उत्तराखंड के खटीमा में आज से सजेंगे जनजातीय संस्कृति के रंग, पहली बार आदि रंगोत्सव... मिलेगी राष्ट्रीय पहचान
खटीमा में 4 से 6 अक्टूबर तक आदि रंगोत्सव का भव्य आयोजन हो रहा है, जिसमें देशभर के जनजातीय सांस्कृतिक दल अपनी कला और परंपराओं का प्रदर्शन करेंगे।

सिक्किम, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र से पहुंचे सांस्कृतिक दल.

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में अगले तीन दिन शहर जनजातीय लोक परंपराओं के रंग में डूबने जा रहा है।
चार से छह अक्टूबर तक मंडी समिति के पास में होने वाले आदि रंगोत्सव में उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों के जनजातीय सांस्कृतिक दल न केवल अपनी कला और सांस्कृतिक परंपराओं की प्रस्तुति देंगे, बल्कि लोकनृत्य एवं लोकसंगीत के इन रंगों के साथ जनजातीय जीवन, कला और शिल्प की छटा भी बिखेरेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर आयोजकों ने पूरी तैयारी कर ली है।
सीएम धामी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री व केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू होंगे शामिल
आयोजन के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम व केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू शामिल होंगे। जनजाति शोध संस्थान व जनजाति कल्याण के उपनिदेशक राजीव सोलंकी ने बताया कि उद्घाटन के बाद विभिन्न राज्यों के जनजातीय सांस्कृतिक दल प्रस्तुतियां देंगे।
शाम छह बजे श्वेता माहरा की प्रस्तुति, लोकगायक सन्नी दयाल व लोकगायिका माया उपाध्याय की संगीतमय प्रस्तुति होगी। आदि रंगोत्सव का आकर्षण केवल मंच पर होने वाले कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा। दूसरे दिन यानी पांच अक्टूबर को सुबह साढ़े 11 बजे से जनजातीय समुदाय के हाथों से तैयार हस्तशिल्पों की प्रदर्शनी शुरू हो जाएगी और दोपहर तीन बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू होगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का क्रम छह अक्टूबर को भी जारी रहेगा। यह आयोजन मात्र गीत-संगीत और नृत्य का उत्सव ही नहीं, अपितु देश के विभिन्न जनजातीय समुदायों की परंपराओं, संस्कृति और उनके जीवन को जानने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।
दर्शक इस उत्सव के बहाने यह जान पाएंगे कि इन समुदायों की कितनी गहरी परंपरा छिपी है। साथ ही युवा पीढ़ी के लिए यह जानने का मौका भी है कि हमारे अपने प्रदेश व देश के दूसरे राज्यों में कौन-कौन सी जनजातियां निवास करती हैं, और उनके रीति-रिवाज, जीवन-शैली और सांस्कृतिक मूल्य क्या हैं।
बनेगी राष्ट्रीय पहचान
खटीमा क्षेत्र अपने आप में उत्तराखंड की एक बड़े जनजातीय समुदाय-थारू की निवासस्थली है। इस आयोजन से थारू समुदाय को देश के दूसरे समुदायों से जान-पहचान बढ़ाने का मौका मिलेगा और दूसरे समुदायों को थारू समुदाय के करीब आने का, साथ ही थारू एवं उत्तराखंड के दूसरे जनजातीय समुदायों की राष्ट्रीय पहचान बनेगी।
आदि रंगोत्सव में शामिल होंगे हनुमान अंश के अभिनेता शोबिनो सत्ये
खटीमा : उत्तराखंड आदि रंगोत्सव में हनुमान अंश के अभिनेता शोबिनो सत्ये व अन्य कलाकार भी शिरकत करेंगे। वह चार अक्टूबर को खटीमा पहुंचेंगे और जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को समर्पित इस महोत्सव का हिस्सा बनेंगे। रंगोत्सव में शामिल होने से पहले शोबिनो सत्ये ने वीडियो संदेश जारी कर उत्तराखंडवासियों से भी आयोजन में पहुंचने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति का उत्थान उत्तराखंड का गौरव और भारत का सम्मान है। खटीमा में उत्तराखंड के अनेक रंग और यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत देखने को मिलेगी। उन्होंने लोगों से चार से छह अक्टूबर तक उत्सव में पहुंचकर इसका हिस्सा बनने की अपील की है।
पांच राज्यों के सांस्कृतिक दल खटीमा पहुंचे
आदि रंगोत्सव को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से जनजातीय सांस्कृतिक दलों के खटीमा पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
शनिवार को सिक्किम, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र के सांस्कृतिक दल खटीमा पहुंच चुके हैं। इन दलों के कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और लोकसंगीत के माध्यम से अपने-अपने राज्यों की जनजातीय संस्कृति के रंग बिखेरेंगे। अन्य राज्यों के दलों के भी पहुंचने का क्रम जारी है।
अधिक से अधिक संख्या में आएं पूर्व सैनिक
खटीमा : पूर्व सैनिक संगठन की बैठक में दर्जा राज्यमंत्री कै.गंभीर सिंह धामी ने संगठन पदाधिकारियों एवं पूर्व सैनिकों से उत्तराखंड आदि रंगोत्सव-2026 में अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की। इस दौरान सूबेदार मेजर धन सिंह, कैप्टन मनोहर सिंह, कैप्टन श्याम सिंह, चंदर सिंह, दीवान सिंह आदि पूर्व सैनिक मौजूद थे।
