रुद्रप्रयाग, [जेएनएन]: जम्मू- कश्मीर के बांदीपुरा सेक्टर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान देश की रक्षा करते हुए जिले के कविल्ठा निवासी मानवेंद्र अपना सर्वोच्च बलिदान देते हुए शहीद हो गया, हालांकि शहीद होने से पहले वह अपने साथियों के साथ बहादुरी से आतंकवादियों का सामना करता रहा तथा गोली लगने के बाद भी दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया। 

जानकारी के मुताबिक जम्मू कश्मीर में बांदीपुरा बार्डर पर बुधवार को अचानक आतंकवादियों ने हमला कर दिया। भारतीय सेना ने जबाब में मोर्चा संभाल लिया। रुद्रप्रयाग जिले के मानवेंद्र और उनके साथियों ने मिलकर दो आतंकियों को ढेर कर दिया था। हालांकि इस दौरान आतंकवादियों से लोहा लेते हुए मानवेंद्र रावत को गोली लग गई, जिससे वह बुरी तरह से जख्मी हो गए।

घायल होने के बावजूद उन्होंने रात करीब साढ़े आठ बजे मां कमला देवी व पत्नी विनीता देवी से भी फोन पर बात कर कहा कि वह ठीक है। चिंता मत करना, मैंने दो आतंकवादियों को मार गिराया है। शहीद सैनिक का एक बेटा ढाई साल अनुराग व पांच साल की बेटी जाहन्वी है। उनका परिवार देहरादून के नकरौंदा में रहता है, जोकि आजकल गांव आए हैं। पत्नी विनीता देवी अपने मायके रामपुर फाटा में थी और सूचना के बाद परिजन गुरुवार की सुबह उसे कविल्ठा लेकर आए।  दो भाई में मावेन्द्र बड़ा भाई था। 

मानवेंद्र 12 वर्ष पूर्व वह सेना में भर्ती हुए थे। शहीद के पिता नरेंद्र सिंह रावत कालीदास स्मारक समिति के अध्यक्ष हैं जबकि माता कमला देवी गृहणी हैं। घटना के बाद पूरा परिवार सदमे में हैं तथा गांव में मातम छा गया है। पार्थिव शरीर को जम्मू से रुद्रप्रयाग जिले में उसके मूल गांव कविल्ठा लाया जा रहा है। गांव के प्रधान विनोद रावत ने बताया कि  शहीद मानवेंद्र पर गांव को नाज है। 

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Posted By: Bhanu