केदारनाथ धाम में रक्षक भकुंट भैरवनाथ के कपाट शीतकाल हेतु बंद, बाबा केदार की प्रक्रिया शुरू
दीपावली पर फूलों से सजे केदारनाथ धाम में रक्षक भकुंट भैरवनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। ...और पढ़ें
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संवाद सहयोगी जागरण, रुद्रप्रयाग। दीपावली के पावन पर्व पर विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम को 20 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप में सजाया गया। फूलों से सजे बाबा केदार के दरबार और मंदिर प्रांगण की अलौकिक छटा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
वहीं, शनिवार को धाम के क्षेत्रपाल एवं रक्षक भगवान भकुंट भैरवनाथ के कपाट विधि-विधान, पूजा-अर्चना एवं यज्ञ-अनुष्ठान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। केदारनाथ धाम की धार्मिक परंपरा के अनुसार बाबा केदारनाथ के कपाट बंद होने से पूर्व क्षेत्रपाल भैरवनाथ के कपाट बंद किए जाते हैं।
मान्यता है कि शीतकाल में भगवान भैरवनाथ केदारपुरी में विराजमान रहकर धाम की रक्षा करते हैं। उनके कपाट बंद होने के साथ ही बाबा केदारनाथ के कपाट बंद होने की पारंपरिक प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
कपाट बंद होने से पूर्व विधि-विधान से पूजा-अर्चना, हवन और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। इस दौरान बाबा भैरवनाथ का विशेष श्रृंगार कर भोग लगाया गया तथा आरती की गई।
धार्मिक आयोजन में स्थानीय हक-हकूकधारी, तीर्थ पुरोहित, मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी और श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर समिति सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने श्रद्धालुओं से दीपावली पर धाम पहुंचकर दीप प्रज्वलित करने तथा मंदिर की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने श्रद्धालुओं के सुख-समृद्धि की कामना भी की। अब आगामी 11 नवंबर को विधि-विधान के साथ बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।
इस अवसर पर केदार सभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, ब्लॉक प्रमुख पंकज शुक्ला, वेदपाठी ओंकार शुक्ला, विनोद शुक्ला, अरविंद शुक्ला, शैलेश बगवाड़ी सहित मंदिर समिति के कर्मचारी, तीर्थ पुरोहित और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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