पिथौरागढ़ में ओलावृष्टि से केले की फसल तबाह, किसानों को मालभोग केले के विलुप्त होने का डर
पिथौरागढ़ के गर्जिया और बगड़ीहाट में हाल ही में हुई ओलावृष्टि से केले की फसल को भारी नुकसान हुआ है, ...और पढ़ें
-1791717032667_m.webp)
जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़। तीन दिन पूर्व की प्रात: गोरी और काली नदी के किसानों के लिए बेहद दुखदाइ रही । सबसे उपजाऊ ओर फलों के हब माने जाने वाले क्षेत्र में ओलों की ऐसी मार पड़ी कि किसान मायूसी के गर्त में जा चुके हैँ। इस घाटी में आज से 44 वर्ष पूर्व तक अदभुत मालभोग केले का उत्पादन होता था।
अपनी खुशबू और विशेष औषधीय गुणों के चलते मालभोग केला हाथोहाथ बिकता था। ढाई से तीन इंच लंबा इस केले की सुगंध कई मीटर दूर पहुंचती थी। पेट की बीमारियों के लिए अचूक दवा माना जाता था।
वर्ष 1982 के मार्च माह में नदी घाटी तक भारी बर्फबारी से यह केला विलुप्त हो गया। इसके स्थान पर ग्रामीणों ने अब दुधकेला,कन्यूरी आदि प्रजाति का उत्पादन कर आजीविका चलाई थी। तीन दिन पूर्व सुबह की भारी ओलावृष्टि ने इस केले को पर संकट गहरा दिया है।
ग्रामीण मालभोग की तरह ही इस केले के विलुप्ति के अंदेशे से सकते में हैं। विधायक विशन सिंह चुफाल ने गर्जिया गांव पहुंच कर क्षति का आंकलन कर कृषि वैज्ञानिकों से बात करने और सरकार से मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है।
असली पीड़तों को मुआवजा मिलने पर भी पेंच
खेती करने वाले अधिकांश किसानो को फसलों के नुकसान का मुआवजा मिलने पर भी पेंच फंसा है। गांव छोड़ चुके लोगों के खेतों में वर्तमान में गांव में रहने वाले किसान खेती कर रहे हैँ। ये ही सबसे अधिक प्रभावित है।
शासन की नीति के तहत मुआवजा वास्तविक भूमि के स्वामी को मिलेगा, खेती करने वाले खेतिहर खाली हाथ रह जाएंगे। गर्जिया निवासी प्रभावित कमान बहादुर, हर सिंह, नंदन सिंह, बगड़ीहाट निवासी दिलीप कुमार, उमेश कठायत और ग्रामीण एकता मंच अस्कोट के तरुण पाल का कहना है कि वास्तविक प्रभावितों को भी मुआवजा दिया जाए।
