेदारी संभाल सके। ऐसे में बड़े भाई सिद्धार्थ ने परिवार के लिए अपने सपनों को पीछे कर दिया।

एम-फार्मा कर चुके सिद्धार्थ ने बाहर की नौकरी छोड़ दी और मेलाघाट में मेडिकल स्टोर संभालकर परिवार का सहारा बने। रेखा बताती हैं कि पिता के जाने के बाद बड़े भाई ने ही पिता की तरह परिवार को संभाला। मामा गोरखनाथ ने भी मुश्किल समय में परिवार का साथ दिया।
मां खुद नहीं पढ़ीं, लेकिन बच्चों को पढ़ाने की ठानी
रेखा ने बताया उनकी मां शांति देवी अधिक पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन शिक्षा की अहमियत हमेशा समझती रहीं। घर में पैसे कम होने पर सबसे पहले मां अपनी जरूरतों में कटौती करती थीं। शादी-विवाह या त्योहार पर अपने कपड़े खरीदना छोड़ देतीं, मगर बच्चों की फीस, किताब और पढ़ाई की जरूरत को कभी नहीं टालती थीं।
रेखा भावुक होकर कहती हैं, मां के पैरों में चप्पल टूटी हो तो भी उन्हें उसकी चिंता नहीं होती थी, चिंता रहती थी कि बच्चों की फीस समय पर जमा हो और किताबें मिल जाएं। रेखा ने बताया कि उन्होंने किसी संस्थान से नियमित कोचिंग लेने के बजाय ऑनलाइन कक्षाओं और सेल्फ स्टडी को आधार बनाया।
आखिरकार उत्तराखंड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवाएं विभाग में एलोपैथिक फार्मेसी अधिकारी के पद पर उनका चयन हुआ और नियुक्ति भी गृह क्षेत्र खटीमा में मिली। इसी बीच छोटे भाई सुशील कुमार ने भी परिवार की खुशी दोगुनी कर दी। उन्होंने एसएससी सीजीएल के माध्यम से सफलता हासिल कर आयकर विभाग में जगह बनाई।
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मां शांति देवी की आंखों से बार-बार आंसू छलकते रहे। ये आंसू दुख के नहीं, उस लंबी लड़ाई के बाद मिली खुशी के थे, जिसमें उन्होंने पति के बिना बच्चों को संभाला और पढ़ाया। पिता बच्चों की सफलता देखने के लिए आज नहीं हैं, लेकिन जिस मुकाम का सपना उन्होंने देखा था, बेटे-बेटी ने वहां पहुंचकर उस सपने को जीवित कर दिया।
पारदर्शी परीक्षा हुई तो मेहनत पर भरोसा बढ़ा
रेखा ने अपनी चयन परीक्षा के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि परीक्षा ऑफलाइन हुई और इसमें साक्षात्कार नहीं था। पूरी प्रक्रिया में उन्हें पारदर्शिता महसूस हुई। उनका कहना है कि नकल पर अंकुश के लिए राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कड़े कदमों और नकल विरोधी कानून से मेहनत करने वाले युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है। उन्होंने पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को श्रेय दिया।
घर पहुंचकर भाई-बहन को विधायक कापड़ी ने किया सम्मानित
खटीमा : सरकारी सेवा में चयनित सिसैया मेलाघाट निवासी भाई-बहन सुशील कुमार और रेखा को बुधवार को उनके आवास पर पहुंचकर विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने शॉल व पौधा भेंट किया।
गायत्री अस्पताल के डॉ. अजय चौधरी व डॉ. अनीता चौधरी, यूकेडी के संभावित प्रत्याशी रोहित भट्ट व जिलाध्यक्ष हरेंद्र प्रसाद उत्तराखंडी, प्रेस क्लब खटीमा अध्यक्ष हरि नारायण अग्रवाल, विशाल मौर्य ने भी उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस दौरान गोरखनाथ, दीपक फुलेरा, पूर्व प्रधान दीपक कुमार, क्षेत्र पंचायत सदस्य अर्जुन कुमार, एडवोकेट विक्की सक्सेना, इश्तियाक अंसारी, मुस्तकीम मलिक, सूरज गुसाईं, डॉ. उत्तम कुमार व अरविंद कुमार मौजूद रहे।
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पवन गहतोड़ी की मेहनत हुई सफल
खटीमा: कंजाबाग निवासी पवन गहतोड़ी का एसएससी सीजीएल के माध्यम से आयकर विभाग में टैक्स असिस्टेंट पद पर चयन हुआ है। उन्हें भोपाल जोन मिला है। पवन ने किसी नियमित कोचिंग संस्थान में जाने के बजाय घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई को अपनी तैयारी का जरिया बनाया। वह सिलेबस के अनुसार प्रतिदिन पांच से सात घंटे पढ़ाई करते थे।
पिछले वर्ष भी उन्होंने यही परीक्षा दी थी, लेकिन महज पांच-छह अंकों से चयन से चूक गए थे। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और तैयारी जारी रखी। दूसरी कोशिश में सफलता हासिल कर सीजीएल क्वालिफाई करने का सपना पूरा किया।
